किताबें पढ़ने और वाद विवाद सुनने के शौकीन थे मुंडे

  • 3 जून 2014
गोपीनाथ मुंडे इमेज कॉपीरइट AFP

भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता और मोदी सरकार में केंद्रीय ग्रामीण विकास और पंचायती राज मंत्री गोपीनाथ मुंडे की मंगलवार सुबह एक सड़क दुर्घटना में मौत हो गई.

मुंडे महाराष्ट्र के पूर्व उप मुख्यमंत्री थे और सूबे की राजनीति में उनको कद्दावर नेताओं में गिना जाता है.

महाराष्ट्र में भाजपा को जमीनी स्तर तक लोकप्रिय बनाने में पार्टी के पूर्व महासचिव प्रमोद महाजन के साथ ही उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है.

महाराष्ट्र के बीड़ जिले के नाथरा गांव में एक किसान परिवार में 12 दिसंबर 1949 को जन्मे गोपीनाथ मुंडे का राजनीतिक सफर काफी संघर्ष वाला रहा है.

मुंडे की निजी वेबसाइट के अनुसार, उनके पिता पांडुरंगराव और माँ लिम्बाबाई ने उनकी शिक्षा पर विशेष ध्यान दिया और 1969 में पिता की मृत्यु के बाद उनके भाइयों ने उनकी मदद की.

उनकी प्राथमिक शिक्षा गांव के ही भवन विहीन स्कूल में हुई. माध्यमिक शिक्षा के लिए वो परली तहसील के ज़िला परिषद के स्कूल आ गए.

इस छोटे से कस्बे में आर्य समाज का मंदिर था और उनका जुड़ाव आर्य समाज से हो गया.

उन्होंने अपनी वेबसाइट में लिखा है कि परली में रहते हुए वो समाचारपत्र और किताबें पढ़ने के लिए और वहां चल रही बहसों को सुनने के लिए अक्सर ही वहां जाते रहते थे.

बीड़ ज़िले में गरीबी, सूखा और पलायन ने उनके अंदर कुछ करने की प्रेरणा पैदा की.

कॉलेज से राजनीति

हाई स्कूल के बाद उन्होंने अम्बेजोगई के एक कॉलेज में कामर्स विषय में दाखिला लिया और यहीं वो छात्र आंदोलन से जुड़े.

कॉलेज के दौरान ही उनकी मुलाक़ात प्रमोद महाजन से हुई. महाजन मुंडे के सीनियर थे और बाद में अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में सूचना और प्रसारण मंत्री भी रहे.

मुंडे ने उच्च शिक्षा मराठवाड़ा और पुणे विश्वविद्यालय से ग्रहण की.

मुंडे अपने पांच भाई बहनों में तीसरे नंबर पर थे. उनसे दो छोटे भाई परली में ही किसानी करते हैं.

लोकसभा वेबसाइट के अनुसार, पांच बार महाराष्ट्र विधान सभा के सदस्य रहे गोपीनाथ मुंडे 1995 से 1999 के बीच महाराष्ट्र के उप मुख्यमंत्री भी रहे.

1992 से 1995 के बीच वो महाराष्ट्र विधानसभा में प्रतिपक्ष नेता थे.

1999 में पहली बार आम चुनावों में महाराष्ट्र के बीड़ लोकसभा क्षेत्र से जीतकर आए मुंडे ने सोलहवीं लोकसभा का चुनाव भी बीड़ से लड़ा और विजयी हुए. उन्हें मोदी सरकार में केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री बनाया गया था.

इसके अलावा 2009 से लेकर 2010 के बीच वो संसद की कई समितियों के सदस्य और अध्यक्ष रहे.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए यहां क्लिक करें. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर भी फ़ॉलो कर सकते हैं.)

संबंधित समाचार