शक्ति मिल गैंगरेपः तीन अभियुक्त दोषी क़रार

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मुंबई के सत्र न्यायालय ने गुरुवार को शक्ति मिल में एक महिला पत्रकार से सामूहिक बलात्कार के मामले में तीन अभियुक्तों को धारा 376 (ई) के तहत दोषी क़रार दिया है.

इन तीनों को शुक्रवार को सज़ा सुनाई जाएगी. अगर इन्हें फाँसी की सज़ा सुनाई जाती है तो महाराष्ट्र में इस तरह का यह पहला मामला होगा.

विशेष सरकारी वकील उज्ज्वल निकम ने बीबीसी से कहा, "हमने तीनों अभियुक्तों के लिए कड़ी से कड़ी सज़ा की माँग की है. तीनों अभियुक्त आदतन अपराधी हैं. पहले भी इस तरह के मामले में वे दोषी पाए जा चुके हैं और उन्हें उम्रकैद की सज़ा भी सुनाई जा चुकी है."

इन तीन अभियुक्तों विजय जाधव, कासिम शेख उर्फ़ कासिम बंगाली और सलीम अंसारी को पहले ही टेलिफोन ऑपरेटर महिला से सामूहिक बलात्कार के अपराध में उम्रक़ैद की सज़ा सुनाई जा चुकी है.

पत्रकार से बलात्कार मामले में अदालत ने कुल चार लोगों को दोषी क़रार दिया है. एक अन्य अभियुक्त नाबालिग है इसलिए उस पर अलग से मुक़दमा चल रहा है.

निकम ने बताया, "हमने अदालत को इस बात से अवगत कराया कि ये तीनों अभियुक्त आदतन अपराधी हैं. ये कई अन्य मामलों में जेल जा चुके हैं और फिलहाल निजी मुचलके पर रिहा हैं. इस दलील को मानते हुए, अदालत ने तीनों को दोषी क़रार दिया है. उन्हें शुक्रवार को सज़ा सुनाई जाएगी."

उन्होंने कहा, "बलात्कार विरोधी क़ानून में हुए संशोधन के बाद, इन्हें कम से कम उम्र क़ैद और ज़्यादा से ज़्यादा फाँसी की सज़ा हो सकती है."

आदतन अपराधी

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Image caption महिला पत्रकार के साथ मुंबई की शक्ति मिल में 22 अगस्त 2013 को सामूहिक बलात्कार किया गया था.

टेलिफोन ऑपरेटर सामूहिक बलात्कार की वारदात 31 जुलाई, 2013 को हुई थी. महिला पत्रकार के साथ 22 अगस्त 2013 को सामूहिक बलात्कार हुआ था.

कासिम शेख उर्फ़ कासिम बंगाली, विजय जाधव और सलीम अंसारी इन दोनों मामले में अभियुक्त थे और उन्हें दोषी भी पाया गया.

निकम ने कहा, "टेलीफोन ऑपरेटर सामूहिक बलात्कार मामले में जब इन्हें दोषी क़रार दिया गया तब हमने इन पर और आरोप लगाने की अदालत से दरख़्वास्त की थी. इसके बाद भारतीय दंड विधान की धारा 376 (ई) के तहत तीन नए मामले दर्ज किए गए."

निकम ने बताया कि यह महाराष्ट्र का अपने तरह का पहला ऐसा मामला है जिसमें इतने कम समय में अभियुक्तों को सज़ा मिली है. इन तीन दोषियों को अब आदतन मुजरिम मानते हुए सुनवाई की जाएगी.

इस दौरान बचाव पक्ष के वकीलों ने मुंबई उच्च न्यायालय में अपील की थी लेकिन 27 मार्च को उनकी अर्ज़ी ख़ारिज कर दी गई थी.

निकम ने कहा, "अब जबकि अदालत ने इन्हें आदतन अपराधी मानते हुए धारा 376 (ई) के तहत आरोप लगाए हैं, हम कोशिश करेंगे कि इन्हें फाँसी की सजा मिले, ताकि यह इस तरह के अपराधियों के लिए यह एक मिसाल बन सके."

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