चुनाव के वक़्त 'बाबरी स्टिंग', बिफरी बीजेपी

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कोबरा पोस्ट के स्टिंग 'ऑपरेशन जन्मभूमि' पर भारतीय जनता पार्टी और संघ परिवार से जुड़े नेताओं ने तीखी प्रतिक्रिया जताई है. इन नेताओं ने चुनावों से ठीक पहले इसे जारी किए जाने पर सवाल खड़े करते हुए चुनाव आयोग से इसके प्रचार-प्रसार पर रोक लगाने की मांग की है.

कोबरा पोस्ट के स्टिंग में दावा किया गया है कि बाबरी मस्जिद गिराने की साजिश पहले से रची गई थी. स्टिंग के मुताबिक़ बाबरी मस्जिद को गिराने के लिए लक्ष्मण सेना और कारसेवकों को काफ़ी पहले से तैयार किया जा रहा था. इसके लिए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और शिवसेना की ओर से ट्रेनिंग दी गई थी.

स्टिंग में यह भी दावा किया गया कि इस योजना से बीजेपी और आरएसएस के शीर्ष नेता अच्छी तरह से वाक़िफ़ थे.

इस पर अपनी प्रतिक्रिया में भाजपा नेता मुख्तार अब्बास नक़वी ने कहा, ''यह चुनावों के दौरान सदभावनापूर्ण और शांतिपूर्ण माहौल में ज़हर घोलने की साजिश है.''

रोक लगाने की मांग

उन्होंने कहा, ''कोबरापोस्ट के माध्यम से बाबरी मस्जिद रामजन्म भूमि विवाद पर प्रायोजित स्टिंग ऑपरेशन किया गया है. हमने न केवल इस पर चुनाव आयोग में विरोध जताया है बल्कि इसे प्रसारित और प्रचारित करने पर रोक लगाने की मांग की है.''

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स्टिंग का दावा है कि अयोध्या आंदोलन से जुड़े नेताओं साक्षी महाराज, आचार्य धर्मेंद्र, उमा भारती, महंत वेदांती और विनय कटियार बाबरी मस्जिद गिराने की पूर्व नियोजित साजिश में शामिल थे.

ऑपरेशन जन्मभूमि के अनुसार, पूर्व प्रधानमंत्री पी वी नरसिंहराव को भी इसकी जानकारी थी.

कोबरा पोस्ट का कहना है कि इस स्टिंग के लिए उसने संघ परिवार, बीजेपी और शिवसेना के कई बड़े नेताओं से बातचीत की.

स्टिंग में बीजेपी नेता जय भगवान गोयल से भी बात की गई, जो तब शिवसेना से जुड़े थे. उन्होंने इनकार किया कि उन्होंने कभी ये कहा कि पहले से बाबरी ध्वंस की कोई योजना थी.

उन्होंने कहा, ''हमने बार-बार कहा है कि ढांचा हमने गिराया है लेकिन इसके लिए हमने पहले से कोई योजना नहीं बनाई थी. हां, उस दिन अयोध्या पहुंचे सभी कारसेवकों की भावना यही थी कि हमें इसे गिरा देना चाहिए.''

डायनामाइट

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हालांकि उन्होंने स्वीकार किया कि बहुत से कारसेवक छह दिसंबर 1992 को अयोध्या में डायनामाइट से लैस होकर आए थे.

स्टिंग में जयभगवान को दावा करते हुए दिखाया गया है कि बाबरी मस्जिद ढहाने के लिए प्लान बी भी था. लेकिन बाद में वह इससे मुकर गए.

विश्व हिन्दू परिषद के प्रवक्ता प्रकाश शर्मा ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा, ''चुनावों के पहले चरण से ठीक दो दिन पहले ये स्टिंग कांग्रेस का षडयंत्र है. सोनिया गांधी और इमाम बुखारी की मुलाक़ात के तुरंत बाद कांग्रेस के इशारों पर इस स्टिंग को दिखाया जा रहा है.''

उन्होंने कहा, ''उन्हें इस स्टिंग के समय पर सख्त एतराज है.''

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उन्होंने साथ ही सवाल किया, ''आख़िर स्टिंग को तैयार करने वाले कोबरा पोस्ट के लोगों की विश्वसनीयता क्या है.''

वेबसाइट कोबरा पोस्ट का कहना है कि स्टिंग के लिए न केवल उन्होंने बीजेपी, संघ परिवार और शिव सेना से जुड़े शीर्ष नेताओं से बातचीत की गई बल्कि अयोध्या समेत कई जगहों का दौरा भी किया. अयोध्या में तमाम कारसेवक पहले से औजारों से लैस होकर आये थे, ताकि ढांचे को गिराया जा सके.

कोबरापोस्ट का दावा

कोबरा पोस्ट का दावा है कि उत्तर प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री कल्याण सिंह भी अच्छी तरह पूर्व योजना से वाक़िफ़ थे.

बाबरी मस्जिद एक्शन कमेटी के संयोजक ज़फ़रयाब जिलानी कहते हैं, ''स्टिंग में दिखाई गई बातों में नया कुछ नहीं है. हां, ये स्टिंग ये साबित करती है कि हम जो बातें पहले से कह रहे हैं वो सही हैं. ये स्टिंग उन बातों का एक और सबूत है.''

भारतीय जनता पार्टी के गोरखपुर के सांसद योगी आदित्यनाथ ने कहा, ''जो मामला ख़त्म हो चुका है, जिस पर अदालत फ़ैसला दे चुकी है, उस पर अब टिप्पणी का क्या मतलब.''

उन्होंने कहा, ''हिन्दुओं को अपना धर्मस्थल पाने का हक़ है. बाक़ी बातें बेमानी हैं. गड़े मुर्दे उखाड़ने से कोई हल नहीं निकलने वाला और न ही उसका कोई मतलब है.''

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रवक्ता राम माधव ने कहा, ''इस स्टिंग के ज़रिए कांग्रेस गड़े मुर्दे उखाड़ रही है. वह झूठी बातों के ज़रिए मतदाताओं का ध्रुवीकरण करना चाहती है.''

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