प्रणब मुखर्जी ने पेश किया मोदी सरकार का एजेंडा

भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, भारत के राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के साथ इमेज कॉपीरइट AFP GETTY

भारत के राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने सोमवार को संसद के संयुक्त अधिवेशन को संवोधित करते हुए मोदी सरकार का एजेंडा पेश किया.

इसमें आर्थिक सुधारों को गति देने, विदेशी निवेश को प्रोत्साहित करने समेत सार्वजनिक क्षेत्र के खनन उद्योग में निजीकरण को प्रोत्साहन देने की बात भी कही गई.

राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने अपने भाषण में भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व में बनने वाली नई सरकार की कई महत्वाकांक्षी नीतियों का ज़िक्र किया.

इसमें नई सरकार के भारत में सौ नए शहरों के निर्माण और रेलवे नेटवर्क को मजबूत बनाने के लक्ष्य को रेखांकित किया गया.

उन्होंने आगे कहा कि इसके साथ साथ लंबे समय से लटकी पड़ी बड़ी परियोजनाओं को तेज़ी से मंजूरी दी जाएगी.

'हर घर में बिजली'

इस संदर्भ में राष्ट्रपति ने कहा कि सार्वजनिक क्षेत्र के कोयला खनन में तात्कालिक आधार पर निजीकरण की नीति अपनाएगी.

उन्होंने कहा कि नई सरकार की कोशिश होगी कि हर भारतीय के घर में बिजली मुहैया हो सके.

राष्ट्रपति ने कहा, "सरकार ब्रांड इंडिया को पाँच टी यानी ट्रेडिशन, टैलेंट, टूरिज्म, ट्रेड और टेक्नॉलजी के माध्यम से फिर से स्थापित करेगी."

आंतरिक सुरक्षा के मसले पर उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय स्तर पर राज्यों के साथ मिलकर दंगों के ख़िलाफ़ नीतियां बनाई जाएंगी.

आतंकवाद और दंगों के ख़िलाफ़ सरकार जीरो टालरेंस की नीति अपनाएगी और नशीले पदार्थों की तस्करी और साइबर अपराधों पर अंकुश लगाने के लिए नया बुनियादी ढांचा निर्मित किया जाएगा.

उन्होंने यह भी कहा कि सरकार सार्क को पुनर्जीवित करेगी. राष्ट्रपति ने कहा कि सरकार नेशनल वॉर मेमोरियल का निर्माण करेगी और समान रैंक के लिए समान पेंशन वाली योजना को लागू करेगी.

'पटरी पर अर्थव्यवस्था'

समाचार एजेंसी एएफ़पी के मुताबिक़ संसद के संयुक्त अधिवेश में भारत के राष्ट्रपति ने कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था ने 'बेहद मुश्किल दौर' का सामना किया और उस समय मुद्रास्फीति की दर काफ़ी ऊंची थी.

प्रणब मुखर्जी ने कहा, "आर्थिक मोर्चे पर देश काफ़ी कठिन दौर से गुजर रहा है और अर्थव्यवस्था को फिर से पटरी पर लाना मेरी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है."

नई सरकार की रूपरेखा के बारे में उन्होंने आगे कहा, "मेरी सरकार आर्थिक वृद्धि की दर को बढ़ाने, मुद्रा स्फीति पर काबू पाने और निवेश के चक्र को फिर से शुरू करने के साथ-साथ निवेशकों में विश्वास बहाली का काम करेगी."

प्रणब मुखर्जी ने मोदी सरकार का एजेंडा बताते हुए कहा कि सरकार चुनाव पूर्व किए गए वादों को पूरा करने के लिए हर संभव कोशिश करेगी.

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