सीएजी ने कॉरपोरेट जगत पर निशाना साधा

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देश में आर्थिक विकास तो हुआ है लेकिन यह विकास महज़ कुछ ख़ास लोगों तक ही पहुंचा है. यह मानना है कि भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक(सीएजी) शशिकांत शर्मा का.

साथ ही उन्होंने यह भी कहा है कि सीएजी उन निजी कंपनियों और सार्वजनिक साझेदारी वाले उपक्रमों का ऑडिट जारी रखेगी जिनमें सरकार की हिस्सेदारी है.

कॉरपोरेट धोखाधड़ी से संबंधित एक कांफ्रेंस में बोलते हुए शशिकांत शर्मा ने कहा, "हमारा टेलिकॉम ऑडिट का काम जारी है और हमें उम्मीद है कि इस साल के अंत तक हम पहली रिपोर्ट जारी करेंगे. जबकि गैस एवं तेल शोधन के क्षेत्र की रिपोर्ट जल्द ही संसद के सामने रखी जाएगी."

सीएजी ने निवेशकों को भरोसा दिलाया है कि इन जांच से बहुत घबराने की ज़रूरत नहीं है. उन्होंने कहा, "मौजूदा बाज़ार व्यवस्था एक परिपक्व व्यवस्था है, जिसमें गड़बड़ी और धांधली की नाममात्र गुजांइश है, ऐसे में तमाम कंपनियां ऑडिट कराए जाने से क्यों डर रही हैं, जब उनके पास छुपाने के लिए कुछ भी नहीं है."

बड़ी हिस्सेदारी की चाहत

मौजूदा आर्थिक विकास में हिस्सेदारी लेने वाले समूह को शर्मा ने किराएदार जैसा मानते हुए कहा है कि यह प्रवृत्ति दीर्घकालीन नीतियों के लिए ठीक नहीं है.

उन्होंने कॉरपोरेट जगत पर भी निशाना साधा है. उन्होंने कहा, "कॉरपोरेट जगत में रसूख़ रखने वाले बाज़ार में बड़ी भागीदारी चाहते हैं, वे बाज़ार को और बड़ा बनाना नहीं चाहते."

शर्मा के मुताबिक यह प्रवृति बैंकिंग, खनन, टेलिकॉम, तेल और गैस शोध के अलावा जनहित की सार्वजनिक सुविधाओं सहित सभी क्षेत्रों में देखने को मिल रही हैं.

टेलिकॉम, तेल और पॉवर सेक्टर की कई निजी कंपनियां सीएजी की ऑडिटिंग काविरोध कर रही हैं.

हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने अपने हाल के फ़ैसले में स्पष्ट किया है कि सार्वजनिक संसाधन का अपने कारोबार में इस्तेमाल करने वाली कंपनियों और सरकार के साथ राजस्व हिस्सेदारी वाली कंपनियों की ऑडिटिंग सीएजी कर सकती हैं.

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शशिकांत शर्मा ने ये भी कहा कि भारत एक युवा और बेचैन मुल्क है जहां का युवा और शोषित तबका भ्रष्टाचार को लेकर आक्रोश में है. यह तबका मानता है कि भ्रष्टाचार सरकार और निजी कॉरपोरेट घराने मिलकर कर रहे हैं.

युवा और बेचैन मुल्क

भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक ने कहा, "भ्रष्टाचार और धोखाधड़ी से देश का विकास प्रभावित नहीं हो, हमें यह सुनिश्चित करना होगा."

उन्होंने बेहतरी की उम्मीद जताते हुए कहा है कि अगर आर्थिक विकास से एक ओर मुनाफ़ाखोर तबका सामने आया है तो इसी विकास के चलते एक नए तरह का मध्य वर्ग भी पैदा हुआ है, जो शिक्षित शहरी है और अपने अधिकार एवं दायित्वों को समझता है, टैक्स चुकाता है और देश में सकारात्मक बदलाव चाहता है.

सीएजी ने जब निजी क्षेत्र की टेलिकॉम कंपनियों का ऑडिट शुरू किया था तब इसके विरोध में कंपनियां हाईकोर्ट में चली गईं. हाई कोर्ट ने उनकी दलीलों को ख़ारिज कर दिया और बाद में सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के फ़ैसले को कायम रखा.

भारत के सीएजी ने इस बात पर जोर दिया है कि अगर भ्रष्टाचार पर काबू पाना है तो संस्थाओं को मज़बूत बनाना होगा.

उन्होंने कहा, "इस बात के सबूत हैं कि अच्छे संस्थानों वाले देश क्रॉनी कैप्टलिज्म से बेहतर ढंग से निपट पाए हैं. इसलिए सरकार को नियामक संस्थाओं को बेहतर बनाना होगा और आपसी प्रतिस्पर्धा को स्वस्थ बनाना होगा."

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