इस बार यूपीए-3 बनेगीः आज़ाद

  • 12 मई 2014
ग़ुलाम नबी आज़ाद

बनारस में चुनाव प्रचार के आखिरी दिन राहुल गाँधी के रोड में आए लोगों के हुजूम से कांग्रेस पार्टी में उत्साह का माहौल है. सियासी हलकों में ये कहा जा रहा है कि कांग्रेस पार्टी को खुद इतने बड़े जन-सैलाब का अंदाज़ा न रहा होगा.

यही सवाल मैंने बनारस में कांग्रेस के चुनाव प्रचार के लिए आए पार्टी के वरिष्ठ नेता और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ग़ुलाम नबी आज़ाद से पूछा कि क्या कांग्रेस पार्टी को इस बात की उम्मीद थी कि बनारस में राहुल के रोड शो में इतनी बड़ी तादाद में लोग इकट्ठा हो पाएंगे.

(केजरीवाल, राहुल और अखिलेश)

इस पर ग़ुलाम नबी आज़ाद ने कहा, "कांग्रेस पार्टी को पूरा विश्वास था और इसी भरोसे के मुताबिक ही ये हुआ. इतने सारे लोग आसमान से थोड़े ही उतरे थे. हम लोग पहले से ही बता रहे थे कि चाहे बीजेपी और या केजरीवाल हों, वे बनारस में जो अपना शक्ति प्रदर्शन कर रहे हैं. वो राजस्थान, मध्य प्रदेश और गुजरात से लोग लाकर, उनके बलबूते कर रहे हैं."

आज़ाद ने आरोप लगाया कि केज़रीवाल को भाजपा से मदद मिल रही है, "अरविंद केजरीवाल को भी भाजपा से प्रत्यक्ष या परोक्ष मदद मिल रही है. बीजेपी समर्थक भी उनकी मदद करते हैं. उन्होंने भी देश भर के अन्य स्थानों से लोग इकट्ठा किए हैं. लेकिन जब कांग्रेस पार्टी की बारी आती है तो वह कहीं से भी बाहरी लोगों को नहीं लाती. वह बनारस के स्थानीय लोगों, मतदाताओं पर निर्भर करती है. और ऐसा हुआ भी है."

अमेठी में मोदी

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आज़ाद कहते हैं, "हमने बनारस के लोगों से कहा है कि एक तरफ से उम्मीदवार भी बाहरी हैं और लोग भी बाहर से लाते हैं. हमारा उम्मीदवार भी स्थानीय है और वहीं के लोगों को उनके लिए बाहर आना पड़ेगा."

(भाजपा के निशाने पर चुनाव आयोग)

भारत में चुनाव प्रचार के दौरान मुख्य राजनीतिक प्रतिद्वंदियों के निर्वाचन क्षेत्रों में जाकर प्रचार न करने का एक तरह से अलिखित नियम रहा है और बड़े नेता हमेशा से इससे बचते रहे हैं.

कई लोग ये भी कहते हैं कि इसकी शुरुआत नरेंद्र मोदी ने अमेठी में रैली करके की है और जब भाजपा ने उस अलिखित नियम को तोड़ ही दिया है तो कांग्रेस बनारस में राहुल गाँधी का रोड शो आयोजित करके इसका एक तरह से जवाब ही दे रही है.

इस बात पर ग़ुलाम नबी आज़ाद कहते हैं, "लोगों को इतिहास ठीक से पता नहीं है. 2004 में जब बनारस से राजेश मिश्र कांग्रेस उम्मीदवार थे और वे जीत भी गए थे. उस वक्त भी राहुल गाँधी ने बनारस में रोश शो किया था."

हालांकि इसका एक पहलू ये भी है कि स्टार कैंडिडेट जैसे प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार के खिलाफ कैम्पेन करने के मामले में पहले का कोई उदाहरण खोजना मुश्किल है.

यूपीए थ्री

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ग़ुलाम नबी आज़ाद कहते हैं, "स्टार कैम्पेन क्या होता है. कैम्पेन कैम्पेन होती है. स्टार और नॉनस्टार क्या होता है. राहुल गाँधी ने 2004 में भी प्रचार किया था, बाद में हुए विधान सभा चुनावों में भी प्रचार किया था और इस बार भी उन्हें प्रचार किया ही था."

(बनारस में राहुल गाँधी का रोड शो)

लोग कह रहे हैं कि बनारस में मुकाबला दरअसल भाजपा और कांग्रेस के बीच है इसलिए शायद राहुल गाँधी ने सोचा होगा कि आखिरी दिन प्रचार किया जाए.

उन्होंने कहा, "आम आदमी पार्टी यहाँ कहाँ है. यहाँ आम वोट है जोकि कांग्रेस के साथ, कोई आम आदमी पार्टी नहीं है. "

एक सवाल ये भी है कि 16 मई आने को है और यूपीए के बारे में कई तरह के कयास लगाए जा रहे हैं.

यूपीए सत्ता विरोधी लहर से किस हद तक निपट पाई होगी, इस सवाल पर ग़ुलाम नबी आज़ाद कहा कहना है कि पहले यूपीए-वन बनी फिर यूपीए-टू बनी अब की बार यूपीए-3 बनेगी.

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