ये निकालेंगे बिहार को मँझधार से

नीतीश कुमार और जीतन राम मांझी इमेज कॉपीरइट Shailendra Kumar

सोलह मई को जब लोकसभा चुनाव की हुई मतगणना में जीतन मांझी गया सीट से तीसरे नंबर पर रहे थे तो शायद उनके ज़ेहन में दूर दूर तक ये ख़्याल न आया होगा कि वो बिहार के मुख्यमंत्री की कुर्सी पर विराजमान हो सकते हैं.

जीतन मांझी बिहार के गया लोकसभा क्षेत्र से जनता दल (यूनाइटेड) के उम्मीदवार थे. वहां भारतीय जनता पार्टी के हरि मांझी की जीत हुई थी.

राष्ट्रीय जनता दल का उम्मीदवार दूसरे नंबर पर रहा था. जीतन राम मांझी को तीसरे स्थान से संतोष करना पड़ा था. बिहार में जनता दल यू को 40 में से सिर्फ़ दो सीटें ही हासिल हो सकीं.

लेकिन लोकसभा चुनाव के नतीजे आने के ठीक तीन दिन बाद नीतीश कुमार ने जीतन राम मांझी को अपना उत्ताराधिकारी चुनकर उन्हें मुख्यमंत्री की कुर्सी सौंप दी.

जीतन राम मांझी गया ज़िले के महकर गांव के निवासी हैं. ये समुदाय बहुत ही ग़रीब है और अभी भी अधिकांश लोगों की ज़िंदगी मेहनत-मज़दूरी करते गुज़रती है. ग़रीबी की स्थिति ये है कि काफ़ी लोग चूहे पकड़कर उसे खाने के लिए मजबूर हैं.

मांझी अति दलित मुसहर जाति से आते हैं. वो अभी जहानाबाद ज़िले के मकदमपुर विधानसभा क्षेत्र से विधायक हैं.

राजनीतिक सफ़र

लेकिन वो राजनीति में लंबे समय से सक्रिय हैं और 1980 के बाद से सूबे की हर सरकार में मंत्री के पद पर बने रहे हैं.

मांझी पहली बार 1980 में विधायक चुने गए थे. साल 2005 में जदयू में शामिल होने से पहले वो कांग्रेस और राजद की सरकारों में मंत्री रह चुके थे.

पहली बार वो 1980 में सूबे की चंद्रशेखर सिंह के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार में मंत्री बनाए गए थे. उसके बाद वो प्रदेश में बनी हर सरकार में मंत्री बने. चाहे वह कांग्रेस नेता बिंदेश्वरी दुबे की सरकार हो या राजद नेता लालू प्रसाद की सरकार. सरकारें आते-जी रहीं, मुख्यमंत्री बदलते रहे लेकिन जीतन राम मांझी का मंत्री पद बना रहा.

नीतीश कुमार की सरकार वो अनुसूचित जाति, जनजाति, पिछड़ा वर्ग और अति पिछड़ा वर्ग कल्याण मंत्री थे.

वो 1990 में राजद में शामिल हुए थे. राजद सरकार में उन्हें मानव संसाधन विकास मंत्री बनाया गया था. लेकिन शिक्षा विभाग में हुए एक घोटाल में नाम आने के बाद जीतन राम को मंत्री पद छोड़ना पड़ा था. इसके बाद वो 2005 में जदयू में शामिल हो गए.

अक्तूबर 2005 में हुए विधानसभा चुनाव में जीतन राम बाराचट्टी विधानसभा सीट से विधायक चुने गए. लेकिन 1990 के फर्जी बीएड डिग्री मामला आया और फिर मामला दर्ज होने के बाद उन्हें तत्काल इस्तीफ़ा देने के लिए कहा गया. साल 2008 में घोटाले के आरोपों से बरी होने के बाद उन्हें मंत्रीमंडल में शामिल किया गया.

नीतीश का दांव

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साल 2008 में आए खाद्य संकट के समय मांझी ने लोगों से चूहा खाने की वकालत की क्योंकि वो खाद्यान को नुक़सान पहुँचाते हैं. उनका कहना था कि चूहे और मुर्गे में एक समान पोषण तत्व पाए जाते हैं.

मांझी को नीतीश कुमार का विश्वस्त माना जाता है. जदयू ने लोकसभा चुनाव नीतीश के नेतृत्व में लड़ा था. लेकिन चुनाव में पार्टी के ख़राब प्रदर्शन की ज़िम्मेदारी लेते हुए नीतीश कुमार ने शनिवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया था.

मीडिया के कुछ हल्कों में जीतन राम मांझी को कठपुतली मुख्यमंत्री बताया जा रहा है. लेकिन मांझी इसके लिए विपक्ष और मीडिया को ज़िम्मेदार बताते हैं. उनका कहना है कि पार्टी उनका इस्तेमाल नहीं कर रही है बल्कि उन्हें सेवा का मौका दे रही है.

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