ऑपरेशन ब्लू स्टार: कुछ अहम तारीखें

  • 6 जून 2014
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भारत की आज़ादी के बाद के इतिहास की चर्चा शायद ही कभी ऑपरेशन ब्लू स्टार का ज़िक्र किए बिना पूरी हो.

ऑपरेशन ब्लू स्टार के पीछे जो बातें सबसे अहम रहीं, उनमें पंजाब की स्वायत्तता का सवाल और सिखों के धार्मिक अधिकारों के कारण उनकी भावनाओं का उग्र होकर सामने आना मूल कारण रहा.

इसकी कुछ अहम तारीखों को देखें तो हम ऑपरेशन ब्लू स्टार के क्रम को आसानी से समझ पाएंगे.

वर्ष 1973- आनंदपुर साहिब प्रस्ताव पारित. प्रस्ताव में केंद्र को विदेश मामलों, मुद्रा, रक्षा और संचार सहित केवल पाँच दायित्व अपने पास रखते हुए बाकी के अधिकार राज्य को देने और पंजाब को एक स्वायत्त राज्य के रूप में स्वीकारने संबंधी बातें कही गईं थीं.

वर्ष 1977- जरनैल सिंह भिंडरावाले सिखों की धार्मिक प्रचार की प्रमुख शाखा, दमदमी टकसाल के प्रमुख चुने गए और अमृत प्रचार अभियान की शुरुआत की.

अप्रैल, 1978- अखंड कीर्तनी जत्थे, दमदमी टकसाल और निरंकारी सिखों के बीच अमृतसर में संघर्ष, 13 सिखों की मौत.

जून, 1978- अकाल तख़्त साहिब ने सिखों के संत निरंकारी पंथ के ख़िलाफ़ हुक़्मनामा जारी किया.

अक्टूबर, 1978- लुधियाना में 18वीं अखिल भारतीय अकाली सम्मेलन का आयोजन जिसमें अनंदपुर साहिब प्रस्ताव पर एक लचीला रुख अपनाते हुए दूसरा प्रस्ताव पारित किया गया.

सितंबर, 1979- अकाली दल का दो धड़ों में विभाजन, पहले धड़े का नेतृत्व हरचंद सिंह लोंगवाल और प्रकाश सिंह बादल संभालते हैं जबकि दूसरे धड़े का नेतृत्व जगदेव सिंह तलवंडी और तत्कालीन एसजीपीसी अध्यक्ष गुरचरण सिंह तोहड़ा के हाथ में.

अप्रैल, 1980- निरंकारी पंथ के प्रमुख गुरबचन सिंह पर छठा जानलेवा हमला, उस समय वे दिल्ली स्थित अपने मुख्यालय आ रहे थे. इस हमले में उनकी मौत हो गई थी.

खालिस्तान का परचम

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Image caption केंद्र सरकार और शिरोमणि अकाली दल के बीच तीन दौर की बातचीत हुई लेकिन अंततः कोई नतीजा नहीं निकला.

मार्च, 1981- एक नए स्वायत्त खालिस्तान का झंडा पंजाब स्थित आनंदपुर साहिब पर फहराया गया.

सितंबर, 1981- हिंद समाचार समूह के प्रमुख जगत नारायण की हत्या मामले में जरनैल सिंह भिंडरावाले ने आत्मसमर्पण किया. उन्हें हिरासत में लेकर जेल भेज दिया गया.

भिंडरावाले अपने मक़सद के लिए हिंसा का रास्ता अपनाने को सही मानते थे.

इसी महीने दल खालसा के गजिंदर सिंह और सतनाम सिंह पौंटा सहित पांच सदस्य श्रीनगर से दिल्ली आ रहे इंडियन एयरलाइंस के विमान को हाईजैक कर लाहौर ले गए. अपहर्ताओं ने नकद रक़म और भिंडरावाले को जेल से रिहा करने की मांग रखी.

अक्टूबर, 1981- जरनैल सिंह भिंडरावाले जेल से रिहा कर दिए गए.

इसी महीने शिरोमणि अकाली दल और दिल्ली की केंद्र सरकार के बीच पहले दौर की बातचीत हुई, जिसमें शिरोमणि अकाली दल ने लचीला रुख अपनाकर अपनी मांगों को 45 से घटाकर 15 कर दिया. इनमें एक अहम थी भिंडरावाले की बिना शर्त रिहाई.

अप्रैल, 1982- शिरोमणि अकाली दल और केंद्र सरकार के बीच तीसरे दौर की बातचीत. इस बातचीत को अकाली दल ने विफल बताया था.

इसी महीने शिरोमणि अकाली दल अपने विरोध को आगे बढ़ाते हुए यमुना-सतलुज परियोजना का ज़ोरदार विरोध करने का फ़ैसला किया और नहर रोको मोर्चा खोल दिया.

जुलाई, 1982- भिंडरावाले अमृतसर स्थित स्वर्ण मंदिर परिसर में गुरुनानक निवास के कमरा नंबर 47 में आ जाते हैं.

हाईजैक, हत्याएं, हिंसा... सुलगा पंजाब

अगस्त, 1982- अकाली दल ने धर्म युद्ध मोर्चा की घोषणा की.

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Image caption ऑपरेशन ब्लू स्टार के ठीक पहले और बाद में स्थितियां काफ़ी तनावपूर्ण रहीं.

इसी महीने दिल्ली से श्रीनगर जा रहे एक 126 यात्रियों वाले इंडियन एअरलाइंस के विमान को हाईजैक कर लाहौर में उतारने की कोशिश की गई, लेकिन लाहौर से इसकी इजाज़त नहीं मिली. इसके बाद विमान को अमृतसर में उतारा गया. अपहर्ता को अमृतसर में गिरफ़्तार कर लिया गया.

इसी महीने इंडियन एअरलाइंस के एक और विमान को जोधपुर के रास्ते मुंबई से दिल्ली आते वक़्त हाईजैक कर लिया गया. इस विमान को भी लाहौर में उतरने की अनुमति नहीं मिली. इसके बाद अपहर्ता ने विमान को अमृतसर में उतारा. अमृतसर हवाई अड्डे पर कमांडो कार्रवाई में सिख अपहर्ता मुसीबत सिंह की मौत.

नवंबर, 1982- दिल्ली में नौवें एशियाई खेलों के आयोजन के दौरान अकाली दल ने विरोध की अपील की. कई सिख राजधानी में दाखिल होने की कोशिश करते पकड़े गए. कुछ को प्रताड़ित किया गया. सिखों के उत्पीड़न के मामले मुख्य रूप से हरियाणा से सामने आए.

अप्रैल, 1983- पंजाब पुलिस के डीआईजी अवतार सिंह अटवाल की अमृतसर में स्वर्ण मंदिर के ठीक सामने हत्या कर दी गई.

जून-अगस्त, 1983- अकाली दल ने रेल रोको और काम रोको मोर्चा खोला. इससे आम जनजीवन और रेल यातायात बुरी तरह प्रभावित हुआ.

अक्टूबर, 1983- दरबारा सिंह के नेतृत्व वाली पंजाब की कांग्रेस सरकार को भंग कर राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू कर दिया गया.

दिसंबर, 1983- भिंडरावाले अब अमृतसर स्थित स्वर्ण मंदिर के गुरु नानक निवास से परिसर के सबसे अहम हिस्से यानी अकाल तख़्त साहिब में पहुंच गए थे.

फ़रवरी, 1984- पंजाबी के सर्वाधिक पढ़े जाने वाली मासिक पत्रिका, ‘प्रीतलारी’ के संपादक और वरिष्ठ पत्रकार सुमित सिंह शम्मी की हत्या कर दी गई.

अप्रैल, 1984- पूर्व विधायक और अमृतसर में भाजपा प्रमुख हरबंस लाल खन्ना की उनके अंगरक्षक समेत गोली मारकर हत्या. अगले दिन उनकी शवयात्रा में हिंसा भड़क गई. इसमें आठ लोग मारे गए और नौ घायल हुए थे.

ऑपरेशन ब्लू स्टार

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इसी सप्ताह हिंदू ब्राह्मण परिवार से आने वाले पंजाबी भाषा के प्रोफ़ेसर विश्वनाथ तिवारी की उनकी पत्नी समेत हत्या कर दी गई. प्रोफ़ेसर तिवारी की पत्नी पंजाबी थीं.

दोनों गुटों, लोगंवाल और भिंडरावाले ने पर्चे बांटकर एक-दूसरे पर सिख संप्रदाय के नीचे गिरने का कारण बनने के आरोप लगाए.

मई, 1984 - हिंद समाचार समूह के संपादक जगत नारायण की हत्या के बाद उनके बेटे रमेश चंद्र ने ज़िम्मेदारी संभाली थी, लेकिन उसी महीने उनकी भी जालंधर स्थित उनके कार्यालय में हत्या कर दी गई.

06 जून, 1984- अमृतसर स्थित दरबार साहिब यानी स्वर्ण मंदिर परिसर में भारतीय सेना ने प्रवेश किया.

सेना ने स्वर्ण मंदिर को चारों ओर से घेर लिया. भारी गोलाबारी और संघर्ष में सैकड़ों लोगों की मौत हुई. मंदिर परिसर भी क्षतिग्रस्त. इस हमले में भिंडरावाले और लेफ्टिनेंट जनरल शहबेग सिंह सहित कई प्रमुख लोगों की मौत.

इस अभियान को ऑपरेशन ब्लू स्टार का नाम दिया जाता है.

07-10 जून, 1984- देश के कई हिस्सों में सिख सैनिकों के विद्रोह की ख़बरें आती हैं.

सिख रेजीमेंट के क़रीब 500 सैनिकों ने राजस्थान के गंगानगर ज़िले में ऑपरेशन ब्लू स्टार की ख़बरें सुनकर बग़ावत कर दी थी. बिहार के रामगढ़ (अब झारखंड में), अलवर, जम्मू, थाणे और पुणे में सिख सैनिकों ने विद्रोह किया था.

रामगढ़ में विद्रोही सैनिकों ने अपने कमांडर, ब्रिगेडियर एससी पुरी की हत्या कर दी थी.

जुलाई, 1984- भारत सरकार ने ऑपरेशन ब्लू स्टार पर एक श्वेतपत्र जारी किया, लेकिन उसे आलोचना का सामना करना पड़ा.

इंदिरा गांधी की हत्या... और सिख विरोधी दंगे

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ऑपरेशन ब्लू स्टार के चार महीने बाद ही इंदिरा गांधी की हत्या कर दी गई थी.

31 अक्टूबर, 1984- तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के दो सिख अंगरक्षकों, सतवंत सिंह और बेअंत सिंह ने उनकी गोली मारकर हत्या कर दी.

इंदिरा गांधी की हत्या के तुरंत बाद देश के कई हिस्सों में सिख विरोधी दंगे भड़के उठे. इन दंगों में हज़ारों लोगों की जान गई.

जून, 1985- एअर इंडिया की उड़ान संख्या 182 का विमान आयरलैंड के पास नष्ट हो गया. इस हादसे में 329 लोगों की मौत हो गई.

जुलाई, 1985- तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी और हरचंद सिंह लोंगवाल ने एक समझौते पर हस्ताक्षर किए. इसके बाद चंडीगढ़ पंजाब को मिला.

अगस्त, 1985- एक गुरुद्वारे में भाषण देते वक़्त हरचंद सिंह पर हमला कर उनकी हत्या कर दी गई.

सितंबर, 1985- अकाली दल को पंजाब में चुनाव में भारी जीत मिली. सुरजीत सिंह बरनाला राज्य के मुख्यमंत्री बने.

जनवरी, 1986- स्वर्ण मंदिर यानी दरबार साहिब का नियंत्रण एक बार फिर से शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधन कमेटी को सौंप दिया गया.

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