आज़म खान के खिलाफ़ एफआईआर दर्ज

  • 12 अप्रैल 2014
अमित शाह और आजम खान इमेज कॉपीरइट AFP

निर्वाचन आयोग द्वारा प्रतिबंध लगाए जाने के बाद अमित शाह और आज़म खान दोनों ही अपने वक्तव्यों को सही ठहरा रहे हैं.

शाह ने शुक्रवार को पत्रकारों को बताया कि वो चुनाव आयोग से अपने आदेश पर पुनर्विचार करने के लिए कहेंगे.

अमित शाह ने कहा, "निर्वाचन आयोग ने मुझसे आज शाम (12 अप्रैल) तक जवाब माँगा है. जवाब में हम अपना स्पष्टीकरण देंगे और साथ ही आग्रह करेंगे कि वह उनके चुनाव प्रचार पर प्रतिबंध लगाए जाने वाले आदेश पर दोबारा विचार करे."

वहीं रामपुर में आज़म खान ने कहा कि उन्होंने सांप्रदायिक सौहार्द को भंग करने वाली कोई भी बात नहीं कही है. उनके अनुसार चुनाव आयोग ने उनके ऊपर प्रतिबंध सिर्फ शाह के विरुद्ध लिए गए निर्णय को संतुलित करने के लिए लगाया.

आज़म खान के खिलाफ़ एफ़आईआर दर्ज करा दी गयी है.

चुनाव आयोग ने शुक्रवार को भाजपा नेता अमित शाह और उत्तर प्रदेश सरकार के वरिष्ठ मंत्री आज़म ख़ान पर उत्तर प्रदेश में चुनाव सभा करने पर प्रतिबंध लगा दिया था.

चुनाव आयोग ने यह फैसला शुक्रवार 11 अप्रैल को दोनों नेताओं के कथित संप्रदाय को भड़काने वाले भाषणों का संज्ञान लेकर लिया था.

चुनाव आयोग ने उनके ख़िलाफ़ तुरंत आपराधिक कार्रवाई शुरू करने के आदेश भी दिए थे.

समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता राजेन्द्र चौधरी आज़म ख़ान को भड़काऊ भाषण का दोषी मानने को तैयार नहीं हैं. वह कहते हैं, "आज़म ख़ान की तुलना नहीं करनी चाहिए. आज़म साहब धर्मनिरपेक्ष हैं और अमित शाह सांप्रदायिक हैं."

इसके विपरीत भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता विजय बहादुर पाठक कहते हैं कि अमित शाह ने अपने भाषण में ऐसा कुछ नहीं कहा जिसके लिए उनके ख़िलाफ़ कोई कार्रवाई की जाए जबकि आज़म ख़ान ने तो शहीदों का अपमान किया है.

'उत्तेजक भाषण'

उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव को लिखे एक पत्र में चुनाव आयोग ने कहा था, "उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्री आज़म खान और भाजपा के नेता अमित शाह अपने चुनावी अभियान के दौरान अत्यंत उत्तेजक भाषण दे रहे हैं. आयोग ने इस मसले को गंभीर और चिंताजनक पाया है. उनके ऐसे वक्तव्य आपसी रंजिश, नफ़रत और विभिन्न धार्मिक संप्रदायों में असामंजस्य पैदा कर रहे हैं."

आयोग ने आज़म खान के बारे में प्रदेश सरकार के ढुलमुल रवैये की भी आलोचना की है. आयोग ने अपने पत्र में लिखा कि आयोग ने अमित शाह को सात अप्रैल और आज़म ख़ान को नौ अप्रैल को नोटिस जारी किया था. इन नोटिसों के बावजूद आज़म ख़ान आचार संहिता का उल्लंघन करते हुए आपत्तिजनक और उत्तेजक बयान दे रहे हैं.

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चुनाव आयोग ने कहा, "आयोग ने पाया कि प्रदेश प्रशासन ने पूरी तत्परता से इन दोनों नेताओं के विरुद्ध जहां ज़रूरी था एफआईआर दर्ज़ नहीं किया. विशेषकर ऐसा लगता है कि आज़म ख़ान के ख़िलाफ़ अभी तक कोई भी एफआईआर नहीं लिखवाई गई है. आयोग का मत है कि प्रदेश सरकार उनके विरुद्ध कोई भी कार्रवाई करने में ढिलाई बरत रही है."

इन बातों को ध्यान में रखते हुए आयोग ने मुख्य सचिव को कुछ आदेश दिया है मसलन दोनों नेताओं के ख़िलाफ़ तुरंत एफआईआर दर्ज़ करा कर कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी जाए.

प्रचार से दूरी

आयोग ने यह भी कहा है कि उन सभी जनसभाओं, रैलियों, जुलूस और रोड शो जिसमें ये दोनों नेता भाग ले रहे हों उनको प्रशासनिक अनुमति नहीं दी जाए.

यह ताकीद भी दी गई कि इनकी ऐसी सभी गतिविधियों को जिनसे शांति-व्यवस्था भंग हो सकती है, उन्हें रोकने के लिए सीआरपीसी की विभिन्न धाराओं के तहत कार्रवाई सुनिश्चित की जानी चाहिए.

अमित शाह ने अपने मुज़फ्फरनगर के भाषण में इस चुनाव को अपमान के बदले का चुनाव कहा था और आज़म ख़ान ने नरेंद्र मोदी को कुत्ते के बच्चे का बड़ा भाई कहा था.

राज्य सरकार ने अमित शाह के विरुद्ध भारतीय दंड संहिता की धारा 153ए (धर्म के आधार पर विभिन्न समुदायों में दुश्मनी को बढ़ावा देना) और पीपुल रिप्रजेंटेशन एक्ट की धारा 125 (चुनाव के संदर्भ में विभिन्न वर्गों में दुश्मनी फैलाना) के तहत दो एफआईआर दर्ज कराई थी.

चुनाव आयोग के नोटिस को ध्यान में रखते हुए शाह ने गुरुवार दस अप्रैल को इलाहाबाद उच्च न्यायालय में दोनों एफआईआर के विरुद्ध दायर अपनी याचिका को वापस ले लिया था.

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