ईरानी अख़बारों को क्यों अपनी लगती हैं स्मृति

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स्मृति ईरानी का मोदी सरकार के मंत्रिमंडल में शामिल होना भले ही ईरानी समाचार पत्रों के लिए कोई बड़ी ख़बर न हो, लेकिन स्मृति के नाम में ईरानी शब्द के कारण यह ख़बर ईरानी समाचार पत्रों के मुख्य पृष्ठ पर सुर्खी बनी.

एक अख़बार का शीर्षक है - ''भारतीय सरकार में एक ईरानी महिला शामिल.''

'आरमान डेली' के अनुसार, ''38 साल की स्मृति ईरानी राष्ट्रवादी भारतीय जनता पार्टी की सबसे कम उम्र की नेता (मंत्री) हैं."

अख़बार के मुताबिक़, "हाल में संपन्न हुए चुनावों में वह कांग्रेस के उपाध्यक्ष राहुल गांधी से हार गईं, लेकिन भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें महत्वपूर्ण विभाग उच्च शिक्षा और मानव संसधान मंत्री का पद दिया है.''

अख़बार ने लिखा है कि स्मृति ईरानी के पति ज़ुबिन ईरानी पारसी मूल के भारतीय नागरिक हैं.

कई ईरानी समाचार वेबसाइटों पर भी इसी तरह की ख़बरें देखने को मिल सकती हैं, जिसे ईरानी सोशल मीडिया में ख़ूब शेयर किया जा रहा है.

निष्पक्ष चुनावों की तारीफ़

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ईरानी मीडिया में भारतीय चुनाव प्रक्रिया को 'अभूतपूर्व' और 'अनुकरणीय' जैसे विशेषणों से परिभाषित किया जाता रहा है.

भारत में ईरानी राजदूत ने भारत के आम चुनावों को दुनिया के सबसे बड़े 'लोकतंत्र का जश्न' बताया.

उन्होंने कहा कि भारतीय समाज की विविधता और लोकतंत्र में अटूट विश्वास एवं भारतीय चुनाव आयोग की निष्पक्ष कार्यशैली के कारण ही इस देश में शांतिपूर्वक चुनाव संपन्न हुआ और सत्ता का हस्तांतरण हुआ.

एक ओर जहां बहुत से इस्लामी देशों के मीडिया में भारतीय जनता पार्टी को 'अल्ट्रा हिंदू', 'दक्षिणपंथी' और 'मुस्लिम विरोधी' पार्टी कहा गया वहीं ईरानी मीडिया ने शायद ही कभी भारतीय जनता पार्टी को हिंदुवादी झुकाव रखने वाले दल के रूप में परिभाषित किया हो.

वहां का मीडिया भारतीय जनता पार्टी को नेशनलिस्ट पार्टी के रूप में परिभाषित करता है.

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