'दलित चेहरा फैक्टर है, लेकिन और भी बातें हैं'

जीतनरा मांझी, नीतीश कुमार इमेज कॉपीरइट Shailendra Kumar

बिहार में नीतीश कुमार के इस्तीफ़े के बाद मुख्यमंत्री बन रहे जीतन राम मांझी इस सवाल पर बुरी तरह बिफर जाते हैं कि क्या उन्हें दलित होने की वजह से इस कुर्सी के लिए चुना गया है और क्या ऐसा करके जनता दल यूनाइटेड ने दलित कार्ड नहीं खेला है?

जीतन राम मांझी होंगे बिहार के नए मुख्यमंत्री

बीबीसी संवाददाता सुशीला सिंह से ख़ास बातचीत में जीतन राम मांझी ने कहा, ''दलित चेहरा एक फैक्टर है, लेकिन उसके साथ-साथ और भी बातें हैं. दलित में एक हमीं थे क्या यहां.''

मांझी कहते हैं, ''बहुत से दलित यहां थे लेकिन देखा गया कि राजनीति में नॉन-कंट्रोवर्सियल कौन है. ये भी देखा गया कि कौन पढ़ा-लिखा है, किसको कितना अनुभव है.''

सवाल रबर स्टैम्प का

क्या आपकी भूमिका रबर-स्टैम्प की तरह नहीं होगी, इस सवाल पर मांझी कहते हैं, ''कृपया ऐसी बात मत कहिए, ऐसा बोलकर लोग दलितों को गाली देते हैं. एक दलित होने का मतलब यह नहीं है कि वह रबर स्टैम्प हो गया.''

नीतीश को इस्तीफ़ा देकर क्या हासिल हुआ

मांझी 'रबर-स्टैम्प' वाली भूमिका की बात उठाने के लिए विपक्ष और मीडिया को ज़िम्मेदार ठहराते हैं.

जनता दल यूनाइटेड के वरिष्ठ नेता कहते हैं कि वर्ष 2015 के विधानसभा चुनाव नीतीश कुमार के नेतृत्व में लड़े जाएंगे.

आप मुख्यमंत्री हो रहे हैं तो अगला चुनाव आपके नेतृत्व में क्यों नहीं लड़ा जाएगा, इस सवाल पर मांझी कहते हैं, ''सरकार और संगठन में तालमेल है. संगठन हमेशा सुप्रीम रहता है. इसमें नेतृत्व की क्या बात है, नीतीश कुमार हमारे सर्वमान्य नेता हैं.''

मांझी का कहना है कि पार्टी उनका इस्तेमाल नहीं कर रही है बल्कि सेवा करने का मौका दे रही है.

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