कथित माओवादियों ने की दो आदिवासियों की हत्या

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छत्तीसगढ़ के बस्तर में कथित माओवादियों ने दो आदिवासियों की हत्या कर दी है. इसके अलावा बस्तर के ही दोरनापाल इलाक़े में सुरक्षाबलों के साथ मुठभेड़ में एक नक्सली के मारे जाने की ख़बर है.

पुलिस ने बस्तर में कुछ जगहों से भारी मात्रा में विस्फोटक बरामद करने का भी दावा किया है.

माना जा रहा है कि लोकसभा चुनाव के दौरान मतदान को प्रभावित करने के लिये माओवादी और अधिक सक्रिय हुए हैं. बस्तर में लोकसभा चुनाव के लिए इसी महीने की 10 तारीख़ को मतदान होना है.

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पुलिस प्रवक्ता दीपांशु काबरा ने बताया, “शुक्रवार को आंध्र प्रदेश की सीमा से लगे किस्टारम में कारीगुंडा के पास माओवादियों और सुरक्षाबलों के बीच मुठभेड़ हुई. जिसमें एक माओवादी का शव बरामद किया गया है.”

पुलिस ने मुठभेड़ वाली जगह से अलग-अलग तरह के ट्रैप और हथियार बरामद किये हैं.

पुलिस के लिए काम करने का आरोप

इधर बीजापुर के भद्रकाली इलाक़े के चंदुर दुघेड़ा गांव में कथित माओवादियों द्वारा दो आदिवासियों की हत्या का मामला भी सामने आया है. पुलिस के मुताबिक़ माओवादियों ने दोनों ग्रामीणों पर पुलिस के लिये काम करने का आरोप लगाते हुए जन अदालत लगाकर उनकी हत्या कर दी.

फिलहाल पुलिस बल को इलाक़े में भेजा गया है और विस्तृत विवरण की प्रतीक्षा की जा रही है.

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ग़ौरतलब है कि शुक्रवार की दोपहर भी सुकमा ज़िले के जगरगुंडा को जाने वाली सड़क से लगे हुए बुरकापाल में सुरक्षाबल के कैंप पर माओवादियों ने हमला किया था.

सीआरपीएफ के इस कैंप पर सैकड़ों की संख्या में माओवादियों ने हमला बोला, जिसके बाद पुलिस ने भी जवाब में फ़ायरिंग की. लगभग घंटे भर तक चली इस मुठभेड़ में सीआरपीएफ की 74वीं बटालियन का एक जवान मारा गया था.

राज्य के पुलिस महानिदेशक ए एन उपाध्याय कहते हैं, “चुनाव के दौरान माओवादी अपनी सक्रियता दिखाने की कोशिश कर रहे हैं और सुरक्षाबल का दबाव भी बढ़ा है. यही कारण है कि पिछले कुछ सप्ताह से माओवादियों की हिंसक गतिविधियों में बढ़ोत्तरी हुई है.”

बहिष्कार

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राज्य में हमेशा की तरह माओवादियों ने चुनाव बहिष्कार कर रखा है. चार महीने पहले हुए मतदान के दौरान माओवादियों ने ग्रामीणों से कोई भी पसंद नहीं यानी 'नोटा' पर बटन दबाने का फ़रमान ज़ारी किया था.

लेकिन इस बार माओवादियों ने पिछले साल हुए विधानसभा चुनाव के दौरान 'नोटा' में वोट देने से कोई लाभ नहीं होने का उल्लेख करते हुए अपने बयान में कहा है कि "सही लोकतंत्र के लिए और जनाधिकार के लिए चुनाव के बजाए जनहित पर आगे बढ़ना होगा."

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इस बयान में चुनाव के दौरान सुरक्षाबलों के ख़िलाफ़ हिंसक कार्रवाईयों की चेतावनी देते हुए अपनी पूरी तैयारी की बात भी कही गई है.

माओवादियों की ताज़ा हिंसा को इसी बयान के परिप्रेक्ष्य में देखा जा रहा है.

इस बीच बस्तर पहुंचे सामाजिक कार्यकर्ता स्वामी अग्निवेश ने माओवादियों से अपील की है कि माओवादी चुनाव को शांतिपूर्ण ढंग से होने दें. अग्निवेश ने सरकार से भी अपील है कि सरकार बस्तर के अंदरूनी क्षेत्र में सुरक्षाबलों की कॉम्बिंग गश्त न करवाए.

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