बीबीसी कैंपस हैंगआउट: एक क़ानून से क्या ख़त्म होगा भ्रष्टाचार?

नेशनल लॉ कॉलेज ऑफ़ इंडिया युनिवर्सिटी, बंगलौर

देश की राजधानी में जंतर-मंतर पर गांधी टोपी पहने एक बूढ़ा व्यक्ति भूख हड़ताल पर बैठा था और उसके इर्द-गिर्द लोग पूरी ताक़त से तिरंगा लहरा रहे थे. याद है आपको वो माहौल.

उसी बूढ़े अन्ना हज़ारे को जब केंद्र सरकार ने गिरफ़्तार करके तिहाड़ जेल भेज दिया तो जेल के बाहर ही एक जन सैलाब सा उमड़ आया. फिर दिल्ली के रामलीला मैदान में अन्ना हज़ारे ने जब आंदोलन किया तो केंद्र सरकार की नींद तक उड़ गई थी.

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दिल्ली की सड़कों पर लोग तिरंगे लिए भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाते घूम रहे थे. मगर उस आवाज़ की गूँज पूरे देश में सुनाई दे रही थी. ऐसा लगा था कि देश को अचानक किसी ने सोते से झिंझोड़ कर उठा दिया है.

जनलोकपाल और लोकपाल, भ्रष्टाचार निवारण की एक कुँजी के तौर पर दिख रहे थे. उन रास्तों से होते हुए अब बना भ्रष्टाचार निरोधक क़ानून क्या हर मर्ज़ की दवा है?

इन चुनाव में भ्रष्टाचार आख़िर कितना बड़ा मुद्दा है? जनआंदोलन में आगे बढ़-चढ़कर हिस्सा लेता दिखा युवा क्या भ्रष्टाचार को लेकर इतना गंभीर है कि उसके वोट का फ़ैसला भी ये मुद्दा करे?

कैंपस हैंगआउट

इन्हीं सवालों के साथ बीबीसी हिंदी का कैंपस हैंगआउट दूसरे चरण में बंगलौर की नेशनल लॉ स्कूल ऑफ़ इंडिया यूनिवर्सिटी यानी भारतीय राष्ट्रीय विधि स्कूल विश्वविद्यालय में है.

कोशिश एक बार फिर उस युवा से जुड़ने की जिसकी चर्चा इस चुनाव में लगातार हो रही है.

गुरुवार को हुए मतदान में युवाओं ने जिस जोश के साथ हिस्सा लिया है उससे ये बात साबित भी होती दिख रही है कि युवा मतदाता इस बार चुनाव में निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं.

तो क्या युवा वर्ग अपनी अलग सोच के साथ मतदान करेगा? क्या वे मतदान करते समय भ्रष्टाचार के मुद्दे पर भी ध्यान देंगे या फिर जाति, संप्रदाय और क्षेत्रीयता का मुद्दा उनके दिमाग़ पर हावी रहेगा.

Image caption भारत के आम चुनाव 2014 के बारे में युवाओं की नब्ज़ टटोलने के लिए बीबीसी हिंदी देश के विभिन्न शिक्षा संस्थानों में कैंपस हैंगआउट कर रहा है.

आप भी हों शामिल

देश की प्रतिष्ठित नेशनल लॉ स्कूल ऑफ़ इंडिया यूनिवर्सिटी के छात्र-छात्राएँ इस बारे में अपनी बात रखने वाले हैं. साथ ही इस बारे में उनके साथ चर्चा में शामिल होंगी भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन में अन्ना हज़ारे की सहयोगी रहीं किरण बेदी.

ये कार्यक्रम बीबीसी हिंदी के यूट्यूब चैनल और गूगल प्लस पेज पर सुबह 11 बजे से लाइव प्रसारित होगा.

इतना ही नहीं बीबीसी हिंदी के फ़ेसबुक पन्ने पर हम आपको कार्यक्रम के दौरान लगातार बताते रहेंगे कि बहस किस दिशा में बढ़ रही है और आप उससे कैसे जुड़ सकते हैं.

आप ट्विटर पर हैशटैग के ज़रिए इस बहस में शामिल हो सकते हैं. #Eletion2014 या #CampusHangout के साथ आप @BBCHindi को ट्वीट करिए.

फ़ेसबुक में और ट्विटर पर आई टिप्पणियाँ कार्यक्रम में शामिल की जाएँगी. तो फिर देर किस बात की जुड़िए बीबीसी हिंदी के साथ सोशल मीडिया मंचों पर और रखिए अपनी बात- बीबीसी कैंपस हैंगआउट में.

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