चरमपंथ के साथ ज़ीरो टॉलरेंस: अमित शाह

अमित शाह

भारतीय जनता पार्टी के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी के निकट सहयोगी अमित शाह का दावा है कि पार्टी लोकसभा में 272 सीटों के जादुई आंकड़े को पार करके एक ऐसी सरकार बनाएगी जो पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की 'ज़ीरो टॉलरेंस' की नीति पर चलते हुए चरमपंथ को ज़रा भी बर्दाश्त नहीं करेगी.

अमित शाह ने ये दावा बीबीसी से ख़ास बातचीत में किया है.

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चु्नाव प्रचार के दौरान भारतीय जनता पार्टी के गिरिराज सिंह जैसे नेता कुछ ऐसे बयान देते रहे हैं जिनसे नरेंद्र मोदी की पाकिस्तान विरोधी छवि उभरती है. क्या वाक़ई नरेंद्र मोदी का रवैया पाकिस्तान के प्रति कठोर है, इस सवाल का अमित शाह कोई सीधा जवाब नहीं देते, वो कहते हैं, ''अब आपके कान में कह गए हो तो नहीं मालूम, मैंने तो कभी नहीं सुना.''

गुजरात के इशरत जहाँ फ़र्ज़ी मुठभेड़ मामले से पहली बार सुर्ख़ियों में आने वाले राज्य के पूर्व गृह राज्य मंत्री अमित शाह की मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी से गाढ़ी दोस्ती मानी जाती है जिसकी बुनियाद पर कयास लगाए जा रहे हैं कि मोदी यदि प्रधानमंत्री बन गए तो मुख्यमंत्री की खाली हुई कुर्सी को अमित शाह से भरा जाएगा.

क्या आप इस कुर्सी के दावेदार हैं, इस सवाल पर अमित शाह कहते हैं, ''मैंने कभी कोई दावा नहीं किया, मेरा निर्णय हमेशा पार्टी ने किया है.''

अमित शाह इस सवाल के जवाब में यह भी याद दिलाना नहीं भूलते कि पार्टी ने उन्हें तीन साल के लिए राष्ट्रीय महासचिव बनाया है.

'स्पष्ट और कड़वा'

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अमित शाह यह कहने में बड़ा गौरव महसूस करते हैं कि वह स्पष्ट और कड़वा बोलते हैं जिसकी वजह से अक्सर विवादों में आ जाते हैं.

इशरत जहाँ फ़र्ज़ी मुठभेड़ मामले पर अमित शाह कहते हैं, ''देश में सबसे कम एनकाउंटर गुजरात में हुए हैं, लेकिन गुजरात में ऐसे सभी मामलों की जांच हो रही है.''

अमित शाह इस जांच को अपने ख़िलाफ़ नहीं मानते और कहते हैं कि यह राजनीतिक बदले से प्रेरित है जिसका मक़सद नरेंद्र मोदी की छवि ख़राब करना है.

भाजपा का सबसे बड़ा नेता कौन?

पार्टी के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी और उनके क़रीबी नेताओं को जिस तरह किनारे करके नरेंद्र मोदी को आगे बढ़ाया गया, यह बात किसी से छिपी नहीं है.

चुनाव प्रचार के दौरान भी पार्टी की बजाए मोदी लहर शब्द का इस्तेमाल होता रहा है. ऐसे में यह सवाल स्वाभाविक रूप से पैदा होता है कि भाजपा का सबसे बड़ा नेता आज की तारीख़ में कौन है.

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इस सवाल को अमित शाह पार्टी संविधान की दुहाई देकर टाल जाते हैं और अपने संसदीय बोर्ड को सर्वोच्च बताते हैं.

'अब रणनीति क्या बताएं'

अरब सागर के तट पर बसे गुजरात से गंगा किनारे बनारस तक मोदी का सफ़र किस मंज़िल पर पहुंचेगा, इसका फ़ैसला 12 मई को होने वाले मतदान के ज़रिए होगा.

बनारस में अजय राय और मुख़्तार अंसारी ने नरेंद्र मोदी के ख़िलाफ़ हाथ मिला लिए हैं. यहां से आम आदमी पार्टी के अरविंद केजरीवाल भी चुनाव मैदान में हैं.

लेकिन अमित शाह को अपनी बिछाई बिसात पर पूरा भरोसा है. वह कहते हैं, ''बनारस मुख़्तार अंसारी जैसे लोगों को कभी स्वीकार नहीं करेगा.''

रही बात जीत की रणनीति की तो अमित शाह कहते हैं, ''रणनीति तो अब ख़त्म होने को है, 12 मई को चुनाव है, अब मीडिया को क्या बताएं कि रणनीति क्या है.''

'तुलना में यकीन नहीं'

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अमित शाह को यह बात पसंद नहीं कि नरेंद्र मोदी की तुलना देश-दुनिया के किसी भी नेता से की जाए.

वे दार्शनिक अंदाज़ में कहते हैं, ''हर व्यक्ति का व्यक्तित्व इस आधार पर उभरकर सामने आता है कि उसके सामने चुनौती क्या है. अलग-अलग समय में चुनौतियां भी अलग-अलग होती हैं.''

नरेंद्र मोदी ने बनारस में अपने रोड शो के दौरान कहा था कि ''गंगा मइया ने बुलाया सो चला आया'', लेकिन सियासी नफ़े-नुक़सान को किसी दक्ष चार्टेड एकाउंटेंट की तरह समझते हुए अमित शाह बेझिझक होकर कहते हैं, ''बनारस से हमें उत्तर प्रदेश और बिहार दोनों जगहों पर फ़ायदा हो सकता था और फ़ायदा हुआ भी.''

बात नीच राजनीति की

प्रियंका गांधी ने बीते दिनों नरेंद्र मोदी के संदर्भ में नीच राजनीति करने की बात कही थी. इस पर मोदी ने कहा कि वह पिछड़ी जाति से आते हैं इसलिए उन्हें निशाना बनाया जा रहा है.

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काफ़ी विवाद हुआ इन बयानबाज़ियों पर. किससे चूक हुई समझने में, कांग्रेस से या नरेंद्र मोदी से, इस सवाल पर अमित शाह कहते हैं, ''इस शब्द का प्रयोग यदि भारतीय जनता पार्टी के किसी नेता ने किया होता तो पूरे देश में हो-हल्ला मच जाता. ये अभद्र टिप्पणी है.''

इस बहाने से ही सही, लेकिन मोदी को अपनी जाति का ज़िक्र छेड़ने की ज़रूरत क्यों पड़ी, क्या नज़र पिछड़ी जातियों के वोट पर है, इस सवाल पर अमित शाह कहते हैं, ''किसी ने जाति पर आरोप लगाया, इसलिए उन्हें जवाब देना पड़ा.''

'काम के मामले में कठोर'

नरेंद्र मोदी के ख़ास क़रीबी होने की वजह से भारतीय जनता पार्टी में अमित शाह का क़द तेज़ी से बढ़ा और उन्हें उत्तर प्रदेश की कमान सौंपी गई थी.

ख़बरें सुनने को मिलती रही हैं कि पार्टी नेता उनसे बड़े सहमकर मिलते हैं. लेकिन ख़ुद अमित शाह को ऐसा नहीं लगता.

वह कहते हैं, ''काम के मामले में बड़ा कठोर आदमी हूं. योजना को कठोरता से लागू करता हूं. कार्यकर्ताओं से संवेदना रखता हूं क्योंकि मैं ख़ुद एक कार्यकर्ता हूं.''

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