मोदी ने वाराणसी से नामांकन दाखिल किया

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भारतीय जनता पार्टी के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को लोकसभा चुनाव के लिए वाराणसी से अपना नामांकन पत्र दाखिल किया.

वाराणसी में मोदी ने समाचार एजेंसी एएनआई से कहा, "पहले मुझे लगता था कि भारतीय जनता पार्टी ने मुझे यहाँ भेजा है, फिर लगा कि मैं शायद काशी जा रहा हूँ. लेकिन मुझे आज लग रहा है कि मुझे न किसी ने यहाँ भेजा है और न मैं आया हूँ. मुझे तो माँ गंगा ने बुलाया है."

उन्होंने आगे कहा, "एक बालक जिस तरह अपनी माँ की गोद में वापस आता है, उसी तरह की अनुभूति मैं कर रहा हूँ. काशी की इस गंगा-जमुनी तहजीब के लिए परमात्मा मुझे शक्ति दे. मैं इस नगर की सेवा करूं. ग़रीब बुनकर मेरे भाई हों. काशी का पूरी दुनिया में आध्यात्मिक राजधानी के रूप में स्थान बने."

उन्होंने कहा कि शुरू में उन्हें वडोदरा में काम करने का मौक़ा मिला और आज वाराणसी में माँ की गोद में वापस आया हूँ. मैं जिस वडनगर के जिस गाँव में पैदा हुआ, वहाँ भी शिव का बहुत बड़ा तीर्थ है.

बनारस का माहौल

बनारस में इस वक़्त कई जगह भाजपा की टोपी और झंडे ही दिखाई दे रहे हैं. शहर में रैली के मद्देनज़र बंद जैसा माहौल है. ज़्यादातर दुकानें बंद रखी गई हैं.

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ऑटो भी कम चल रहे हैं. रैली से होने वाली परेशानियों की वज़ह से कई निजी शिक्षण संस्थान भी बंद हैं.

उधर आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल जो पहले से ही वाराणसी में हैं, वो शहर के अस्सी घाट पर 'प्रार्थना और साधना' कर रहे हैं.

क़रीब 40-50 समर्थकों के साथ अरविंद केजरीवाल घाट पर सोमनाथ भारती के साथ हुई मार-पीट के प्रतीकात्मक विरोध के तौर पर ध्यान-साधना कर रहे हैं.

यहाँ तीन पार्टियाँ मुकाबले में हैं, भाजपा, कांग्रेस और आम आदमी पार्टी. लेकिन तीनों पार्टियों का प्रचार का तरीक़ा बिल्कुल अलग है.

आम आदमी पार्टी के अरविंद केजरीवाल दिल्ली में आजमाए हुए तरीक़े से गली-गली घूम कर, घर-घर जाकर, स्थानीय स्तर पर मोहल्ला चौपाल लगाकर प्रचार कर रह रहे हैं.

प्रचार

भाजपा के नेताओं का प्रचार का तरीक़ा थोड़ा अलग है. स्थानीय पत्रकार नीलांबुज तिवारी के अनुसार भाजपा के कार्यकर्ता और स्थानीय नेता छोटी-छोटी टोलियाँ बनाकर लोगों से मिल रहे हैं.

नीलांबुज कहते हैं, "भाजपा का प्रचार अभी चाय-पान की दुकानों तक ही सीमित है. अभी उसके बड़े नेता घर-घर जाकर वोट नहीं मांग रहे हैं."

आम आदमी पार्टी की सभाओं और नुक्कड़ नाटकों में लोगों की ठीकठाक संख्या भी जुट रही है. आम आदमी पार्टी के नेता लोगों से बदलाव के लिए वोट मांग रहे हैं.

पर इस भीड़ में कितने बनारस संसदीय क्षेत्र के वोटर हैं, ये ठीक-ठीक बता पाना आसान नहीं. हर पार्टी के लिए जम रही भीड़ में कई लोग बनारस के बाहर से आए हुए हैं जो चुनावी माहौल का मज़ा लेने भर का काम कर रहे हैं.

आम आदमी पार्टी के नेताओं पर हुए हमलों के बाद ऐसा लग रहा है कि आम आदमी पार्टी के पक्ष में थोड़ी सहानुभूति उपजी है.

वहीं कांग्रेस के अजय राय की प्रचार नीति के बारे में पूछने पर नीलाबुंज कहते हैं, "कांग्रेस के नेता अभी मठाधीशों से ही मिल रहे हैं."

मुस्लिम वोटों पर नज़र

मोदी को टक्कर देने के लिए किसी भी प्रत्याशी को शहर के मुस्लिम वोटों की ज़रूरत होगी. वरिष्ठ स्थानीय पत्रकार रमेश कुमार सिंह कहते हैं, “परंपरागत रूप से शहर के मुस्लिम मतदान से दो-तीन पहले ही तय करते हैं कि उन्हें किसे वोट देना है. तब तक वो सभी प्रत्याशियों को बहुत सजगता से परखते हैं.”

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केजरीवाल की रैलियों में स्थानीय मुस्लिमों की उपस्थिति को भी रमेश कुमार सिंह स्वीकार करते हैं. लेकिन वो इस बात से इनकार करते हैं कि कुछ लोगों के झुकाव से सभी मुस्लिमों के बारे में अभी कोई राय बनाई जा सकती है.

वामपंथी पार्टी सीपीआई-एमएल ने अरविंद केजरीवाल को समर्थन दिया है. पार्टी की केंद्रीय समिति के सदस्य और उत्तर प्रदेश के प्रभारी रामजी राय भी मानते हैं कि अभी अल्पसंख्यकों के वोट के बारे में पक्के तौर पर कुछ नहीं कहा जा सकता लेकिन उनका आंशिक झुकाव केजरीवाल की तरफ दिख रहा है.

रामजी राय मानते हैं कि मोदी का जनाधार तथाकथित उच्च जातियों तक ही है. वो कहते हैं, “मोदी जितना भी विकास की बात कर रहे हैं, सतह के नीचे उनका प्रचार सांप्रदायिक है. उच्च वर्ग और कथित अगड़ी जातियों में उनका समर्थन है लेकिन पिछड़ी मानी जानी वाली जातियों में उनकी कोई लहर नहीं दिख रही है.”

ग्रामीण वोटों की चुनौती

भाजपा के लिए दूसरी बड़ी चुनौती ग़ैर शहरी वोटों का हैं. रमेश कुमार सिंह कहते हैं, “शहरी क्षेत्र में भाजपा हमेशा से अच्छा करती रही है लेकिन गांव के इलाक़ों में मोदी का प्रभाव अभी उस तरह नहीं दिख रहा है.”

मोदी के लिए एक चुनौती मतदान का प्रतिशत भी हो सकता है. कम मतदान होने पर मोदी के लिए जीत की राह कठिन हो सकती है. रमेश कुमार कहते हैं, “अगर 45 प्रतिशत तक मतदान होता है तो मोदी के लिए मुश्किल बढ़ सकती है. लेकिन यदि मतदान 50-55 प्रतिशत हुआ तो मोदी की संभावना बहुत बढ़ जाएगी.”

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चूंकि अभी तक जितने चरणों के चुनाव हुए हैं उनमें मतदान का प्रतिशत 2009 की तुलना में आमतौर पर ज़्यादा रहा है. इसलिए वाराणसी में संभावना है कि वोट प्रतिशत बढ़े और ऐसा हुआ तो इसका फ़ायदा सीधे नरेंद्र मोदी को मिलने की उम्मीद जताई जा रही है.

बनारस में चुनाव आख़िरी चरण में 12 मई को है. माना जा रहा है कि आख़िरी चरण में चुनाव होने के कारण सभी पार्टियाँ अपनी पूरी ताकत झोंक देंगी. तो क्या अभी बनारस में चुनाव के समीकरण बदलने की काफ़ी संभावनाएं हैं

यहाँ चुनाव होने में तक़रीबन 18 दिन अभी बाकी हैं, 18 दिन की महाभारत हुई थी तो लगता है अभी बनारस में चुनावी महाभारत होनी बाक़ी है.

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