मोदी लहर नहीं, अफ़वाहों की सुनामी थी: लालू

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बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव का कहना है कि बीजेपी का उन्माद रोकने के लिए सभी धर्मनिरपेक्ष ताक़तों को साथ आना होगा.

बीबीसी के साथ बातचीत में उनका कहना था कि देश में मोदी की लहर नहीं, अफ़वाहों की सुनामी थी. पढ़िए इस बातचीत के अंश.

जनता दल (यू) के साथ गठबंधन की वजह क्या है? क्या ये अवसरवादिता नहीं?

इस बार के चुनावों में भारतीय जनता पार्टी ने ग़रीबों, पिछड़ों के मतों का पूरी तरह सांप्रदायिक ध्रुवीकरण किया है. ऐसा नहीं कि हमें वोट नहीं पड़े. हमारे वोट बढ़े हैं, लेकिन वे सीटों में नहीं बदल पाए. हमारे गठबंधन को एक करोड़ छह लाख वोट मिले हैं, लेकिन सीटें सिर्फ़ सात आ पाईं.

भारतीय जनता पार्टी ने पूरे देश में जिस तरह काम किया, वैसा करने के लिए हमारे पास संगठन भी नहीं है. बिहार में मेरा 'वन मैन शो' था. फिर भी हमने इन्हें बहुत रोका है. इन्हें हमसे सिर्फ़ 33 लाख वोट ज़्यादा मिले हैं.

लालू यादव के साथ बीबीसी की विशेष बातचीत सुनिए

नीतीश भी उनके साथ थे और हमने उन पर भी हमले किए थे, लेकिन अब बिहार में परिस्थितियां बदली हैं. नीतीश के इस्तीफ़ा देने के बाद मांझी मुख्यमंत्री बने हैं, जो महादलित परिवार से आते हैं. हमने पहले भी इन लोगों का साथ दिया है.

उधर, जीत के बाद बीजेपी पर उन्माद सवार है. वह सबको हटा देना चाहती है, बिहार में सत्ता पर कब्ज़ा करना चाहती है तो बीजेपी के हाथ में सत्ता न जाने देना हमारा कर्तव्य है. इसलिए धर्मनिरपेक्ष ताक़तों को मज़बूत करने के लिए हमने बिना शर्त मांझी सरकार को समर्थन दिया है.

क्या जेडीयू सरकार गिरने की आशंका थी?

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देखिए, कई लोग इसके लिए लगे हैं, प्रलोभन दे रहे हैं. सरकार दिखने में मज़बूत लगती है लेकिन है नहीं. इसलिए समर्थन दिया है हमने.

भविष्य में क्या कुछ नए गठजोड़ देखने को मिल सकते हैं?

हमने तो 16 तारीख को ही अपील की थी सामाजिक न्याय और सांप्रदायिक सौहार्द बचाने के लिए मंडल समर्थक, पिछड़ी जातियां, दलित, महादलित, अल्पसंख्यक सभी शक्तियों को इकट्ठा होना पड़ेगा.

मायावती जैसी नेता को एक भी सीट नहीं मिली. उत्तर प्रदेश में हम लोगों को सबसे ज़्यादा नुक़सान हुआ है.

अब इस नई सरकार ने लोगों को जो सब्ज़बाग़ दिखाए हैं. उन्हें पूरा करके दिखाना चाहिए. यह देश ज़्यादा देर तक इंतज़ार नहीं करता.

राष्ट्रीय स्तर पर क्या तस्वीर देखते हैं आप?

राष्ट्रीय स्तर पर कांग्रेस समेत अन्य सब पार्टियों को विचार करके आगे की रणनीति तैयार करनी चाहिए.

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नीतीश कुमार ने कहा था कि इस कदर सांप्रदायिक ध्रुवीकरण उन्होंने कभी नहीं देखा, क्या आप सहमत हैं?

हां, बिल्कुल सही बात है. सबसे ज़्यादा सभा मैंने की हैं. इनमें भारी भीड़ जुटी, लेकिन आरएसएस वालों ने जो रातों-रात ज़मीनी स्तर पर काम किया, उसका ख़मियाज़ा भुगतना पड़ा सबको. अब पछता रहे हैं सब.

इसके अलावा कोई और ऐसी कमी आपको लगी जिसमें सुधार की गुंजाइश है?

हां, संगठन हमारा कमज़ोर है. संसाधन की ज़रूरत होती है. चुनाव में सबको गाड़ी, तेल चाहिए, इसमें हम मात खा जाते हैं.

संगठन में बदलाव करेंगे और उसको मजबूती देंगे. इसके लिए पांच जून को हमने पूरे बिहार के कार्यकर्ताओं की रैली बुलाई है, जिसमें हम आगे की रणनीति पर विचार करेंगे.

एक आरोप यह लगा कि आपने टिकट बंटवारे में परिवार को बढ़ावा दिया है.

यह सब तो आरोप हैं. तीन लाख 67 हज़ार वोट मिले हैं बेटी को और बीवी को भी. यह कोई मुद्दा नहीं है. जब कोई मुद्दा नहीं मिलता, तो ये बातें उठाई जाती हैं.

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इस बार के चुनाव में आपका व्यक्तित्व कुछ बदला-बदला लगा. वह हंसी-मज़ाक का अंदाज़ गायब हो गया, कुछ गंभीरता आ गई है.

गंभीरता ज़रूरी है अब. बीच-बीच में हम बातों को सहज ढंग से रखते थे, लेकिन 45 डिग्री तापमान और उसमें एक हेलिकॉप्टर से सात-सात जगह जाना...इससे संवाद करने में तो कमी आई है.

चुनाव पूर्व आकलनों में कहा जा रहा था कि आपको 20 से ज़्यादा सीटें मिलेंगी.

हां, हमें खुद भी ऐसे परिणाम की उम्मीद नहीं थी. अंधड़ आया, चला गया अंधड़. अब इसके बाद ही देखा जाएगा कि कौन टूटा-फूटा, कौन सा घर ध्वस्त हुआ. सुनामी थी एक तरह की- अफ़वाह की सुनामी.

ममता बनर्जी ने कहा है कि उनके सांसद नरेंद्र मोदी के शपथ ग्रहण समारोह में नहीं जाएंगे. क्या आपके सांसद जाएंगे.

देखिए, हम तो किसी को नहीं रोकेंगे. जो जाना चाहेगा जाएगा.

आप और नीतीश एक मंच पर कब दिखेंगे?

देखिए, क्या होता है आगे. राजनीतिक पार्टियां हैं- सोचेंगे, देखेंगे भविष्य में कब क्या करना है.

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