तीन अप्रैल तक जेल में रहना होगा सुब्रत राय को

इमेज कॉपीरइट AP

सहारा समूह के प्रमुख सुब्रत रॉय को कम से कम एक हफ़्ते और जेल में रहना होगा. गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई में यह मामला तीन अप्रैल तक के लिए टल गया है. अब उसी दिन सहारा की ज़मानत पर विचार किया जाएगा.

बुधवार को सुप्रीम कोर्ट ने उनकी ज़मानत के लिए शर्त रखी थी कि अगर सहारा कंपनी दस हज़ार करोड़ रुपए जमा करा देती है तो सुब्रत रॉय को ज़मानत मिल सकती है.

पर सवाल यह है कि कया इतनी बड़ी रक़म देकर सहारा सुब्रत रॉय को जेल से बाहर निकाल सकती है? इसका सहारा की विश्वसनीयता पर क्या असर होगा? जब इस बारे में बीबीसी ने वरिष्ठ पत्रकार और लेखक सुचेता दलाल से पूछा तो उन्होंने कहा कि सहारा के लिए यह समय आसान नहीं है.

दलाल का कहना था कि सीधे तौर पर देखने से लगता है कि सुब्रत रॉय को ज़मानत मिल सकती है लेकिन इसके लिए उन्हें 10,000 करोड़ रुपए का बंदोबस्त करना होगा.

अदालत ने पांच हज़ार करोड़ रूपए नकद और पांच हज़ार करोड़ रूपए बैंक गारंटी के रूप में जमा कराने को कहा है.

दलाल के अनुसार कौन सा बैंक उनको इतने बड़े रक़म की गारंटी देगा यह कहना मुश्किल है.

रास्ता आसान या मुश्किल

लेकिन क्या इससे कंपनी के लिए रास्ता आसान हो गया है, इस सवाल के जवाब में दलाल का कहना था, "मुझे लगता है कंपनी का रास्ता मुश्किल हो गया है. कंपना बहुत सारे उपाय तलाश रही है. मुझे नहीं लगता कि वह सुब्रत रॉयके जेल जाने की घटना की गहराई को अब तक समझ पाई है.''

उन्होंने कहा कि सहारा समूह लगातार सुप्रीम कोर्ट के दो जजों की बेंच पर आरोप लगा रहा है.

इमेज कॉपीरइट AP
Image caption सुब्रत रॉय दिल्ली की तिहाड़ जेल में बंद हैं.

उनके अनुसार सहारा का कहना है कि सुब्रत रॉय के साथ पक्षपात का रवैया अपनाया जा रहा है. साथ ही कोर्ट में सहारा समूह यह दावा कर रहा है कि उसकी दोनों रियल्टी कंपनियों के साथ सुब्रत रॉय का कोई सीधा संबंध नहीं है.

सुचेता दलाल ने कहा कि उन्होंने कोर्ट में जमा हुए दस्तावेज़ों को ख़ुद देखा है और उसकी बुनियाद पर उन्होंने कहा, "उसमें लिखा है कि दोनों कंपनियों के साथ एक छोटी फ़र्म ने सहमति पत्र पर हस्ताक्षर किया था. जिसमें ये पांचों लोग हैं, जिन्हें गिरफ़्तार किया गया है. ये पांच लोग ही उन दोनों कंपनियों के हर छोटे बड़े ख़र्चों का निर्णय करते थे. ज़ाहिर है कंपनी के चेयरमैन होने के नाते सुब्रत रॉय इसके ज़िम्मेदार हैं."

विश्वसनीयता पर असर

दलाल का मानना है कि सहारा के पास अभी भी कोई ठोस जवाब नहीं है और न ही वह मामले की गंभीरता को समझने में अब तक सक्षम है.

इससे सहारा कंपनी की विश्वसनीयता पर कितना असर हो सकता है, ये पूछे जाने पर दलाल का कहना था, "वैसे तो सहारा की कोई विश्वसनीयता थी ही नहीं. क्रिकेटर और फ़िल्मस्टार को छोड़ दें तो बाक़ी लोगों में से कोई भी इस कंपनी पर भरोसा नहीं करता. पांच साल में हमने इस कंपनी के बहीखातों को कभी भी स्पष्ट नहीं पाया.''

उनका मानना है कि यह कंपनी हमेशा रहस्यमयी रही है. इसके आर्थिक ढ़ांचे के बारे में भी जानकारी बहुत कम है.

उनके मुताबिक़ यूपीए सरकार भी इतनी बड़ी कंपनी के बारे में यह नहीं बता सकती कि कंपनी ने कितना टैक्स दिया है या कितना प्रौविडेंट फ़ंड दिया है.

सुचेता दलाल ने कहा कि वो पंद्रह साल से यह जानकारी हासिल करने की कोशिश कर रही हैं लेकिन उन्हें अभी तक कोई ठोस जानकारी नहीं मिल पाई है.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए यहां क्लिक करें. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर भी फ़ॉलो कर सकते हैं.)

संबंधित समाचार