मतभेदों के बावजूद तेलुगूदेशम-भाजपा गठबंधन बना रहेगा!

  • 17 अप्रैल 2014
चंद्रबाबू नायडू

तेलगुदेशम पार्टी के साथ हुआ भाजपा गठबंधन भले ही कमज़ोर पड़ता दिखाई दे रहा है, लेकिन इस बात पर सभी सहमत होंगे कि दोनों पार्टियों के बीच का रिश्ता अटूट है. ऐसा इसलिए क्योंकि सीमांध्र में ताक़तवर जगनमोहन रेड्डी के नेतृत्व वाले वाईएसआर कांग्रेस से मुक़ाबला करने के लिए दोनों पार्टियों को एक दूसरे की सख़्त ज़रूरत है.

ऐसा माना जा रहा है कि आंध्र प्रदेश में उम्मीदवारों के चयन से जुड़ा तेदेपा और भाजपा के बीच मौजूदा मतभेद एक दिखावा हो सकता है.

'द हिंदू' के स्थानीय संपादक और जाने माने राजनीतिक विश्लेषक श्रीनिवास रेड्डी ने बीबीसी को बताया, ''भाजपा ने आगामी चुनाव के लिए जिन उम्मीदवारों का चुनाव किया है, उस पर तेदेपा अपनी नाराज़गी ज़ाहिर कर चुकी है. लेकिन तेदेपा दिखावा कर रही है. ये बात हर कोई जानता है कि तेदेपा को भाजपा की ज़रूरत है और भाजपा को तेदेपा की. भाजपा तेदेपा के साथ के बिना सीमांध्र में अपने पांव नहीं जमा सकती.’’

आंध्र प्रदेश में होने वाले चुनाव के लिए नामांकन दाख़िल करने में केवल दो दिन शेष हैं, और लोकसभा चुनाव के लिए उम्मीदवारों की भाजपा सूची को लेकर दोनों पार्टियां के बीच तकरार पैदा हो गया है.

गठबंधन के तहत भाजपा पांच सीटों और तेदेपा बची हुई 20 सीटों पर चुनाव लड़ने वाली है. मौजूदा मतभेद लोकसभा चुनाव के लिए उम्मीदवारों के चयन से जुड़ा हुआ है.

कमज़ोर उम्मीदवार

आंध्र प्रदेश के विभाजन के बाद बने सीमांध्र और तेलंगाना को नए राज्य का दर्जा दो जून के बाद मिलेगा. साथ ही साथ दोनों राज्यों के विधान सभा के लिए भी चुनाव होने वाला है. नए राज्यों के एक बार अस्तित्व में आ जाने के बाद, अलग विधान सभा भी अस्तित्व में आ जाएंगी. सीमांध्र के विधान सभा में 175 सदस्य होंगे जबकि तेलंगाना की विधान सभा में 117 सदस्य होंगे.

भाजपा ने स्व.एनटी रामाराव की बेटी और पूर्व कांग्रेस मंत्री पूरनदेश्वरी को विशाखापत्तनम लोकसभा सीट से हटा कर कुदाप ज़िले के उस रजमपत से खड़ा किया है जो वाईएसआर कांग्रेस नेता जगन मोहन रेड्डी की पकड़ मज़बूत है.

पूरनदेश्वरी की जगह भाजपा ने के हरिबाबू को खड़ा किया है. वे भाजपा के सीमांध्र इकाई के अध्यक्ष हैं, और जिनके बारे में तेदेपा का मानना है कि वे एक कमज़ोर उम्मीदवार हैं.

हैदराबाद में मेट्रो इंडिया के कार्यकारी संपादक और राजनीतिक विश्लेषक श्रीनिवास राव का कहना है, ''तेदेपा की चिंता ये है कि यदि लोकसभा के लिए कमज़ोर उम्मीदवार खड़े किए जाएं तो विधान सभा का चुनाव लड़ रहे इसके प्रत्याशियों पर प्रभाव पड़ेगा. अगर दबाव बढा तो अंतिम समय में उम्मीदवारों को बदला जा सकता है.’’

पांव पर कुल्हाड़ी

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रेड्डी आगे कहते हैं, ''जमीनी सच्चाई तो ये है कि दोनों पार्टियों को एक दूसरे का स्वागत करते हुए, एक साथ काम करना चाहिए. लेकिन उनके संबंधों में कहीं कुछ कमी है जिसके कारण नामांकन दाख़िल करने की अंतिम तिथि के ठीक दो दिन पहले इस तरह का मतभेद सामने आ रहे हैं. लेकिन ये बात भी सही है कि तेदेपा के नेता चंद्रबाबू नायडू एक मज़बूत सौदागर हैं.’’

जबकि राव का कहना है, ''जिन सीटों पर भाजपा-तेदेपा गठबंधन जीत सकता था, भाजपा ने उन सीटों पर कमज़ोर उम्मीदवार खड़ा कर सचमुच अपने पांव पर कुल्हाड़ी मार ली है. उदाहरण के लिए, गोदावरी ज़िले के नरसापुर निर्वाचन क्षेत्र से भाजपा ने कृष्णम् राजू को खड़ा नहीं किया. कृष्णम् राजू यूपीए सरकार में मंत्री रहने के बाद दल बदल कर कांग्रेस से भाजपा में चले आए. मगर आश्चर्य है कि भाजपा ने उन्हें टिकट नहीं दिया.’’

राव रेड्डी के इस बात से सहमत हैं कि इन सारे मतभेदों के बावजूद 'गठबंधन बना रहेगा'.

इस बीच, वरिष्ठ भाजपा नेता वेंकैया नायडू ने संवाददाताओं को बंगलौर में बताया, ''गठबंधन दोनों के लिए मददगार है, और सीमांध्र और तेलंगाना दोनों राज्यों में इसे स्वीकार किया गया है. दोनों इलाक़ों में मोदी लहर मौजूद है. मैं केवल यह चाहता हूं कि भाजपा और तेदेपा दोनों सौहार्दपूर्ण ढंग से सीटों का समायोजन करे. मैं इसके आगे कोई प्रतिक्रिया नहीं दूंगा.’’

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