'सुना! उनकी लड़की का रेप हो गया'

  • 23 मई 2014
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दिल्ली मेट्रो में कोई अचानक किसी लड़की के बलात्कार की ख़बर आपको सुनाए तो आप क्या कहेंगे. मुमकिन है चौंकेंगे, हैरान होंगे और जानना चाहेंगे कि ये हादसा अब किसके साथ हुआ.

मगर यह ख़बर एक तरीक़ा है सार्वजनिक जगहों पर आम लोगों को महिलाओं की सुरक्षा के प्रति जागरूक बनाने का, ताकि यौन हिंसा को लोग एक ख़बर समझकर भूल न जाएं.

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तरीका बेढब है लेकिन दिल्ली में कुछ नौजवान मेट्रो-रेल, स्कूल-कॉलेज, झुग्गी बस्तियों, मॉल और बाज़ारों में जाकर फ्रीज़ मॉब के ज़रिए लोगों को जागरूक बना रहे हैं.

भीड़ में घुल-मिलकर ये लोग अचानक स्थिर हो जाते हैं और हर किसी की नज़र इन पर टिक जाती है.

इन नौजवानों के हाथों में मौजूद पोस्टर और तख्तियां महिलाओं के प्रति समाज के नज़रिए को बयां करते हैं और लोगों को सोचने पर मजबूर करते हैं.

दिल्ली विश्वविद्यालय के कुछ छात्रों ने मिलकर एजुकेशन ट्री के नाम से एक ग्रुप बनाया और फेसबुक के ज़रिए छात्र इससे जुड़ने लगे.

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इस ग्रुप का मक़सद नए से नए तरीकों से सार्वजनिक जगहों पर आम लोगों को यौन हिंसा, महिलाओँ के अधिकार, बाल श्रम जैसे मुद्दों पर बातचीत के लिए उकसाना है.

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दिल्ली कॉलेज ऑफ़ इंजीनियरिंग के छात्र पारस अब तक इस तरह कई आयोजनों में हिस्सा ले चुके हैं. वो कहते हैं, ''जब हम अचानक फ्रीज़ हो जाते हैं, तो लोग रुकते हैं, हमारे पास आते हैं और पोस्टर पढ़ते हैं. एक बार एक व्यक्ति ने मुझसे कहा कि लड़कियों के तौर-तरीके भी तो देखो, लेकिन इससे पहले कि मैं कुछ कहता वहां मौजूद दूसरे लोग उसके साथ बातचीत में जुट गए और उसे समझाने लगे. यही तो हम चाहते हैं.''

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कृति सिंघल इस ग्रुप की उस कोशिश से भी जुड़ी रही हैं, जिनमें दिल्ली मेट्रो को निशाना बनाकर ट्रेन के भीतर नाटक किए जाते हैं, ''सुना! उनकी लड़की का रेप हो गया..' इस तरह के किसी वाक्य से हम शुरुआत करते हैं, लोग चौंकते हैं और जानने कि कोशिश करते हैं कि फ़लाने साहब कौन हैं और हम किसकी बात कर रहे हैं, फिर नाटक शुरू होता है और हर स्टेशन पर एक नया किरदार जुड़ता जाता है. इस नाटक के ज़रिए हम बलात्कार की शिकार लड़की और उसके साथ होने वाले व्यवहार पर लोगों का ध्यान खींचते हैं. धीरे-धीरे पूरा डिब्बा हमारे साथ जुड़ जाता है.''

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'ऐजुकेशन ट्री' के साथ जुड़ी छात्राओं के मुताबिक़ कई बार ऐसा भी हुआ है जब फ्रीज़ होने के दौरान आसपास से गुज़ रहे लड़कों ने उन पर फब्तियां कसीं. ऐसा होने पर वो खुद उन्हें रोकती हैं और उन्हें बताती हैं इस पूरी कार्रवाई का मक़सद उन जैसे लोगों को लड़कियों का पक्ष दिखाना है.

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'ऐजुकेशन ट्री' के साथ ज़्यादा से ज़्यादा छात्र सोशल मीडिया और एक-दूसरे की जानकारी के ज़रिए जुड़ रहे हैं. छात्रों को आम लोगों से बातचीत और उन्हें जागरूक बनाने के ये नए तरीक़े बेहद पसंद आते हैं.

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'ऐजुकेशन ट्री' के साथ जुड़े ज़्यादातर छात्र वॉलंटियर हैं, जो समाज के लिए कुछ करने और इन मुद्दों पर हर किसी को साथ जोड़ने की इच्छा से एक साथ आए हैं. 'ऐजुकेशन ट्री' को शुरू करने वाले छात्रों में से एक कुनाल अरोड़ा कहते हैं, ''पढ़ाई-लिखाई का मक़सद सिर्फ़ एक ड्रिग्री नहीं और यही वजह है कि हमें लगा कि स्कूल-कॉलेज के कोर्स 'एजुकेशन' का सही मक़सद पूरा नहीं करते. इसलिए हम नाटक, डांस, पोस्टर जैसे कला माध्यमों और समाज को शिक्षा और छात्रों के साथ जोड़ना चाहते हैं.''

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'ऐजुकेशन ट्री' जल्द ही दिल्ली सहित बाक़ी इलाकों में भी इस तरह की कोशिशें शुरू करना चाहता है.

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