सहारा कर्मचारियों की तनख्वाह में देरी

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उच्चतम न्यायालय द्वारा सहारा इंडिया के मैनेजिंग वर्कर सुब्रत रॉय को सशर्त ज़मानत देने पर सहारा अपने कर्मचारियों से धन इकट्ठा करने पर ज़ोर दे रहा है.

सुप्रीम कोर्ट ने ज़मानत के लिए रॉय से 5,000 करोड़ रूपए जमा करने के लिए कहा है.

31 मार्च को जारी एक पत्र में सहारा ग्रुप के मानव संसाधन विभाग के मुख्य महाप्रबंधक कार्यकर्ता गौरव शर्मा ने सभी वरिष्ठ सहयोगियों और अन्य साथियों से कहा कि उनको मार्च की तनख़्वाह विलम्ब से दी जायेगी.

शर्मा ने अपने पत्र में लिखा, "ग्रुप कंपनियों के बैंक खातों पर लगे प्रतिबन्ध के चलते हम उपलब्ध निधि का भी इस्तेमाल नहीं कर सकते हैं. मौजूदा कठिनाईयों के बावजूद हम स्थिति को सामान्य करने की पूरी कोशिश कर रहे हैं लेकिन फिलहाल हमें आपको यह सूचित करते हुए खेद है कि मार्च 2014 की तनख़्वाह मिलने में देरी होगी."

पत्र में इसका ज़िक्र नहीं है कि कर्मचारियों को मार्च की तनख्वाह कब मिलेगी.

भावनात्मक अपील

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Image caption सुप्रीम कोर्ट ने ज़मानत के लिए सुब्रत रॉय से 5000 करोड़ रूपए जमा करने के लिए कहा है.

सहारा इंडिया के कॉर्पोरेट कम्युनिकेशन विभाग ने यह पत्र उस वक़्त भेजा जब उनसे पूछा गया कि क्या कर्मचारियों को इस माह की तनख़्वाह नहीं दी जायेगी. कर्मचारियों को भय है कि उनको इस महीने की तनख़्वाह नहीं मिलेगी.

इससे पहले सहारा ग्रुप के पैराबैंकिंग विभाग के एग्जीक्यूटिव निदेशक वर्कर डीके श्रीवास्तव ने 26 मार्च को लिखे एक पत्र के माध्यम से "भावनात्मक अपील/अनुरोध" की थी कि "जो जहाँ भी है अपने तथा अपने शुभचिंतकों के माध्यम से अपनी क्षमता से भी आगे बढ़कर रु 1 लाख, 2 लाख, 3 लाख एवं इससे ऊपर जो भी धनराशि हो सकती है सहारयन ई-मल्टीपरपस सोसाइटी लिमिटेड के माध्यम से शीघ्रातिशीघ्र एकत्रित कराने का कष्ट करें. जिससे कि उक्त धनराशि को शीघ्रतापूर्वक जमाकर अपने पूजनीय अभिभावक को सम्मानीय रूप से अपने बीच न्यायायिक हिरासत से बाहर लाया जा सके."

इसमें ध्यान देने योग्य बात यह है कि इस सोसाइटी के शेयर कर्मचारियों के अलावा कोई भी ले सकता है. सदस्यता के फॉर्म में यह कहीं नहीं लिखा है कि सदस्यता शुल्क व शेयर के लिए धनराशि चेक से ली जायेगी. ऐसे में सदस्यों की पहचान शक के घेरे में आ सकती है.

सदस्यता के फॉर्म पर सोसाइटी का पता महाराणा प्रताप नगर, भोपाल दिया गया है.

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