हाथ मलते रह जाएंगे जयललिता, ममता और नवीन पटनायक

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आम चुनाव के नतीजों के बाद भारतीय जनता पार्टी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरेगी, यह अनुमान सभी लगा रहे थे और यह भी कहा जा रहा था कि सरकार बनाने के लिए शायद इसे कुछ क्षेत्रीय पार्टियों की ज़रूरत पड़ेगी.

कहा जा रहा था कि भाजपा को बहुमत जुटाने के लिए तमिलनाडु की जयललिता, ओडिशा के नवीन पटनायक और पश्चिम बंगाल की ममता बनर्जी की ज़रूरत होगी.

मगर भाजपा अकेले अपने दम पर ही पूर्ण बहुमत से आगे निकलती दिख रही है और ऐसे में उसे इनमें से किसी की भी ज़रूरत नहीं होगी.

जयललिता, नवीन पटनायक और ममता बनर्जी अच्छे नतीजों के बावजूद अब हाथ मलते रह जाएंगे.

उन्हें आशा थी कि भाजपा को या कहें नरेंद्र मोदी को सरकार के गठन के लिए उनकी ज़रूरत पड़ेगी.

हाल ही में जयललिता की पार्टी के एक सहयोगी ने जब यह सुझाव दिया कि उनकी पार्टी मोदी को समर्थन के लिए तैयार है, तो जयललिता ने उन्हें पार्टी से बाहर निकाल दिया. ये उनकी हेकड़ी का ही एक नमूना था.

अगर देश में मोदी लहर थी, तो तमिलनाडु में जयललिता की लहर. राज्य में उनकी पार्टी खुद एक बड़ी शक्ति बनकर उभरी है और 39 में से 34 सीटें हासिल करने के कगार पर खड़ी है.

उम्मीद पर पानी

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अगर उन्हें यहीं नंबर मिले, तो एआईडीएमके देश की तीसरी सबसे बड़ी पार्टी बनकर सामने आ सकती है.

बीजू जनता दल को ओडिशा में उम्मीद के अनुसार भारी जीत मिल रही है. इसके बावजूद नवीन पटनायक भी हाथ मलते रह जाएंगे क्योंकि वे भी नरेंद्र मोदी का सहारा बनने की उम्मीद लगाए बैठे थे.

नतीजों के दौरान उन्होंने कहा कि एनडीए ने उनसे अब तक कोई संपर्क नहीं किया है.

नवीन पटनायक और जयललिता की तरह ममता बनर्जी को भी एक तरह से उम्मीद थी कि वो इस चुनाव में पश्चिम बंगाल में बड़ी राजनीतिक ताक़त बनकर उभरेंगी और मोदी सरकार को उनकी ज़रूरत पड़ेगी.

हालांकि उन्होंने आधिकारिक तौर पर हमेशा भाजपा से फ़ासला बनाए रखने पर ही ज़ोर दिया था.

ममता की पार्टी तृणमूल कांग्रेस ने अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया है, लेकिन इससे मोदी को कोई फ़र्क नहीं पड़ेगा.

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