भारतीय कला के सभी बड़े नाम एक छत के नीचे

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Image caption फ्रांसिस न्यूटन सूज़ा का बनाया रेखा चित्र.

ऐसा कम ही होता है कि भारतीय आधुनिक चित्रकला के नामचीन कलाकारों के बनाए रेखाचित्र हमें एक साथ देखने को मिल जाएँ.

कैनवस के फ़लक पर दिखने वाले ऑयल पेंटिंग्स या एक्रेलिक पेंटिंग्स इन कलाकारों की सृजनात्मकता का अंतिम स्वरूप कही जा सकती हैं.

(बंजारा और जिप्सी)

लेकिन कला के किसी सफ़र की शुरुआत रेखाचित्रों से होती है. हमें बड़े कलाकारों की कला का प्रारंभिक स्वरूप शायद ही कभी देखने को मिल पाता है.

लेकिन मुंबई में चल रही एक कला प्रदर्शनी ने यह मुमकिन किया है. इसमें प्रदर्शनी में भारतीय कला के आर्ट मास्टर्स कहे जाने वाले फ्रांसिस न्यूटन सूज़ा, केएच आरा, सैयद हैदर रज़ा, गुलाम शेख, तैयब मेहता के आर्ट वर्क देखे जा सकते हैं.

और उनके बाद की पीढ़ी के लक्ष्मण श्रेष्ठ, सुधीर पटवर्धन और मनजीत बावा जैसे मशहूर कलाकारों के रेखाचित्रों की प्रदर्शनी छत्रपति शिवाजी महाराजा म्यूज़ियम की जहांगीर निकल्सन गैलरी में चल रही है.

इन सभी कृतियों में कलाकार के सफ़र का एहसास होता है और इसी वजह से यह प्रदर्शनी महत्वपूर्ण है.

प्रदर्शनी का टाइटल

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Image caption सुधीर पटवर्धन का बनाया रेखा चित्र.

'टेकिंग लाइन फ़ॉर अ वॉक', प्रदर्शनी के बारे में बात करते हुए जहांगीर निकल्सन आर्ट फाउंडेशन की क्यूरेटर कामिनी स्वाहनी कहती हैं, "ड्रॉइंग वैसे तो अभ्यास के लिए की जाती है, लेकिन उसमें कला का प्राथमिक स्वरूप पूरी तरह से देखा जा सकता है."

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उन्होंने बताया, "आजकल पेंटिंग्स बहुत लोकप्रिय हो गई हैं लेकिन इस स्थिति में रेखाचित्रों को बहुत हद तक नज़रअंदाज़ किया गया है. पेंटिंग्स में भी कई नए माध्यम आ चुके हैं, लेकिन इसका यह अर्थ तो नहीं है कि जिसे कला की शुरुआती अवस्था के रूप में देखा जाता है, उस पर ध्यान ही न दिया जाए."

इस प्रदर्शनी में 45 रेखाचित्र हैं, जिन्हें अलग-अलग कलाकारों ने अपने ड्रॉइंग बोर्ड पर उतारा है. यहां साल 1940 से लेकर साल 2000 तक के रेखाचित्र देखे जा सकते हैं. इस प्रदर्शनी का टाइटल स्विस कलाकार पॉल क्ली की उक्ति 'लाइन इज़ अ डॉट दैट वेंट फ़ॉर अ वॉक' से प्रेरित है.

'संसद उपनिषद'

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Image caption जोगेन चौधरी का बनाया रेखाचित्र.

इस प्रदर्शनी में कई कलाकारों की स्केच बुक्स भी रखी गई हैं तो मक़बूल फ़िदा हुसैन की 'संसद उपनिषद' भी देखी जा सकती है. 'संसद उपनिषद' में हुसैन ने अपने राज्यसभा के सदस्य होने के दिनों पर रेखाओं के जरिए व्यंग्य किया है.

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जहांगीर निकल्सन आर्ट फाउंडेशन के पास 800 पेंटिंग्स हैं जिसमें 100 रेखाचित्र हैं जो कला की शुरुआती स्वरूप की परिभाषा समझने के लिए ज़रूरी हैं.

प्रदर्शनी में अकबर पदमसी, सदानंद बाकरे, जोगेन चौधरी जैसे कलाकारों के रेखाचित्र भी देखे जा सकते हैं. मार्च में शुरू की गई इस प्रदर्शनी की अहमियत को ध्यान में रखते हुए इसके प्रदर्शन की अवधि 30 अगस्त, 2014 तक तय की गई है.

दो ड्रॉईंग प्रदर्शनी

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Image caption ग़ुलाम मोहम्मद शेख का बनाया रेखाचित्र.

इस प्रदर्शनी के अलावा मक़बूल फ़िदा हुसैन जैसे कलाकार के साथ लंबे अरसे तक काम करने वाले मशहूर कलाकार कृष्ण खन्ना के मोनोक्रोम ड्रॉइंग्स और कैनवस की प्रदर्शनी साक्षी आर्ट गैलेरी में देखी जा सकती हैं.

पाँच अप्रैल तक चलने वाली यह प्रदर्शनी भी रेखाचित्रों के ज़रिए सामाजिक और राजनीतिक हालात पर रोशनी डालती है.

(सैयद हैदर रज़ा से बातचीत)

मूलतः फ़रीदाबाद के रहने वाले कृष्ण खन्ना की प्रतीकात्मक कृतियों में रोज़मर्रा की ज़िंदगी में देखे जाने वाले लोग, चहेरे और सामाजिक मुद्दे, ख़ासकर बंटवारे के पहले के वक़्त को देखा जा सकता है.

मुंबई के कला जगत में फिलहाल चल रही ये दोनों प्रदर्शनियाँ आर्ट के शुरुआती स्वरूप की अहमियत दिखलाती हैं.

इतना ही नहीं बल्कि इसमें शामिल किए गए कलाकार भी अपनी कृतियों की आखिरी मंज़िल पर पहुँचने से पहले किस प्रवाह में सफ़र करते हैं, ये प्रदर्शनियाँ उसे जानने का मौक़ा देती हैं.

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