बिहार में आरजेडी और जेडीयू में लड़ाई दूसरे स्थान की: रूड़ी

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बिहार में लोकसभा चुनाव के परिणाम इस बार बेहद अहम साबित होने वाले हैं. भारतीय जनता पार्टी को भरोसा है कि वो अपने सहयोगियों के साथ बिहार की अधिकांश सीटों पर जीत हासिल कर रही है.

पार्टी के प्रवक्ता और सारण संसदीय क्षेत्र से चुनाव लड़ रहे पूर्व केंद्रीय मंत्री राजीव प्रताप रूडी से ख़ास बातचीत.

रूडी जी, पहला सवाल तो यही है कि बिहार में आप लोगों का प्रदर्शन कैसा रहेगा?

देखिए बिहार में भारतीय जनता पार्टी रामविलास पासवान और उपेंद्र कुशवाहा के साथ मिलकर बिहार की सभी सीटों पर जीत हासिल करेगी, तो इसमें कोई आश्चर्य नहीं होना चाहिए.

लेकिन कहा ये जा रहा है कि राष्ट्रीय जनता दल प्रत्येक सीट पर भारतीय जनता पार्टी को कड़ी टक्कर दे रहा है, ऐसे में भारतीय जनता पार्टी का प्रदर्शन उम्मीद के मुताबिक नहीं होगा?

बिहार में विपक्ष का स्थान कौन लेगा, इसको लेकर आरजेडी और जेडीयू में संघर्ष है. रामविलास पासवान जी बिहार में गेम चेंजर के तौर पर आए हैं. आज बिहार में कमज़ोर जाति के लोग, पिछड़ी जाति के लोग पूरी तरह से भारतीय जनता पार्टी के साथ आ गए हैं. क्योंकि इन लोगों में एक अजीब सा विश्वास दिख रहा है. हम लोग भी कह रहे हैं कि पहली बार एक चाय बेचने वाला का बेटा देश का प्रधानमंत्री बनेगा.

आप अपने क्षेत्र के बारे में बताइए, राबड़ी देवी आपके ख़िलाफ़ खड़ी हैं और पिछली बार आप चुनाव हार गए थे.

सारण संसदीय क्षेत्र का चुनाव हमेशा संघर्षमय होता है. बिहार की 40 सीटों में जिस एक सीट पर देश की नज़र होती है वो सारण है. संघर्ष की स्थिति है. लालू जी जेल जाने के बाद राजनीति में कभी एमपी, एमएलए नहीं बन पाएंगे, ऐसा लगता है. ऐसे में वे अपने परिवार के लोगों को आगे ला रहे हैं. कहीं बेटे को खड़ा करना चाहते हैं, पत्नी को सारण से लड़ा रहे हैं. मीसा को टिकट दिया है. वे एक समीकरण की राजनीति की बात करते हैं. लेकिन एक उतावलापन उस समाज में दिख रहा है जो कल तक लालू यादव की मदद की बात करता था.

राष्ट्रीय स्तर पर जिस तरह की बयानबाज़ी का दौर चल रहा है, वैसी स्थिति में पार्टी के प्रवक्ता होने के नाते आपका क्या कहना है?

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चुनाव की राजनीति में ऐसे प्रकरण देखने को मिलते हैं. वर्तमान लोकतांत्रिक व्यवस्था में अल्पमत ही बहुमत की सरकार तय करता है. ऐसे में भारतीय राजनीति में मूलभूत बदलाव की जरूरत है. जहां डिलीवरी, एकाउंटिबलिटी, ऑनेस्टी को मानक बनाने की ज़रूरत है. हमारे मौजूदा सिस्टम में मेरिट की गुंजाइश बेहद कम है. यहां जाति, धर्म,समाज, ताक़त, धन और भौगोलिक क्षेत्र का ज़्यादा महत्व है.

आप इस तरह की बयानबाज़ी को मान्यता नहीं देते?

ये मजबूरी बन गया है. इस मजबूरी की वजह है कि हम जाति आधारित राजनीति की बात करते हैं. जिस दिन भारत में बेस वर्क मेरिट हो जाएगा उस दिन कई समस्याओं के हल अपने आप मिल जाएंगे.

एक आख़िरी सवाल, अचानक से प्रियंका गांधी और राबर्ट वाड्रा पर आपकी पार्टी इतने हमले क्यों कर रही है?

देखिए मैं तो चुनाव अभियान के लिए बहुत देहात में हूं. देर रात तक क्षेत्र में घूमता रहता हूं. इसलिए टीवी पर क्या हो रहा है, इस पर मैं कोई टिप्पणी नहीं कर सकता हूं.

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