मोदीमय हुई बीजेपी में आडवाणी, उमा के अलग सुर

  • 1 अप्रैल 2014
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जहाँ बीजेपी की चुनावी रैलियाँ और मोदी के भाषण उनके नेतृत्व, गुजरात की प्रगति और नरेंद्र मोदी की क्षमताओं पर केंद्रित हैं, वहीं बीजेपी के दो दिग्गज नेताओं शायद इस संदेश और प्रचार को कुछ नया मोड़ देने की कोशिश कर रहे हैं.

यदि पूर्व उपप्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी और मध्य प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती के हाल के भाषणों पर जाएँ तो वे तो मोदी-मोदी करते हुए नहीं नज़र आते.

जहाँ उमा कहती हैं कि मोदी अच्छे वक्ता नहीं हैं, वहीं आडवाणी कहते हैं कि केवल मोदी ही बीजेपी के ऐसे मुख्यमंत्री नहीं तो तीन-तीन बार चुनाव जीते हैं.

आडवाणी ने कहा, “हमारे मोदीजी ही ऐसे नेता नहीं है जिन्होंने हैट्रिक लगाई है. उनकी ही तरह शिवराज सिंह चौहान और रमन सिंह भी तीन बार जीत दर्ज कर चुके हैं.” इस तरह आडवाणी मोदी को लेकर अपनी असहजता जताते रहे हैं.

अच्छे वक्ता

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वहीं उमा भारती का कहना है कि भारतीय जनता पार्टी में अटल बिहारी वाजपेयी ही सबसे अच्छे वक्ता थे और मोदी भी उनका मुक़ाबला नहीं कर सकते हैं.

उन्होंने कहा, “अगर आप गहराई से आकलन करें तो मोदी अच्छे वक्ता नहीं हैं. लेकिन उन्हें सुनने के लिए लोग उनकी रैलियों में जाते हैं लेकिन आप जानते हैं क्यों? लोग मोदी की रैलियों में उन्हें सुनने की जगह उन्हें समर्थन देने के लिए जाते है.”

वो अटल बिहारी वाजपेयी को ही भाजपा का बेहतरीन वक्ता मानती हैं और उनके मुताबिक कोई भी उनकी बराबरी नहीं कर सकता है.

भारतीय जनता पार्टी नरेंद्र मोदी आगे रख कर चुनाव मैदान में उतरी है, लेकिन उन्हें लेकर पार्टी की भीतर ही एकराय नहीं दिखाई देती है. इसकी वजह भारतीय जनता पार्टी को कई बार आलोचना भी झेलनी पड़ती है.

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