बाबरी स्टिंग: 'आडवाणी को नहीं, लेकिन दूसरों को पता था'

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कोबरा पोस्ट के स्टिंग में दावा किया गया है कि बाबरी मस्जिद गिराने की साजिश पहले से रची गई थी. स्टिंग के मुताबिक़ बाबरी मस्जिद को गिराने के लिए लक्ष्मण सेना और कारसेवकों को काफ़ी पहले से तैयार किया जा रहा था. इसके लिए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और शिवसेना की ओर से ट्रेनिंग दी गई थी.

लेकिन हमें उस समय ये लग रहा था कि जो कुछ हो रहा है, वो पूर्व नियोजित नहीं है. साथ ही ये भी समझ आ रहा था कि भीड़ में शामिल कुछ लोगों ने इसकी तैयारी की थी.

पर मैंने कभी ये नहीं सोचा कि भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व ने जान-बूझकर ऐसा किया और इसके लिए कोई योजना तैयार की थी. घटना को दो दशक बीत चुके हैं लेकिन मुझे अभी भी याद है. मैंने देखा था कि मस्जिद के सामने शिवसैनिक और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के लोग थे.

इन लोगों ने भीड़ को क़ाबू में रखने की कोशिश की थी लेकिन दूसरी तरफ़ से भीड़ आगे बढ़ी जिसे देखकर पुलिस भी भाग गई. जब ये लोग मस्जिद को गिराने लगे, ये देखकर और लोग भी आगे बढ़े और उन्होंने तोड़फोड़ की.

कोबरा पोस्ट के स्टिंग में नया क्या

ये तथ्य है कि भीड़ में मौजूद एक समूह मस्जिद को तोड़ने के इरादे ही आगे बढ़ रहा था. ये लोग पूरी तैयारी से आए थे और उनके पास तोड़फोड़ के लिए ज़रूरी सभी सामान मौजूद था.

लेकिन कोबरा पोस्ट का दावा है कि ये लोग अपने आप काम नहीं कर रहे थे और भारतीय जनता पार्टी के नेता उनके इरादों से वाक़िफ़ थे.

मैंने कोबरा पोस्ट के सबूत नहीं देखे हैं लेकिन मुझे लगता है कि पार्टी के एक-दो नेताओं को इस बारे में जानकारी रही होगी.

मुझे नहीं लगता कि लालकृष्ण आडवाणी को इसके बारे में पता था. उन्होंने इस घटना पर अफ़सोस भी जताया था और मुझे नहीं लगता कि वे झूठ बोलते हैं.

स्टिंग अभी क्यों

ये मुद्दा एकदम से लोगों के बीच आ गया है तो अजीब तो लगता ही है.

मन में सवाल उठता ही है कि ये स्टिंग अभी सामने क्यों आया है.

वैसे भी ये चुनाव का समय है और भारतीय जनता पार्टी ने मंदिर निर्माण का मुद्दा चुनाव में नहीं उठाया है.

मौजूदा हालात में कई लोगों को ये लग सकता है कि इससे कांग्रेस को फ़ायदा हो सकता है क्योंकि कांग्रेस को भारतीय जनता पार्टी को आड़े हाथों लेने के लिए मुद्दा मिल गया है.

सोनिया-बुखारी की मुलाक़ात

कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी दिल्ली की जामा मस्जिद के शाही इमाम सैयद अहमद बुखारी से मिलती हैं और बुखारी आम चुनावों में कांग्रेस को समर्थन देने की अपील करते हैं.

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मुझे लगता है कि इससे कांग्रेस को मुश्किल होगी क्योंकि जब कांग्रेस ख़ुद को धर्मनिरपेक्ष मानती है तो वो मुसलमानों से इस तरह वोट कैसे मांग सकती है.

इसका मतलब ये है कि कांग्रेस धार्मिक मुद्दा जनता के सामने रख रही है. इस मुद्दे पर कांग्रेस का अभियान चल रहा है.

सोनिया गांधी, विरोधी पार्टी को बार-बार फ़िरकापरस्त कहकर देश विरोधी बता रही हैं. लेकिन ख़ुद मुसलमानों से इस तरह वोट मांग रही है तो वो कैसे कह सकती है कि कांग्रेस धर्मनिरपेक्ष पार्टी है.

(बीबीसी संवाददाता मोहनलाल शर्मा से बातचीत पर आधारित)

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