मतदान के दौरान सीआरपीएफ़ ने किया परेशानः सोनी सोरी

छत्तीसगढ़ के बस्तर में लोकसभा मतदान, इमेज कॉपीरइट BBC Alok Putul

बस्तर में आम आदमी पार्टी की उम्मीदवार सोनी सोरी ने मतदान के दौरान सुरक्षा बलों पर उनके परिजनों को प्रताड़ित करने का आरोप लगाया है. पुलिस और सीआरपीएफ़ के अधिकारियों ने इस मामले पर अनभिज्ञता जताई है और कोई प्रतिक्रिया देने से मना कर दिया है.

गुरुवार को मतदान के बाद सोनी सोरी ने बीबीसी से कहा कि मतदान के दिन उनके भाई को सीआरपीएफ के लोगों ने पीटा और उनके भतीजे लिंगाराम कोड़ोपी को चार घंटे तक बिना वजह कैंप में रोक कर रखा गया.

वहीं नारायणपुर के नेड़नार में दो आईईडी ब्लॉस्ट हुए. यह विस्फोट मतदान केंद्र से लगभग दो किलोमीटर दूर हुए. इसमें किसी के हताहत होने की कोई ख़बर नहीं है.

जारी है तीसरे चरण का मतदान

साथ ही अरणपुर में एक मतदान केंद्र पर माओवादियों ने हमला किया और गोलीबारी की. जवाब में सुरक्षाबल के जवानों ने भी गोलियां चलाईं. मुठभेड़ की इस घटना के कारण लगभग दो घंटे तक इस केंद्र पर मतदान प्रभावित रहा.

जगदलपुर के कनकापाल में भी माओवादियों ने गोलीबारी की. दंतेवाड़ा के समेली तथा कोंटा के कोर्रा में नक्सलियों ने मतदान केंद्र में लोगों को निशाना बनाया और फायरिंग की.

यहां भी कई घंटों तक मतदान रुका रहा. यहां माओवादियों के भय से एक अधिकारी के बीमार होने की भी ख़बर है.

खुले में वोट

दोरनापाल के देवरपल्ली में सुरक्षा कारणों से खुले खेत में ही एक पेड़ के नीचे मतदान केंद्र बना दिया गया. जहां गांव के मतदाता मतदान के लिए पहुंचे.

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यहां भी संदिग्ध माओवादियों ने फायरिंग की. लेकिन सुरक्षा बलों की जवाबी कार्रवाई के बाद माओवादी वहां से भाग गए.

इधर पोलमपल्ली में मतदान मशीन खराब होने के कारण मतदान नहीं हो सका. चुनाव आयोग ने इस केंद्र पर फिर से मतदान की घोषणा की है.

कपास जिससे ज़ख़्म ढकने वाले फाहे नहीं बनते

नक्सल प्रभावित बस्तर के एक प्राइमरी स्कूल में अध्यापिका सोनी सोरी को पांच अक्तूबर 2011 को क्राइम ब्रांच और छत्तीसगढ़ पुलिस के संयुक्त अभियान में दिल्ली से गिरफ़्तार किया गया था.

उनके भतीजे लिंगाराम को भी पुलिस ने नक्सलियों की मदद के आरोप में दंतेवाड़ा में गिरफ्तार किया था.

सोनी सोरी के ख़िलाफ़ राज्य सरकार ने नक्सल गतिविधियों में शामिल होने के आरोप लगाए थे और उनके ख़िलाफ़ कई मुक़दमे दर्ज किए गए थे. अभी वे जमानत पर हैं. दूसरी ओर माओवादी अपने बयानों में सोनी सोरी को सरकार समर्थक बताते हैं.

लोकसभा चुनाव में उम्मीदवार

इस बार उन्हें आम आदमी पार्टी ने बस्तर लोकसभा से चुनाव मैदान में उतारा है. उनके सामने चुनाव मैदान में माओवादियों के ख़िलाफ़ सलवा जुडूम चलाने वाले महेंद्र कर्मा के बेटे दीपक कर्मा कांग्रेस पार्टी के उम्मीदवार हैं.

महेंद्र कर्मा की पिछले साल मई में माओवादियों ने हत्या कर दी थी.

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भारतीय जनता पार्टी ने सांसद दिनेश कश्यप को फिर से अपना उम्मीदवार बनाया है. दिनेश कश्यप के भाई की 2009 में माओवादियों ने हत्या कर दी थी.

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सोनी सोरी ने कहा है कि सुरक्षाबलों ने उन्हें भी बस्तर की हिंसक गतिविधियों के लिए ज़िम्मेदार ठहराते हुए बहस की और उन्हें नक्सली बताया.

सोनी सोरी के अनुसार वह जब अपने गांव पालनार से मतदान केंद्र पर पहुंची, उससे पहले ही माओवादियों ने मतदान केंद्र के आसपास फायरिंग करके दहशत फैलाने की कोशिश की.

सोनी सोरी ने कहा, "मैं जब मतदान के लिए पहुंची तो वहां भी सीआरपीएफ के लोगों ने मुझे नक्सली कह कर आरोप लगाया कि मेरे कारण ही नक्सली घटनाएं हो रही हैं."

दूर स्थित मतदान केंद्र

सोनी सोरी ने कहा कि मैंने पुलिस के लोगों को समझाने की कोशिश की, लेकिन वे मुझे नक्सली बताते रहे. उन्होंने कहा कि पुलिस के लोग मेरे ख़िलाफ़ देर तक अनर्गल बातें करते रहे.

सोनी सोरी ने आरोप लगाया कि एक तरफ माओवादियों ने चुनाव बहिष्कार की घोषणा की है, वहीं सरकार ने मतदान केंद्र ऐसी जगहों में बनाए, जहां मतदाता पहुंच ही नहीं सकते.

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सोरी ने कहा, "सरकार नहीं चाहती कि लोग मतदान करें. वरना ऐसी जगहों पर मतदान केंद्र क्यों बनाये जाते, जहां से मतदाता को आने-जाने में 60 किलोमीटर तक का सफ़र तय करना पड़े."

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इधर सोनी सोरी के भतीजे लिंगाराम कोड़ोपी ने बीबीसी से हुई बातचीत में आरोप लगाया कि बेड़मा गांव में जब वे एक अंतरराष्ट्रीय टीवी चैनल के लिए अनुमति ले कर मतदान की शूटिंग कर रहे थे, उन्हें सीआरपीएफ के लोगों ने धमकाया और बाल खींचे.

लिंगाराम ने कहा, "उन्होंने मुझे फिर से गिरफ़्तार करने की धमकी दी और कहा कि मैं ऐसे लोगों के साथ काम कर रहा हूं, जो अंतर्राष्ट्रीय आतंकवादी गतिविधियों को समर्थन देते हैं."

पूरे घटनाक्रम को लेकर सीआरपीएफ और छत्तीसगढ़ पुलिस के अधिकारियों ने अनभिज्ञता जताई और इस पर कोई भी टिप्पणी करने से इनकार कर दिया.

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