ये होंगे नवीन पटनायक की राह के रोड़े

इमेज कॉपीरइट BJD

बीजू जनता दल (बीजद) के अध्यक्ष नवीन पटनायक ने बुधवार को लगातार चौथी बार ओडिशा के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ग्रहण कर राज्य के राजनीतिक इतिहास में सबसे लम्बे अर्से तक मुख्यमंत्री बनने का एक नया कीर्तिमान बनाया है.

राज्य में हाल ही में समाप्त हुए विधानसभा और लोकसभा चुनाव के परिणाम से यह स्पष्ट हो गया की लगातार तीन बार सत्ता में रहने के बावजूद नवीन पटनायक की लोकप्रियता कम होने के बजाए और बढ़ गयी है.

सन 2001 के चुनाव में 147 सदस्यों की विधानसभा में 103 सीटें जीतने वाली बीजद ने इस बार 'एंटी-इन्कम्बेंसी' की धज्जियाँ उड़ाते हुए 117 सीटें हासिल की हैं. इसी तरह लोकसभा चुनाव में राज्य के 21 में से 20 सीटें हासिल कर पार्टी ने एक नया कीर्तिमान बनाया है. इससे पहले किसी भी गैर कांग्रेसी पार्टी ने राज्य में लोकसभा चुनाव में 20 सीटें नहीं जीती थी.

लेकिन इस भारी जनादेश के बावजूद ऐसा कतई नहीं है कि नवीन की अगली पारी फूलों की सेज होगी. राज्य के दोनों प्रमुख विरोधी दलों - कांग्रेस और भाजपा - की ओर से उनकी सरकार को भले ही कोई ख़तरा न हो लेकिन अपने चौथे शासन काल में उनके लिए चुनौतियों की कोई कमी नहीं है.

हालाँकि इतना ज़रूर है की यह चुनौतियाँ कांग्रेस या भाजपा की ओर से नहीं, बल्कि किसी और दिशा से आ रही हैं.

चुनौती

फिलहाल नवीन सरकार के लिए सबसे बड़ी चुनौती है राज्य में हुए हज़ारों करोड़ रुपए के चिट फंड घोटाले में सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर शुरू हुई सीबीआई की जांच.

इमेज कॉपीरइट AFP
Image caption पटनायक ने ओडिशा में सबसे लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहने का रिकॉर्ड बनाया

कोर्ट के आदेशानुसार सीबीआई न केवल घोटाले में शामिल कंपनियों की, बल्कि इसके 'वृहत्तर षड्यंत्र' ('लार्जर कांस्पिरेसी') पहलू की भी जांच करेगी, जिसमें सत्तारूढ़ पार्टी के कई दिग्गज नेताओं के नाम आना तय है.

नयी सरकार के शपथ ग्रहण के एक दिन पहले ही सीबीआई के ज्वाइंट डायरेक्टर ने ओडिशा के मुख्य शासन सचिव जुगल किशोर महापात्र, पुलिस महानिदेशक प्रकाश मिश्र और क्राइम ब्रांच के अतिरिक्त महानिदेशक बिजय शर्मा से भेंट की और चिट फंड घोटाले के बारे में विस्तृत जानकारी ली.

ये और बात है कि चुनाव के दौरान चिट फंड घोटाले पर नवीन पटनायक सरकार पर विपक्ष के वार को लोगों ने अहमियत नहीं दी लेकिन अभी तक सामने आए तथ्यों के आधार पर इतना ज़रूर कहा जा सकता है कि सीबीआई की जांच से उनकी पार्टी और सरकार बेदाग निकल जाएँगी, इसके आसार कम ही नज़र आ रहे हैं.

नवीन सरकार के लिए चिट फंड घोटाले से भी बड़ी चुनौती है ओडिशा में हुए 60,000 करोड़ रुपए के खान घोटाले में भी सुप्रीम कोर्ट द्वारा सीबीआई जांच के आदेश की सम्भावना.

खान घोटाला

अगर सचमुच ऐसा हुआ तो जांच नवीन पटनायक के दरवाज़ों तक पहुंचेगी क्योंकि अपनी रिपोर्ट में जस्टिस एम बी शाह ने यह साफ़ कहा है कि लगभग 10 साल तक ओडिशा की खानों से लोहे के पत्थर की चोरी सरकार की पूरी जानकारी से हुई.

मामले की सुनवाई पूरी हो चुकी है और कोर्ट ने अपना फ़ैसला सुरक्षित रखा है. सुनवाई के दौरान सीबीआई जांच से बचने के लिए नवीन सरकार ने एड़ी चोटी एक कर दी. देश के सबसे महंगे वकील नियुक्त किए लेकिन इन सारी कोशिशों के बावजूद चिट फंड घोटाले की तरह खान घोटाले में भी सीबीआई जांच के आदेश की पूरी सम्भावना है.

इसी तरह कोयला घोटाले में चल रही सीबीआई जांच में भी नवीन पटनायक का नाम आ चुका है. ग़ौरतलब है कि आदित्य बिरला ग्रुप को ओडिशा के तालाबीरा- दो कोयला खान का आवंटन किया गया था.

इसे पहले सरकारी उपक्रम नेयवेली लिग्नाइट कारपोरेशन (एनएलसी ) को दिया गया था लेकिन फिर इसे एनएलसी से वापस लेकर आदित्य बिरला ग्रुप को दिए जाने के लिए नवीन ने 2005 में केंद्र सरकार से तगड़ी पैरवी की थी.

इस मामले में सीबीआई आदित्य बिरला ग्रुप और पूर्व कोयला सचिव पी सी पारख के ख़िलाफ़ मामला दर्ज़ कर उनसे पूछताछ भी कर चुकी है.

चुप्पी

डेढ़ महीने पहले सीबीआई निदेशक रंजीत सिन्हा ने भुवनेश्वर में मुख्यमंत्री नवीन पटनायक से बातचीत की. हालांकि बातचीत किस बारे में हुई इस पर दोनों पक्षों ने चुप्पी साध रखी है लेकिन माना यह जा रहा है कि मुख्य रूप से कोयला घोटाले पर ही बात हुई.

इन सभी घोटालों में नवीन के ऊपर मंडरा रहे ख़तरे के बादलों के कारण नवीन पटनायक के लिए नरेंद्र मोदी सरकार का प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से समर्थ करने के सिवा कोई चारा नहीं बचा है.

चुनाव प्रचार के दौरान मोदी की कड़ी आलोचना कर रहे नवीन पटनायक के तेवर अब पूरे बदले हुए नज़र आ रहे हैं. कल तक कांग्रेस और भाजपा दोनों से 'समान दूरी" रखने की बात करने वाली बीजद अब केंद्र सरकार को समर्थन देने के बहाने ढूंढ रही है.

चुनाव परिणाम आने से पहले ही बीजद ने एनडीए सरकार को 'शर्तिया समर्थन' देने की बात छेड़ दी थी.

पार्टी यह मान कर चल रही थी एनडीए को स्पष्ट बहुमत नहीं मिलेगा और ऐसी स्थिति में बीजद को मोलभाव करने का पर्याप्त मौका मिलेगा लेकिन चुनाव परिणाम आने के बाद यह योजना धरी की धरी रह गयीं. भाजपा और मोदी को पूर्ण बहुमत मिल गया.

अनौपचारिक मोर्चा

बदली हुई परिस्थितियों में बीजद अब एआईएडीएमके और तृणमूल कांग्रेस के साथ मिलकर एक अनौपचारिक मोर्चा बनाने की तैयारी में जुट गयी है जो संसद में एक 'प्रेशर ग्रुप' के रूप में काम करेगी. ग़ौरतलब है कि ये तीनों मुख्यमंत्री सीबीआई जांच का सामना कर रहे हैं और तीनों को केंद्र सरकार की 'मदद' की ज़रुरत है.

इमेज कॉपीरइट PTI
Image caption हाल में सीबीआई के निदेशक नवीन पटनायक से मिले थे

मोदी सरकार को मुद्दों पर समर्थन देने के लिए बीजद और नवीन भले ही राज्य के स्वार्थों की दुहाई दें लेकिन सचाई यह है कि यह समर्थन देकर बचने की ही कोशिश हैं.

हालाँकि यह ज़रूरी नहीं की केंद्र सरकार के समर्थन मिलने पर बीजद के नेता आरोपों से बरी हो जाएंगे. अगर इन मामलों की जांच सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में होती है तो मोदी सरकार चाहे भी तो नवीन सरकार को सुरक्षा नहीं दे सकती.

मोदी सरकार अगर नवीन को इन मामलों में सहायता देगी तो ज़ाहिर है कि क़ीमत भी लेगी और ओडिशा में कांग्रेस की जगह भाजपा दूसरी सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरने की कोशिश करेगी.

इस चुनाव में कांग्रेस का जनाधार कम हुआ है, जबकि भाजपा के प्रति समर्थन में बढ़ोतरी हुई है. लेकिन सवाल यह है कि क्या नवीन ऐसा होने देंगे?

(बीबीसी हिंदी का एंड्रॉयड मोबाइल ऐप डाउनलोड करने के लिए यहां क्लिक करें. आप हमारे फ़ेसबुक पन्ने पर भी आ सकते हैं और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

संबंधित समाचार