लोकतंत्र के उत्सव में 'मीरा नाचती है, वोट बेचती है'

  • 1 अप्रैल 2014
मीरा

सागरनामा के सफ़र के पहले दिन के दौरान राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या आठ पर चौमू-अजमेर के बीच ट्रक एक कतार में खड़े हैं. एक सपेरन अपनी किशोर बेटी के साथ अपने पारंपरिक गीत-संगीत से थके-हारे ट्रक ड्राइवरों का मनोरंजन कर रही है.

हमारी कार रुकती देख वे उस ओर चली आती हैं. गीत-संगीत बजाते हुए.

उन्हें पैसे चाहिए, कम से कम इतने कि एक किलो आटा आ सके.

माँ ढपली बजाती है. बेटी मीरा उसकी धुन पर नाचती है. पूछने पर वह कहती है नाचना-गाना ही उनका जीवन है.

दस रुपए देने पर सपेरन माँ महंगाई का हवाला देती है- "बाबू महंगाई ने बुरा हाल कर दिया है. एक किलो आटा 25 रुपए में मिल रहा है. हम करें क्या, खाएं क्या?"

करीब 15 साल की मीरा वोट भी डालती है. बिना उम्मीदवार का नाम या उनकी पार्टी के बारे में जाने. सिर्फ़ मीरा ही नहीं, उसके क़बीले के बाकी लोग भी बटन ज़रूर दबाते हैं, बिना उम्मीदवार या उसकी पार्टी के बारे में कुछ जाने.

लोकतंत्र का नाच

मीरा बताती है कि हाल ही में हुए विधानसभा चुनावों में उसने फूल पर बटन दबाया. क्यों के जवाब में वह कहती है- गाँव के प्रधान ने कहा था इसलिए.

लेकिन क्या सपेरे इतने भोले होते हैं कि किसी के भी कहने पर कहीं भी वोट डाल दें? जवाब है नहीं. उन्हें भी अपने वोट की क़ीमत मालूम है.

मीरा बताती है, "हर एक वोट के बदले उन्हें सात-आठ सौ रुपए मिले थे. सिर्फ़ मीरा या उसकी माँ को ही नहीं बल्कि उनकी जाति के बाक़ी लोगों को भी पैसे मिले थे."

Image caption करीब 16 साल की मीरा का वोट 'किसी ने' बनवा दिया है और वह पैसे के लिए वोट डालती भी है.

16वें लोकसभा चुनाव करीब हैं, क्या मीरा फिर वोट डालेगी? मीरा कहती है ज़रूर डालूंगी लेकिन इस बार उसे ही दूंगी जो ज़्यादा पैसे देगा. माँ मीरा की आवाज़ में हाँ में हाँ मिला देती है.

मीरा की दोबारा उम्र पूछने पर माँ कहती है, "है तो ये पंद्रह-सोलह साल की ही है. लेकिन किसी ने वोट बनवा दिया है."

माँ के मुताबिक़ मीरा की शादी हो गई है और पति कॉलेज में पढ़ता है. मीरा कहती है, 'हमारी जाति में जल्दी शादी हो जाती है.'

क्या पढ़ता है पूछने पर मीरा कहती है, मुझे पढ़ाई का नहीं पता, मैं तो बस गाना-बजाना जानती हूँ. बीच में ही उसकी माँ बोल पड़ती है कि पति सुंदर है इसका.

सागरनामा के सफ़र पर हम आगे बढ़ जाते हैं और मीरा और उसकी माँ गीत-संगीत बजाते हुए अगली किसी और गाड़ी की ओर.

मीरा के साथ-साथ लोकतंत्र भी नाचता हुआ दिखता है. करीब 16 साल की शादीशुदा मीरा का भी वोट है जो महज सात-आठ सौ रुपए में किसी ऐसे नेता को चला जाता है जिसके बारे में वह जानती ही नहीं.

लगता है जैसे मीरा और उस जैसे न जाने कितनों का अस्तित्व सिर्फ़ इसलिए ही है कि कुछ नेताओं का राजनीतिक क़द बढ़ सके.

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