भारत ने जापान को पछाड़ा फिर भी लोग हैं पिछड़े

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वर्ल्ड बैंक और कई बड़ी अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों की ताज़ा रिपोर्ट बताती है कि जापान को पछाड़ते हुए भारत दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन गया है.

दुनिया की अर्थव्यवस्था में अमरीका का हिस्सा 17.1 प्रतिशत, चीन का 14.9 प्रतिशत और भारत का हिस्सा 6.4 प्रतिशत है.

यह नतीजा पर्चेज़िंग पावर पैरिटी के आधार पर निकाला गया है, जिसमें हर देश में डॉलर की क्रयशक्ति के हिसाब से आकलन किया जाता है.

बीबीसी ने अर्थव्यवस्था के जानकार एमके वेणु से जानने की कोशिश की कि जापान को पीछे छोड़ देने वाले भारत में आम लोगों की ज़िंदगी में समृद्धि क्यों नहीं दिखाई देती?

प्रति व्यक्ति आय

भारत में 85-90 फ़ीसदी लोग दो डॉलर प्रतिदिन (करीब 120 रुपए) से भी कम पर गुज़ारा करते हैं. उन्हें मुश्किल से दो वक्त का खाना और रहने को घर मिलता है. ऐसे में आप जापान और अमरीका के लोगों के जीवन स्तर से तुलना नहीं कर सकते.

अमरीका और जापान की अर्थव्यस्था जिस स्तर पर दशकों से रही है, वहाँ भारत और चीन अभी पहुँचने की कोशिश कर रहे हैं इसलिए सुविधाओं के मामले में वहाँ लोगों का जीवन स्तर बहुत पहले से बहुत बेहतर है.

अंदाज़ा भ्रामक हो सकता है

तकनीकी तौर पर तो ये रिपोर्ट ठीक है क्योंकि वर्ल्ड बैंक और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष इसी तरीक़े से रिपोर्ट बनाते हैं. चीन और भारत प्रति व्यक्ति आय के आधार पर अमरीका और जापान के लोगों के जीवन स्तर को छूने वाले हैं लेकिन वास्तिवकिता में देखें तो इन देशों के लोगों के जीवन स्तर के बीच बहुत भारी अंतर है.

भारत की प्रति व्यक्ति आय क़रीब 1800 डॉलर प्रतिवर्ष है, जो कि बहुत अच्छी नहीं है लेकिन अगर पीपीपी के हिसाब से देखें तो यह क़रीब 5400 डॉलर के आसपास होगी जो वास्तविक आय नहीं है.

जनसंख्या का बोझ

आप भारत और जापान के सकल घरेलू उत्पाद यानी जीडीपी की तुलना नहीं कर सकते हैं. भारत का जीडीपी अभी 20 खरब डॉलर के आसपास है जबकि जापान का जीडीपी 60 खरब डॉलर है यानी भारत से तीन गुना अधिक.

सकल घरेलू उत्पाद को किसी देश की कुल जनसंख्या से भाग देने पर जो आँकड़ा मिलता है वही प्रति व्यक्ति आय है, इस हिसाब से भारत का जीडीपी जापान से तीन गुना कम है जबकि आबादी लगभग दस गुना अधिक.

महंगाई

महंगाई विकास को बाधित करती हैं और लोगों की वास्तविक आय को भी घटाती है. भारत की महंगाई का इतिहास बहुत अच्छा नहीं है. भारत में इस दशक में अब तक महँगाई बढ़ने की दर औसतन 10 प्रतिशत तक रही है, जो बहुत अधिक है.

अमरीका और जापान में महँगाई बढ़ने की दर एक-दो प्रतिशत से अधिक नहीं होती और ऐसा दशकों से रहा है इसलिए वहाँ लोगों का जीवन स्तर महँगाई से उस तरह प्रभावित नहीं होता जिस तरह भारत के आम आदमी का होता है.

अमीरी और ग़रीबी के बीच की खाई

यह सही है कि पिछले 10 सालों में 14 करोड़ लोगों को ग़रीबी रेखा से ऊपर लाया गया है लेकिन भारत में अमीर और ग़रीब की कमाई में अंतर लगातार बढ़ रहा है. भारत के अमीर पिछले दस सालों में और अमीर हुए हैं जबकि ग़रीब पहले से ग़रीब.

जीडीपी और प्रति व्यक्ति आय के मामले में दुनिया के बहुत से देश भारत से बहुत आगे हैं, लेकिन अरबपतियों की संख्या के मामले भारत आगे है जो दिखाता है कि भारत में संपत्ति का बंटवारा बहुत कम लोगों के बीच ही हुआ है.

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