'पहले रेलवे की आर्थिक सेहत दुरुस्त करेंगे'

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उत्तर प्रदेश के ग़ाज़ीपुर संसदीय क्षेत्र से भारतीय जनता पार्टी के सांसद मनोज सिन्हा को नरेंद्र मोदी की सरकार में रेल राज्य मंत्री का कार्यभार मिला है.

उन्होंने अपना पद संभाला ही था कि उत्तर प्रदेश में गोरखधाम एक्सप्रेस ट्रेन दुर्घटनाग्रस्त हो गई.

मंगलवार को कैबिनेट की बैठक के बाद रवि शंकर प्रसाद ने बताया कि इस हादसे का जायज़ा लेने के लिए रेल राज्य मंत्री मनोज सिन्हा को मौके पर भेजा गया था. केन्द्र ने पीड़ितों के लिए मुहावज़े की भी घोषणा की.

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मंगलवार को बीबीसी के साथ बातचीत में रेल राज्य मंत्री मनोज सिन्हा ने बताया, "दुर्घटनास्थल का मुआयना करने के लिए मैं मौके पर गया था. हॉस्पीटल में घायलों से भी मिला. मैंने जनरल मैनेजर, गोरखपुर को निर्देश दिया है कि राहत बचाव कार्य समाप्त होने तक वे मौके पर ही बने रहें.''

उन्होंने कहा, "रेलवे के सारे वरिष्ठ अधिकारी भी मौके पर बने हुए हैं. अब तक की सूचना के अनुसार, 26 लोगों की मौत हुई है. एक घायल की स्थिति नाज़ुक है, लेकिन वो ख़तरे से बाहर है. ये अत्यंत हृदय विदारक दृश्य था."

'बिना पैसे सुरक्षा भी नहीं'

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सोमवार को उत्तर प्रदेश में पटरी में दरार के चलते खलीलाबाद के पास गोरखधाम एक्सप्रेस के चार सामान्य डिब्बे, एक एसएलआर और एक एसी कोच पटरी से उतर गए थे. इसके बाद ट्रेन स्टेशन पर खड़ी मालगाड़ी से टकरा गई.

हादसे की जांच के लिए समिति के गठन के सवाल पर बीबीसी को उन्होंने कहा, "डॉयरेक्टर रेलवे सेफ़्टी को जांच के निर्देश दे दिए गए हैं. ये एक स्वतंत्र संस्था है जो सिविल एविएशन मंत्रालय के अंतर्गत आती है. जांच समिति को एक महीने के अंदर रिपोर्ट तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं."

उन्होंने कहा,"ये सरकार किसी दोषी को बचाने के पक्ष में नहीं है. निश्चित रूप से जो दोषी होंगे उनपर कड़ी कार्रवाई की जाएगी."

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मनोज सिंहा ने बताया कि रेल मंत्री और उन्होंने रेलवे के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ इस मामले को लेकर बैठक की है.

रेलवे की सुरक्षा हमेशा एक बडा मुद्दा है, लेकिन इसके अलावा रेल राज्य मंत्री के तौर पर उनकी क्या प्राथमिकता होगी, इसपर उन्होंने कहा कि रेलवे की आर्थिक स्थिति सुधारने पर उनका जोर होगा.

उन्होंने कहा, "पिछले कई महीनों से रेलवे की आर्थिक सेहत ठीक नहीं है. मेरी पहली प्राथमिकता होगी रेलवे की आर्थिक सेहत को ठीक करना. बिना उसके न रेलवे की सुरक्षा हो सकती है और न लंबे समय से रुकी परियोजनाएं पूरी हो सकती हैं."

उन्होंने कहा, "नए कामों को भी हाथ में तभी लिया जा सकता है जब पैसा होगा. आज हमने रेलवे बोर्ड के वरिष्ठ अधिकारियों को निर्देश दिया है की वे रेलवे की क्या स्थिति है, इसपर एक रिपोर्ट दें, जिससे हम प्रधानमंत्री से बातचीत कर आगे की कार्यवाही तय कर सकें."

'पूरे देश की जिम्मेदारी'

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अक्सर पूर्वांचल के लोगों की एक ख़ास समस्या होती है कि ट्रेन कितनी भी हो जाए, भीड़ कम नहीं होती है, टिकट समय पर नहीं मिलता, तो क्या वे उत्तर प्रदेश और बिहार के लोगों के लिए कुछ सोच रहे हैं?

इस सवाल पर मनोज सिन्हा ने कहा, "रेल पूरे हिन्दुस्तान की लाइफलाइन है. रेल राज्य मंत्री होने के नाते पूरे देश भर की रेलवे की ज़िम्मदारी मेरे उपर है, लेकिन पूर्वी उत्तर प्रदेश में निश्चित रूप से कुछ आवश्यकताएं हैं, जिनपर प्राथमिकताओं के आधार पर आगे आने वाले समय में हम ज़रूर ध्यान देंगे."

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नई सरकार में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मंत्रिमंडल में काफ़ी नए चेहरे हैं, लेकिन साथ ही ये भी कहा जा रहा है कि मंत्री युवा तो हैं, लेकिन कम अनुभवी हैं.

इस सवाल पर उन्होंने बीबीसी से कहा, "मैं ऐसा नहीं मानता कि मंत्री कम अनुभवी हैं. ख़ासतौर से अगर मैं अपने बारे में सोचूं तो मैं तीसरी बार लोकसभा में हूं. मैंने इंजीनियरिंग की पढ़ाई की है इसलिए, चीजों की मुझे पूरी जानकारी है. मुझे नहीं लगता था कि अगर कोई काम लगन से करें तो वो पूरा नहीं किया जा सकता."

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