मोदी के चुने जाने पर 'भावुक' जनता पार्टी

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नरेंद्र मोदी को मंगलवार को भाजपा संसदीय दल का नेता चुन लिया गया. नवनिर्वाचित सांसदों ने तालियाँ बजाकर और मेज थपथपाकर नरेंद्र मोदी का स्वागत किया.

लेकिन इस दौरान लालकृष्ण आडवाणी भावुक हो गए, तो अटल बिहारी वाजपेयी को याद करके नरेंद्र मोदी भी भावुक हो उठे.

संसद के केंद्रीय सभागार में आयोजित संसदीय दल की बैठक में नरेंद्र मोदी के नाम का प्रस्ताव पार्टी के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी ने किया.

अब नरेंद्र मोदी भाजपा संसदीय दल के नेता के रूप में राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी से मिलकर सरकार बनाने का औपचारिक रूप से दावा पेश करेंगे.

इसके बाद ही स्पष्ट हो पाएगा कि वे कब भारत के अगले प्रधानमंत्री के रूप में शपथ लेंगे. भाजपा संसदीय दल की बैठक के ठीक बाद आयोजित राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) की बैठक में भी नरेंद्र मोदी को राजग का प्रमुख चुना गया.

राजग की बैठक में भाजपा सदस्यों के साथ-साथ सहयोगी दलों के सांसद भी मौज़ूद थे. सबसे पहले अकाली दल के नेता प्रकाश सिंह बादल ने नरेंद्र मोदी का स्वागत किया. टीडीपी प्रमुख चंद्रबाबू नायडू औऱ लोजपा प्रमुख रामविलास पासवान ने भी मोदी का स्वागत किया

संविधान का महत्व

भाजपा सासंदों को संबोधित करते हुए आडवाणी ने संसद के केंद्रीय कक्ष और देश के संविधान का महत्व बताया.

संसद भवन में दाखिल होने से पहले नरेंद्र मोदी ने संसद की सीढियों पर घुटने टेककर प्रणाम किया इसके बाद वो संसद दाखिल हुए.

संसदीय दल का नेता चुने जाने के बाद उपस्थित सांसदों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि आज इस अवसर अटल जी स्वस्थ होते और यहां होते तो यह सोने पे सुहागा होता.

उन्होंने संसद को लोकतंत्र का मंदिर बताते हुए कहा, "हम यहां देश के 125 करोड़ लोगों की उम्मीदों और आकंक्षाओं को समेटे हुए बैठे हैं." उन्होंने कहा कि अब हमारी जिम्मेदारी का काल शुरू हो रहा है.

उन्होंने कहा कि यह पहली बार हो रहा है कि आजादी के बाद पैदा हुआ कोई व्यक्ति देश का प्रधानमंत्री बनेगा. नरेंद्र मोदी ने कहा कि उन्हें देश के लिए अत्याचार सहने का या जेल जाने का मौका नहीं मिला. लेकिन अब देश के लिए जीन के अवसर मिला है. उन्होंने कहा कि उनके जीवन का पल-पल और शरीर का कण-कण देश के लिए है.

मोदी ने कहा कि चुनाव प्रचार अभियान में हमने ' सबका साथ, सबका विकास' के नारे पर विशेष जोर दिया. लेकिन इसके लिए सबका साथ बहुत ज़रूरी है. इस अवसर पर उन्होंने कहा कि उनकी सरकार ग़रीबों के लिए समर्पित होगी.

उन्होंने कहा कि अब जब 2019 में मैं आपसे मिलूंगा तो आपको मैं अपने रिपोर्ट कार्ड के साथ मिलूंगा.

समर्थन

आडवाणी की ओर पेश प्रस्ताव का पार्टी के वरिष्ठ नेता मुरली मनोहर जोशी, वेंकैया नायडू, पूर्व अध्यक्ष नितिन गडकरी, सुषमा स्वराज, अरुण जेटली, करिया मुंडा, गोपीनाथ मुंडे, रविशंकर प्रसाद और मुख्तार अब्बास नकवी ने समर्थन किया.

नरेंद्र मोदी के संसदीय बोर्ड का अध्यक्ष चुने जाने के बाद सासंदों को संबोधित करते हुए पार्टी अध्यक्ष राजनाथ सिंह ने कहा कि इस चुनाव में भाजपा को मिली जीत ऐतिहासिक है.

उन्होंने बताया कि इस बार देश के 17.16 करोड़ मतदाताओं ने भाजपा को वोट दिया है. उन्होंने कहा कि पार्टी को देश के सभी वर्गों को प्रतिनिधित्व हासिल हुआ है.

उन्होंने बताया कि यह पहली बार हुआ है कि देश के दस राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की सभी सीटें जीती हैं.

उन्होंने कहा कि भाजपा की इस जीत के बाद दुनिया में भारत की प्रतिष्ठा बढ़ी है. उन्होंने कहा इस जीत के बाद हम देश में आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक परिवर्तन लाने में सक्षम होंगे.

मोदी ने ये भी कहा कि भाजपा उनकी मां के समान है और उन्होंने ज़िम्मेादारी संभालकर उसपर कृपा नहीं की है बल्कि पार्टी ने उन्हें प्रधानमंत्री की ज़िम्मेदारी निभाने के क़ाबिल समझा ये उनके लिए सम्मान की बात है.

उन्होंने ये बात आडवाणी के बयान पर दी थी.

आडवाणी हुए भावुक

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इस अवसर पर पार्टी के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी ने कहा कि इंसान के जीवन में कुछ पल ऐसे आते हैं, जिन्हें वह जीवनभर याद रखता है.

उन्होंने कहा कि उनके जीवन में ऐसे दो अवसर आए, पहला जब 1947 में भारत आजाद हुआ और दूसरा वह समय जब देश में आपातकाल लगा. उन्होंने कहा कि यह ऐसा तीसरा अवसर हैं जब नरेंद्र मोदी देश के प्रधानमंत्री बनने जा रहे हैं.

उन्होंने कहा कि ऐसे अवसरों पर मैं भावुक हो जाता हूं और मेरे आंख से आंसू निकल आते हैं. आज मैं एक बार फिर भावुक हो गया और मेरी आंखों से आंसू निकल आए हैं. उन्होंने कहा कि इससे पहले आजादी के समय और इमरजेंसी के समय आंसू निकले थे.

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