रणवीर मुठभेड़ मामले में 18 पुलिसवाले दोषी करार

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दिल्ली की एक अदालत ने रणवीर फर्जी मुठभेड़ मामले में उत्तराखंड पुलिस के 18 कर्मियों को दोषी करार दिया है.

ये मामला 3 जुलाई 2009 का है जब एक चौकी प्रभारी की सर्विस रिवाल्वर लूटने के आरोप में उत्तराखंड पुलिस ने रणवीर नाम के युवक को मार गिराने का दावा किया था और उनके दो साथी फरार बताए थे.

दरअसल रणवीर बागपत के एक छात्र थे जो अपने दोस्तों को साथ देहरादून घूमने गए थे.

सरकार ने इस मामले में अभिुयक्त पुलिसकर्मियों के खिलाफ़ हत्या और अन्य धाराओं में मुकदमे दर्ज कर दिए थे.

बाद में इस मामले की जांच सीबीआई को सौंप दी गई थी.

रणवीर की पोस्ट मॉर्टम रिपोर्ट से पता चला कि उनके शरीर पर चोट के 28 निशान थे और उन्हें 22 गोलियां मारी गई थीं.

अदालत ने 17 पुलिसकर्मियों को हत्या या हत्या के षडयंत्र का दोषी पाया है जबकि एक पुलिसकर्मी को सबूतों को नष्ट करने का दोषी ठहराया है.

'कई सबूत थे'

इस मामले में उत्तराखंड पुलिस के 18 पुलिसकर्मी दिल्ली की तिहाड़ जेल में बंद हैं.

सीबीआई के निदेशक रंजीत सिन्हा ने अदालत के फ़ैसले पर ख़ुशी जताई है.

उन्होंने कहा, "हमने इन पुलिसकर्मियों को हत्या का अभियुक्त बनाया था और ट्रायल कोर्ट ने हमारे निष्कर्ष को बरक़रार रखा है."

सीबीआई निदेशक ने बताया कि इन पुलिसकर्मियों को अभियुक्त बनाए जाए के लिए बहुत से परिस्थितिजन्य सबूत थे.

उन्होंने कहा, "इन लोगों पर एक निर्दोष व्यक्ति को मारने के लिए फर्जी मुठभेड़ करने का आरोप था."

अदालत के फ़ैसले के बाद रणवीर के पिता रवींद्रपाल सिंह ने सीबीआई को सराहा और कहा कि वो सच को सामने लेकर आए.

उन्होंने इस मामले को उठाने के लिए मीडिया और आम लोगों को भी धन्यवाद दिया.

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