चुनावों की ये 'फ़िल्म' हिट होगी या फ़्लॉप?

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क्रिकेट को धर्म और खिलाड़ियों को भगवान मानने वाले देश के लोगों का स्वाद लगता है कुछ बदल सा गया है.

इस बार वो भारत-पाकिस्तान के किसी मैच या बॉलीवुड फ़िल्म के इंतज़ार में नहीं बल्कि पिछले एक महीने से हो रहे चुनाव के आने वाले नतीजों को लेकर उत्साहित दिख रहे हैं और तैयारियां कर रहे हैं. 16 मई को आने वाले नतीजों को लेकर युवाओं का जोश चरम पर है.

विज्ञापन उद्योग के जानकार बताते हैं कि नतीजे किसी भारत-पाकिस्तान मैच से कम भी नहीं होंगे और दर्शक शायद ही अपने टीवी सेट को आराम देंगे.

कंपनियां इस मौके का पूरा फायदा उठाना चाहती हैं, कोई ज़्यादा विज्ञापन देने की योजना बना रहा है तो कोई छूट पर सामान बेचकर बिक्री बढ़ाना चाहता है. कई ऐसी भी कंपनियां हैं जो अपने कर्मचारियों को साथ लाने के लिए सामूहिक तौर से लाइव नतीजा टीवी पर दिखाने की योजना बना रही है.

अरबों के विज्ञापन

एक अनुमान के अनुसार कंपनियों ने इस चुनाव में क़रीब 2400 करोड़ रुपए विज्ञापनों पर ख़र्च किए हैं. जबकि साल 2009 में ये रकम करीब 500 करोड़ थी.

बीते छह महीनों में कम से कम तीन दर्जन नए चैनल भी खुले हैं.

क्रिएटिव एजेंसी ‘बैंग इन द मिडल’ के मैनेजिंग पार्टनर प्रतान सुथन ने बीबीसी संवाददाता शिल्पा कन्नन से कहा, “चुनाव ऐसा समय होता है जब हर कोई टीवी देख रहा होता है या अख़बार पढ़ता है, या रेडियो सुनता है, क्योंकि हर कोई सही फ़ैसला करना चाहता है. लिहाज़ा ज़ाहिर है कि इतना ध्यान मिलने के समय कंपनियां इसमें रुचि लेंगी. लेकिन कोई भी किसी एक राजनीतिक दल का पक्ष लेते हुए नहीं दिखना चाहेगा, क्योंकि अगर वहीं पार्टी सत्ता में आ गई तो इसका उन्हें नुकसान हो सकता है. वो इसे लेकर काफ़ी सतर्क हैं.”

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लेकिन छह हफ्तों तक खिंचे मतदान और नॉन-स्टॉप विज्ञापनों का रैला कई लोगों को अब बोझिल लग रहा है.

दिल्ली के एक मतदाता वेंकट अनंत कहते हैं, “चुनाव से संबंधित जिस तरह के विज्ञापन हमने बीते पांच-छह हफ़्तों में देखे और कुछ जो अब भी चल रहे हैं, उसे देखकर लोग उकता गए हैं. चूंकि ये चुनाव 9 चरणों में था और समय काफ़ी ज़्यादा होने की वजह से ये विज्ञापन काफ़ी दिन चले भी. ब्रांड्स को चाहिए था कि समय के साथ अपने संदेशों को वे बदलते ताकि उनकी प्रासंगिकता बनी रहती, जो उन्होंने नहीं किया.”

'यारी-दोस्ती' और राजनीति का रिपोर्ट कार्ड

16 मई पर सिर्फ़ विज्ञापनदाताओं की ही नज़र नहीं बल्कि कंपनिया भी इस दिन को एक साथ बिताकर यादगार बनाने की योजना बना रही हैं.

बीबीसी से बातचीत में मार्केट रिसर्च कंपनी इपसॉस इंडिया के मार्केटिंग प्रमुख, बिस्वरूप बनर्जी ने कहा, “हमने अपने सभी दफ़्तरों में बड़ी स्क्रीनें लगवाई है, जहां हमारे कर्मचारी चुनाव के नतीजे लाइव देख सकेंगे. साथ ही हमने ऑफिस में चुनाव पर सार्वजनिक चर्चा के लिए कॉफ़ी पर बातचीत जैसे कार्यक्रम का आयोजन किया है.”

उनका मानना है कि इस तरह के आयोजने से साथ काम करने वालों के बीच रिश्तों में मज़बूती आती है.

चुनाव के नतीजों पर रेस्त्रा श्रृंखलाएं और ऑनलाइन सामान बेचने वाली कंपनियों की भी नज़रें हैं, जो नतीजों के दौरान खाना ऑर्डर करने या शॉपिंग करने पर छूट दे रही हैं.

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