भाजपा ने बदला श्रीनगर से प्रत्याशी

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गुरुवार को एक नाटकीय घटनाक्रम में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने श्रीनगर से अपने प्रत्याशी आरिफ़ रज़ा को पर्चा दाख़िल किए जाने के महज़ कुछ घंटों पहले बदल दिया. उनकी जगह पर पार्टी ने बड़गाम के एक कार्यकर्ता फैयाज़ अहमद को चुनाव मैदान में उतारा है.

हालांकि आरिफ़ ने आरोप लगाया कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 370 पर उनके रवैये के कारण नामांकन पत्र भरने से उनको रोक दिया गया.

संविधान का यह अनुच्छेद जम्मू और कश्मीर को विशेष राज्य का दर्ज़ा देता है और भारतीय नागरिकों को राज्य में संपत्ति ख़रीदने पर रोक लगाता है.

सोमवार को जारी किए गए घोषणापत्र में भाजपा ने कहा था कि अगर वह सत्ता में आती है तो अनुच्छेद 370 को समाप्त करेगी.

हालांकि भाजपा के कश्मीरी मामलों के राज्य उपाध्यक्ष रमेश अरोरा इस मुद्दे को कम महत्व देते हुए कहते हैं कि पार्टी नेतृत्व ने कुछ 'अनुशासनात्मक' मसलों के कारण प्रत्याशी बदलने का फ़ैसला किया.

वह कहते हैं, "आरिफ़ रजा के माध्यम से पार्टी ने संदेश दिया है कि वह पार्टी के भीतर अनुशासनहीनता नहीं चाहती."

'एनडीए, यूपीए से बेहतर था.'

बुधवार को अपना नामांकन पत्र दाख़िल करने वाले फ़ैयाज़ अहमद भट ने कहा कि उन्होंने भाजपा के शीर्ष नेतृत्व से इस बदलाव के लिए संपर्क नहीं किया था.

उन्होंने संवाददाताओं से बात करते हुए कहा, "मैं भाजपा का संस्थापक सदस्य हूँ और भाजपा के टिकट पर 1999 से चुनाव लड़ता रहा हूँ. मुझे श्रीनगर से प्रत्याशी बनाने का फ़ैसला शीर्ष नेतृत्व ने लिया."

असंतुष्ट भाजपा नेता आरिफ़ रजा का दावा है कि भाजपा के अनुच्छेद 370 पर ताज़ा रवैये के कारण चुनावी मैदान से पीछे हटने का फ़ैसला किया.

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भारतीय जनता पार्टी की तरफ़ से अचानक लिए गए फ़ैसले के बाद उन्होंने संवाददाताओं को बताया, "मैं श्रीनगर से हूँ और मैं भाजपा समेत किसी भी पार्टी को कश्मीरी लोगों की भावनाओं के साथ नहीं खेलने दूंगा."

इस दौरान भाजपा के अनुच्छेद 370 को समाप्त करने की घोषणा पर कश्मीर के राजनैतिक दलों सत्ताधारी नेशनल कांफ़्रेंस और विपक्षी पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी की तरफ़ से कड़ी प्रतिक्रिया हो रही है.

यह देखना काफ़ी रोचक है कि कुछ अलगाववादी अटल बिहारी बाजपेयी के कार्यकाल की तारीफ करते हुए कहते हैं, "एनडीए, यूपीए से बेहतर था."

बहुत सारे लोगों का मानना है कि अलगाववादी नई दिल्ली में बदलाव की राह देख रहे हैं और भाजपा की सरकार को उदासीन रहने वाले कांग्रेस नेतृत्व की तुलना में बेहतर समझते हैं.

अपना नाम न प्रकाशित करने की शर्त पर एक विश्लेषक कहते हैं, "अनुच्छेद 370 के मसले पर अचानक प्रत्याशी बदलने के कारण भाजपा को पसंद करने वाले अलगाववादी निरुत्साहित होंगे."

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