फ़िलहाल जेल में ही रहेंगे राजीव गांधी के हत्यारे

  • 25 अप्रैल 2014
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भारत के सर्वोच्च अदालत ने पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के हत्यारों को रिहा किए जाने के मामले को संविधान पीठ को सौंप दिया है. पीठ का फ़ैसला आने तक ये लोग जेल में ही रहेंगे.

संविधान पीठ तय करेगी कि ये मामले किस सरकार के अधिकार क्षेत्र में आएगा. यानी केंद्र और तमिलनाडु में किस सरकार के पास राजीव गांधी के हत्यारों की सज़ा के बारे में फ़ैसला लेने का अधिकार होगा.

सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद राजीव गांधी की हत्यारे पेरारिवलन की मां अरपुथामल फूट-फूटकर रो पड़ीं.

उन्होंने चेन्नई में बीबीसी हिन्दी से कहा, ''मैंने सभी से गुहार लगाई थी कि अब उसे छोड़ देना चाहिए. मुझको मुख्य न्यायाधीश पी सदाशिवम से बहुत उम्मीदें थीं.''

अरपुथामल ने कहा, "हम सभी ने दया याचिका दी थी और फ़ैसले का इंतज़ार कर थे. हर बार एक नए जज आए, उन्होंने इस पर ध्यान नहीं दिया क्योंकि यह राजीव गांधी की हत्या का मामला था. जब उन्होंने मामला विशेष कोर्ट को सौंपा और जब भारत के मुख्य न्यायाधीश के पास पहुँचा, तो वह मौत की सज़ा को उम्रक़ैद में तब्दील करने की बात करने लगे."

'लोगों के बीच जाएंगे'

उन्होंने कहा, "चूँकि वह अन्य क़ैदियों की सज़ा कम कर रहे थे इसलिए हमें उम्मीद थी कि वह हमारे साथ भी ऐसा ही करेंगे. जैसा कि हमें उम्मीद थी, उन्होंने जेल में बिताए कई सालों के मद्देनज़र मौत की सज़ा को उम्रक़ैद में बदल दिया. मौत की सज़ा बदलने वक़्त उन्होंने कहा कि इस मामले से संबंधी अधिकार अब राज्य सरकार को स्थांतरित किया जाता है इसलिए मैंने उन पर विश्वास किया. "

फांसी की सज़ा के खिलाफ जनांदोलन चलाने वाले सेल्वराज मुर्गियन ने कहा, ''जस्टिस सदाशिवम ने चूंकि पहले उनकी फांसी को उम्रकैद में बदला था, लिहाजा उम्मीद थी कि वह आगे भी राहत देंगे.''

मुर्गियन ने भी कहा कि केरल सीबीआई में पुलिस अधीक्षक रहे वरिष्ठ पुलिस अधिकारी वी थियागराजन ने एक महत्वपूर्ण बात का खुलासा किया.

सेवानिवृत्त हो चुके थियागराजन ने स्वीकार किया है कि उनके द्वारा दर्ज किए गए पेरारिवालन के इकबालिया बयान में 'खोट' है. वे डॉ. कार्तिकेयन के नेतृत्व वाले विशेष जांच दल (एसआईटी) का हिस्सा रहे हैं.

पेरारिवालन के ऊपर बैटरी खरीदने का आरोप है जिसका इस्तेमाल पूर्व प्रधानमंत्री की हत्या में इस्तेमाल किए गए मानव बम में हुआ था.

अपने अगले क़दम के बारे में अरपुथामल ने कहा, "हम फिर से लोगों के बीच जाएंगे और उनको एकजुट करेंगे. मैं सोचती हूँ कि हम इस मामले से जुड़ी सभी चीज़ों पर बात करेंगे. इन दिनों हमने इस पर बात नहीं की है, हम इसके बारे में लोगों के बीच अभियान चलाएँगे. अगले क़दम के रूप में हम वकीलों से बात करेंगे जो संविधान पीठ के सामने यह साबित करेंगे कि ये क़ैदी निर्दोष हैं."

उम्र क़ैद की सज़ा

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राजीव गांधी के हत्यारों मुरूगन, संतन और पेरारिवलन को फांसी की सज़ा दी गई थी, लेकिन इसी साल सुप्रीम कोर्ट ने इनकी मौतकी सज़ा को उम्र क़ैद में तब्दील कर दिया था.

राजीव गांधी की हत्या में शामिल नलिनी, रॉबर्ट, जया कुमार और रविचंद्रन पहले से उम्र क़ैद की सज़ा काट रहे हैं.

तमिलनाडु सरकार सभी गुनहगारों को रिहाकरना चाहती है. उम्र क़ैद की सज़ा माफ़ करने का अधिकार राज्य सरकार का होता है. लेकिन केंद्र सरकार इसका विरोध कर रही है. केंद्र का कहना है कि ऐसा करने से ग़लत परंपरा शुरू होगी.

लिहाज़ा सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले को संविधान पीठ को अधिकार को सौंप दिया है कि वो तय करे इस मामले को किस सरकार के तहत माना जाए. पीठ इसे जिस सरकार के तहत मानेगी, उसके पास इन दोषियों की सजा के संबंध में फैसला लेने का अधिकार होगा.

फरवरी में इन सातों गुनाहगारों को तमिलनाडु ने रिहा करने का करने का आदेश दिया था. इसके खिलाफ केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में अपील करते हुए राज्य सरकार के अधिकार को चुनौती दी थी.

मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली एक पीठ ने 20 फरवरी को राज्य सरकार के आदेश पर रोक लगा दिया था. तब पीठ ने कहा था कि राज्य की ओर से प्रक्रियागत चूक हुई है.

पीठ के मुख्य न्यायाधीश सदाशिवम 26 अप्रैल को सेवानिवृत्त होने वाले हैं.

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