बेतहाशा गर्मी से झुलसते पहाड़

  • 14 जून 2014
उत्तराखंड

उत्तराखंड के पहाड़ी इलाक़ों में तापमान में बढ़ोतरी लोगों को हैरान-परेशान कर रही है. मैदान तो मैदान पहाड़ी इलाक़ों में भी लोगों को गर्मी से निजात नहीं.

पहाड़ों की रानी मसूरी से लेकर बद्रीनाथ के पास जोशीमठ और दूसरे पहाड़ी क़स्बे भी झुलस रहे हैं. हर जगह तापमान पिछले दिनों चालीस डिग्री सेल्सियस के या तो क़रीब पहुंच गया या उसके पार हो गया.

क्या तापमान में ये वृद्धि असाधारण और अभूतपूर्व है. क्या ग्लोबल वॉर्मिंग की चपेट में भी उत्तराखंड की वादियां आ गई हैं. क्या हिमालय भी इस वॉर्मिंग की ज़द में है.

ये सारे सवाल पर्यावरणविदों और आम लोगों को चिंता में डाल रहे हैं. पहाड़ ही तपे रहेंगे तो लोग कैसे जाएंगे.

देहरादून में तापमान 40-41 डिग्री जा रहा है तो मसूरी जैसे पर्यटन स्थलों पर पिछले दिनों पारा 40 डिग्री को छू गया था.

बद्रीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग पर कर्णप्रयाग क़स्बे में पारा, उत्तर भारत के मैदानी इलाक़ों से ज़्यादा 45 का आंकड़ा तक पार कर गया. यही हाल उत्तरकाशी का था जहां तापमान इस बीच 40-44 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचा.

रोज़मर्रा का जीवन अस्तव्यस्त

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आम लोगों को तपिश से रोज़मर्रा का जीवन अस्त-व्यस्त तो हुआ ही है, ठंडक और शीतल हवाओं का आनंद उठाने पहाड़ आने वाले सैलानी भी मायूस हुए हैं. सैलानियों की आमद में कमी आई है. इसका असर स्थानीय कारोबार पर पड़ रहा है.

मौसम विभाग का कहना है कि तापमान में ये बढ़ोतरी कोई अनोखी बात नहीं है. ऐसा पहले भी होता रहा है.

मौसम विभाग, देहरादून के निदेशक आनंद शर्मा कहते हैं, “मौसम में ये बदलाव असाधारण नहीं हैं. न ही गर्मी के कोई रिकॉर्ड टूटे हैं. इतना ज़रूर है कि राज्य भर में पहाड़ और मैदान सब जगह अधिकतम तापमान सामान्य से चार पांच डिग्री ऊपर चल रहा है.”

मौसम विभाग का कहना है कि प्री मॉनसून बारिश में देरी की वजह से वातावरण गर्म हो रहा है और नमी ख़त्म हो रही है.

आनंद शर्मा का कहना है कि अगले कुछ दिनों तक मौसम का मिज़ाज गरम ही रहेगा. ऊंचाई वाले पहाड़ी इलाक़ों में अलबत्ता बारिश से कुछ राहत मिल सकती है.

पहाड़ी इलाक़ों में मौसम में आ रहे बदलावों के बारे में देहरादून की मिसाल देते हुए आनंद शर्मा कहते हैं, “आमतौर पर इस समय देहरादून में तापमान 34 से 35 डिग्री सेल्सियस रहना चाहिए. बदली आ जाती है और बारिश शुरू हो जाती है, तापमान गिरने लगता है. लेकिन इस समय प्री मॉनसून बारिश नहीं है. अभी कुछ दिन तक इससे तापमान बढ़ा है. देहरादून में 1902 में 43.9 डिग्री सेल्सियस तक तापमान चला गया था. उस समय पूरा जंगल था यहां पर आबादी भी नहीं थी और न ही निर्माण.”

पहाड़ों में गर्मी की वजह

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Image caption गर्मी के कारण जानवरों की भी हालत ख़राब है. तस्वीर में दिख रहे हैं भोपाल स्थित वन विहार के चीतल.

पहाड़ों में भी इतना ऊंचा तापमान बढ़ने का अर्थ क्या ग्लोबल वॉर्मिग है. इस पर आनंद शर्मा कहते हैं, “मैं इसे इंटर एनुअल क्लाइमेट वैरिएबिलिटी कहूंगा जो मौसम से जुड़ी एक स्वाभाविक परिघटना है इसे जलवायु परिवर्तन से जोड़ना ठीक नहीं होगा.”

इस बीच बेतहाशा गर्मी ने पहाड़ी इलाक़ों में जंगल की आग को भड़का दिया है. देहरादून के चकराता वन प्रभाग का रेखनाड़ रेंज का जंगल जल रहा है. अब तक क़रीब 100 हेक्टेयर जंगल ख़ाक हो गया है. पास के गांवों में सेब के दो हज़ार पेड़ भी जल कर राख हो गए.

यही हाल ऊंचे पहाड़ी इलाक़ों का भी है. जहां रह रहकर जंगल की आग भड़क उठती है. उत्तरकाशी, पौड़ी के लैंसडौन के जंगलों का भी यही हाल है.

सरकारी आंकडों के मुताबिक़ एक जनवरी से नौ जून तक वनाग्नि की 260 से ज़्यादा घटनाएं हो चुकी हैं. आग बुझाने के लिए वन विभाग की मशीनरी और उपकरण कारगर साबित नहीं हुए हैं.

जंगल की आग का असर वहां की वनस्पति पर तो पड़ा ही है जंगली जानवर भी जान बचाने के लिए इधर उधर भाग रहे हैं.

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