मुज़फ़्फ़रनगर दंगों की सीबीआई जांच नहीं: सुप्रीम कोर्ट

  • 26 मार्च 2014
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मुज़फ़्फ़रनगर दंगे की जांच को सीबीआई को सौंपने या विशेष जांच टीम (एसआईटी) गठित करने की मांग वाली एक याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने ख़ारिज कर दिया है.

बुधवार को सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मुज़फ़फ़रनगर के दंगों की सीबीआई के ज़रिए जाँच की ज़रूरत नहीं है, राज्य सरकार की ओर से पर्याप्त क़दम उठाए गए हैं.

हालांकि एक महत्वपूर्ण फ़ैसले में सर्वोच्च अदालत ने उत्तर प्रदेश की अखिलेश यादव सरकार को शुरुआती लापरवाही का ज़िम्मेदार ठहराया है.

अदालत ने कहा कि राज्य सरकार लोगों के मूल अधिकारों की रक्षा करने में विफल रही है.

ख़ास ख़ुफ़िया जानकारी राज्य सरकार को देने के मामले में केंद्र ने कोर्ट में कोई हलफ़नामा नहीं रखा.

सुनवाई के दौरान उत्तर प्रदेश सरकार की तरफ़ से हाज़िर हुए अधिवक्ता ने कहा कि सभी अभियुक्तों को गिरफ़्तार किया गया है. किसी धर्म विशेष की तरफ़ कोई पक्षपात नहीं किया गया.

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'घर लौट सकते हैं पीड़ित'

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राज्य सरकार के वकील ने कहा कि पीड़ितों को दिए गए मुआवज़े की रक़म को कोर्ट द्वारा बढ़ाए जाने के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने इसे 10 लाख से बढ़ाकर 13 लाख रुपए कर दिया है और साथ ही पीड़ितों को सरकारी नौकरी देने का आश्वासन दिया.

सुप्रीम कोर्ट ने 13 लाख के साथ-साथ केंद्र द्वारा दिए जाने वाले दो लाख रुपए की सहायता भी स्वीकार की है.

सुप्रीम कोर्ट ने कुछ और निर्देश भी दिए हैं. कोर्ट ने कहा कि जिन्हें पांच लाख रुपए मुआवज़ा दिया गया. वो भी अपने पुराने घरों में जा सकते हैं और उनकी सुरक्षा राज्य सरकार मुहैया कराए.

इससे पहले अखिलेश सरकार ने कहा था कि जिन 1800 परिवारों को पांच लाख रुपए का मुआवज़ा मिला है, वे अपने घर नहीं लौट सकते.

तल्ख़ टिप्पणी करते हुए सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि अखिलेश सरकार शुरुआत में मामले की गंभीरता समझने में नाकाम रही और ख़ुफ़िया एजेंसियां भी स्थिति को भांपने में पूरी तरह असफल रहीं.

हालांकि कोर्ट ने कहा कि जो क़दम प्रदेश सरकार ने उठाए हैं, उसको देखते हुए अन्य जांच की फ़िलहाल ज़रूरत नहीं है.

यूपी सरकार के अधिवक्ता ने कहा कि राज्य सरकार ने रेप पीड़ितों को पांच लाख रुपए का मुआवज़ा दिया है और जो बच्चे मारे गए उनके परिजनों को भी मुआवज़े का प्रावधान है.

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'निर्देश का पालन होगा'

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Image caption उत्तर प्रदेश सरकार ने कहा है कि कोर्ट के आदेश का पालन होगा.

न्यायालय ने अभियुक्तों को गिरफ़्तार करने का निर्देश देते हुए कहा कि जिन अधिकारियों का तबादला राज्य सरकार ने किया था, वो अपनी बात संबंधित विभाग से कर सकते हैं.

अधिवक्ता ने कहा कि दंगों में 24 लोग लापता थे, जिनमें तीन की मौत की पुष्टि हो चुकी है और 21 लोगों को भी मृत घोषित कर मुआवज़ा देने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी.

उन्होंने कहा कि जिन किसानों का दंगे में जान-माल का नुक़सान हुआ है, उन्हें कृषि दुर्घटना बीमा योजना के तहत मुआवज़ा दिया जाएगा.

कोर्ट ने सही कामकाज न करने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई करने के भी निर्देश दिए.

अखिलेश सरकार ने न्यायालय के निर्देश का पालन करने का आश्वासन दिया.

सितंबर, 2013 में मुज़फ़्फ़रनगर और आसपास हुई सांप्रदायिक हिंसा में क़रीब 65 लोग मारे गए थे और लगभग 50 हज़ार लोग विस्थापित हुए थे, जिनमें ज़्यादातर मुसलमान थे.

इस बीच आम चुनावों की घोषणा भी हो चुकी है और 10 अप्रैल को इलाक़े की दस सीटों पर मतदान होना है. इनमें मुज़फ्फरनगर, शामली, सहारनपुर और बागपत की सीटें शामिल हैं.

मुज़फ़्फ़रनगर संसदीय क्षेत्र से पिछले तीनों सांसद कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी से रहे हैं, जो मुसलमान भी थे.

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