इशरत जहां केस: अमित शाह के ख़िलाफ़ अर्ज़ी ख़ारिज

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इशरत जहां मामले में नरेंद्र मोदी के करीबी सहयोगी अमित शाह और गुजरात के डीजीपी केआर कौशिक पर मुकदमा चलाए जाने की मांग करने वाली याचिका को सीबीआई की एक विशेष अदालत ने ख़ारिज कर दिया है.

सीबीआई ने पिछले सप्ताह ही अदालत को बताया था कि इस मामले में शाह के ख़िलाफ़ पर्याप्त साक्ष्य नहीं हैं.

सीबीआई ने इस अर्ज़ी को अदालत से ख़ारिज करने की अपील की थी.

यह अपील प्राणेश पिल्लई उर्फ जावेद शेख़ के पिता गोपीनाथ पिल्लई ने दायर की थी.

क्या है मामला?

मोदी को क्लीन चिट के ख़िलाफ़ पुनर्विचार याचिका

2004 में अहमदाबाद के बाहरी इलाके में कथित रूप से एक फर्जी मुठभेड़ में 19 वर्षीय इशरत जहां, ज़ीशान जोहर और अमजद अली राणा के साथ प्रणेश की हत्या हुई थी.

गुजरात पुलिस ने दावा किया था कि 2002 में गोधरा बाद हुए दंगों का बदला लेने के लिए ये लोग गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को मारने आए थे.

इस मामले में पीपी पांडे, जीएल सिंघल और डीजी वंजारा समेत गुजरात के कई वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों को नामजद किया गया है.

हालांकि, गोपीनाथ पिल्लई ने अदालत में एक आवेदन देकर मामले में शाह और कौशिक को भी आरोपी बनाने की अपील की थी. आवेदन में दोनों के ख़िलाफ़ साक्ष्य मौजूद होने का दावा किया गया था.

अदालत ने क्या कहा?

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सीबीआई की विशेष जज गीता कोपी ने कहा कि मामले में दायर अतिरिक्त आरोपपत्र पर सुनवाई ज़िला कोर्ट में लंबित है. जब तक उनके सामने आरोपपत्र नहीं आता, तब तक मामले पर पूरी तरह से गौर नहीं किया जा सकता.

इसके अलावा, कोर्ट ने कहा कि मुक़दमा जिस जगह पहुंच चुका है वहां गवाह के बयान को साक्ष्य नहीं माना जा सकता. इस पर सुनवाई के दौरान ही विचार होगा.

इशरत मामले पर हाई कोर्ट सख़्त

इस वर्ष की शुरुआत में सीबीआई ने इस मामले में एक अतिरिक्त आरोपपत्र दायर किया था, लेकिन अदालत ने इसका संज्ञान नहीं लिया, क्योंकि सीबीआई ने इसमें नामित अधिकारियों पर मुकदमा चलाए जाने के लिए गृह मंत्रालय से मंजूरी नहीं ली थी.

'साज़िश का हिस्सा'

अमित शाह की तरफ से उपस्थित हुए अधिवक्ता एसवी राजू ने अदालत को बताया, ''क़ानून की दृष्टि से गवाह का बयान ठीक नहीं है और यह साजिश का हिस्सा है. मामले में जिन लोगों ने अपना बयान दर्ज कराया है वे स्वयं इस एनकाउंटर टीम का हिस्सा थे.''

उन्होंने कहा, ''उनका नाम एफ़आईआर में आते ही वे गवाह बन गए. उन्होंने सीबीआई के पक्ष में बयान दिए ताकि उन्हें ज़मानत मिल जाए.''

राजू ने कहा कि सीबीआई को दिया गया सिंघल का बयान भी इसी साजिश का हिस्सा है, जिसके मार्फत कई आरोपी जमानत पर रिहा हो गए क्योंकि जांच एजेंसी ने 90 दिनों के भीतर आरोपपत्र दाख़िल नहीं किया.

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