वो बुजुर्ग जो नेहरू के ज़माने से वोट डाल रहे हैं

श्याम शरण नेगी

श्याम शरण नेगी भारत के पहाड़ी राज्य हिमाचल प्रदेश के उत्तरी इलाके में रहते हैं.

अब वो एक सेवानिवृत्त शिक्षक हैं और उनकी उम्र 97 साल हो चली है. लेकिन इसमें खास बात क्या है? वो कहते हैं कि भारत में हर पाँच बरस में होने वाले लोकतंत्र के महापर्व यानी संसदीय चुनावों में 16वीं बार मतदान करने के लिए तैयार हो रहे हैं.

भारत की संसद ने अब तक 15 लोकसभाएँ देखीं है और इस बार देश में 16वीं लोकसभा के लिए मतदान जारी है.

(कपास जिससे ज़ख़्म ढकने वाले फाहे नहीं बनते)

श्याम शरण नेगी ने 1951-52 के पहले लोकसभा चुनाव से लेकर अब तक के हर चुनाव में मतदान किया है. ब्रितानी हुकूमत से आजादी मिलने के बाद उसी बरस भारत में पहली बार आम चुनाव हुए थे.

16वीं लोकसभा के लिए नौ चरणों में होने वाले आम चुनावों में पहला मतदान सात अप्रैल को शुरू हुआ और ये पाँच हफ्तों तक चलेगा. 16 मई को नतीजे आने हैं.

महँगाई और भ्रष्टाचार के मुद्दे पर प्रमुखता से लड़े जा रहे इस चुनाव में 81 करोड़ से ज्यादा मतदाता वोट देने की हैसियत रखते हैं.

देश का पहला वोटर?

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श्याम शरण नेगी हिमाचल प्रदेश के किन्नौर जिले के कल्पा गाँव में रहते हैं और उनके यहाँ मतदान की तारीख सात मई को है. इसी रोज हिमाचल प्रदेश की सभी पाँच सीटों पर मतदान होने हैं. भारत के निर्वाचन आयोग ने उन्हें देश के दूसरे मतदाताओं के सामने उदाहरण की तरह पेश किया है.

(किसका देश, किसका लोकतंत्र?)

'गूगल इंडिया' ने श्याम शरण नेगी पर एक वीडियो संदेश (#PledgeToVotetells) जारी किया है जो 'ट्रू स्टोरी ऑफ़ अ मैन हू नेवर मिस्ड एन ऑपोर्च्युनिटी टू वोट' या 'एक आदमी की सच्ची कहानी जिसने कभी वोट देने का मौका नहीं गंवाया' के बारे में बात करती है.

मार्च की 24 तारीख को ये वीडियो जारी किया गया था और इसे अब तक दुनिया भर में करीब 20 लाख बार देखा जा चुका है. इस शॉर्ट फ़िल्म या छोटे अवधि वाले वीडियो की शुरुआत में दिखाया गया है कि श्याम शरण नेगी अपने घर में चाय की चुस्कियाँ ले रहे हैं. वे घर के बाहर बर्फ़ से ढकी चमकती हुई चोटियों की ओर देख रहे हैं.

पहला मतदान

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बर्फ़ बिछी सड़क पर सीधे और नपे तुले कदमों से सेव और चीड़ के बगीचों से होकर गुजरते हुए वे मतदान केंद्र की ओर बढ़ रहे हैं. मतदान से पहले उनके साथी लोग उनका जोर-शोर से स्वागत करते हैं. इस शॉर्ट फ़िल्म में श्याम शरण नेगी को भारत का पहला मतदाता भी कहा गया है.

(चाहती हूँ वोट डालना भी...)

वीडियो के मुताबिक स्वतंत्र भारत में पहला मतदान केंद्र कल्पा में बनाया गया था. उस वक्त शेष भारत में चुनाव 1952 के फरवरी महीने में हुए थे लेकिन कल्पा में महीनों पहले पोलिंग स्टेशन बना लिया गया था.

श्याम शरण नेगी बताते हैं, "इससे पहले कि भीषण जाड़े की वजह से सड़कें जाम हो जाती, हमने शेष भारत से महीनों पहले साल 1951 के अक्टूबर महीने की 25 तारीख को अपना वोट डाल लिया था."

वे कहते हैं, "उसके बाद से मैंने हर आम चुनाव और सभी राज्य विधानसभा चुनावों में वोट डाला है. सात मई को मैं लोकसभा चुनावों के लिए 16वीं बार वोट देकर रिकॉर्ड बनाउंगा."

नोटा

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Image caption पिछले विधानसभा चुनाव के दौरान नोटा की शुरुआत की गई थी.

वीडियो में उन्हें कहते हुए बताया गया है, "बीते सालों में मुझे आज भी वो दिन अच्छे से याद है. खूब बर्फ़ पड़ रही थी और हम पहली बार वोट देने के लिए टहलते हुए जा रहे थे." श्याम शरण नेगी ये बताने से इनकार कर देते हैं कि वे किस पार्टी का समर्थन करते हैं.

(हज़ारों ने 'नोटा' का बटन क्यों दबाया?)

वे कहते हैं, "मैं उस पार्टी का समर्थन करूंगा जो देश में बदलाव लाने के लिए गंभीरता से कोशिश करेगा और अच्छी सरकार देगा." वे 'नोटा' (इनमें से कोई नहीं) को लेकर कोई बहुत ज्यादा उत्साहित नहीं हैं. भारत के निर्वाचन आयोग ने पहली बार आम चुनावों में नोटा का विकल्प दिया है.

नोटा पर बटन दबाने का मतलब सभी उम्मीदवारों को खारिज करना होता है. उन्होंने बीबीसी को अपने गाँव से फोन पर बताया, "मैं नोटा के समर्थन में नहीं हूँ. यकीनन हालात इस हद तक खराब नहीं हुए हैं कि चुनाव में खड़े उम्मीदवारों में से किसी को वोट ही न दें."

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