जदयू को राजद का सहारा, निर्दलीयों को भाजपा का

  • 19 जून 2014
नीतीश कुमार और लालू यादव इमेज कॉपीरइट PTI

बिहार में राज्यसभा की दो सीटों के लिए गुरुवार को उपचुनाव है. इसके एक दिन पहले राष्ट्रीय जनता दल (राजद) और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के फ़ैसलों ने लगातार चर्चा में बने इस चुनाव को दिलचस्प मोड़ पर पहुंचा दिया.

बुधवार दोपहर को पहले राजद के राष्ट्रीय अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव ने जनता दल यूनाइटेड (जदयू) के दोनों प्रत्याशियों को राजद के समर्थन की घोषणा की.

फिर देर रात भाजपा ने यह फ़ैसला किया कि वह राज्यसभा उपचुनाव में निर्दलीय प्रत्याशियों का समर्थन करेगी.

उपचुनाव में जदयू के प्रत्याशी ग़ुलाम रसूल बलियावी का मुक़ाबला पूर्व राज्यसभा सांसद साबिर अली से और जदयू के दूसरे उम्मीदवार और पूर्व राजनयिक पवन वर्मा का मुक़ाबला उद्योगपति अनिल शर्मा से है.

ग़ौरतलब है कि राज्यसभा की तीन सीटों के लिए अलग-अलग उपचुनाव होना था. इसमें से एक सीट पर जदयू अध्यक्ष शरद यादव निर्विरोध चुने जा चुके हैं. परिणाम देर शाम तक आने की संभावना है.

समर्थन और आलोचना

राजद विधायक दल की एक बैठक मंगलवार को भी हुई थी. इसमें लालू यादव को उपचुनाव से संबंधित फ़ैसला लेने के लिए अधिकृत किया गया था.

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Image caption कुछ महीने पहले साबिर अली भाजपा में शामिल हुए थे लेकिन पार्टी के अंदर विरोध होने से उनकी सदस्यता निरस्त कर दी गई थी.

बुधवार को पार्टी अध्यक्ष ने पटना स्थित अपने सरकारी आवास पर विधायकों की एक बार फिर बैठक की और इसके बाद अपने फ़ैसले से संबंधित लिखित बयान पढ़ा.

चुनाव में जीत के लिए 117 मतों की ज़रूरत है. जदयू के पास 117 विधायक हैं लेकिन इनमें से कुछ बागी हो चुके हैं और उनके चुनाव में क्रॉस वोटिंग करने की संभावना है.

बिहार विधानसभा में भाजपा के 84, राजद के 21, कांग्रेस के चार, सीपीआई का एक और दो निर्दलीय विधायक हैं.

यही वजह है पिछले दिनों बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और जदयू नेता नीतीश कुमार ने उपचुनाव में राजद से समर्थन की अपील की थी.

जदयू को समर्थन देने की घोषणा करते हुए लालू यादव के कहा कि भाजपा बिहार की सत्ताधारी पार्टी में फूट डालकर सत्ता हासिल करना चाहती है. ऐसे में राजद बिहार के हित में सामाजिक न्याय की स्थापना और भाजपा के षडयंत्र को विफल करने के लिए जदयू प्रत्याशियों का समर्थन करेगा. उन्होंने भरोसा जताया कि राजद का कोई भी विधायक क्रॉस-वोटिंग नहीं करेगा.

लेकिन साथ ही लालू यादव जदयू की आलोचना करने से भी नहीं चूके.

उन्होंने कहा, "हम यह भी स्पष्ट कर देना चाहते हैं कि वर्तमान सत्ताधारी दल ने ही भाजपा जैसे दल को मज़बूत आधार देकर पनपने का मौका दिया और सामाजिक न्याय की ताक़तों को कमज़ोर करने में कोई कसर बाक़ी नहीं छोड़ी."

आलोचना के बावजूद नीतीश कुमार ने राजद के समर्थन देने के फ़ैसले का स्वागत किया और इसके लिए राजद और लालू प्रसाद यादव को धन्यवाद भी दिया. नीतीश के अनुसार राजद के इस फ़ैसले से भाजपा बेनक़ाब हुई है और उसकी साज़िश विफल हो गई.

निर्दलीयों को भाजपा का साथ

उपचुनाव पर अपनी रणनीति की घोषणा करने के लिए भाजपा ने पहले से ही 18 जून का दिन तय कर रखा था. बुधवार शाम को विधायक दल की दो दौर के बैठकों के बाद भाजपा ने निर्दलीय प्रत्याशियों को समर्थन की घोषणा की.

टेलीफ़ोन पर बीबीसी से बातचीत में भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष मंगल पांडेय ने कहा, “बिहार में भाजपा हमेशा राजद की कार्यसंस्कृति का विरोध करती आई है और अब जब राजद ने जदयू को समर्थन देने की घोषणा कर दी है तो हमारी ज़िम्मेवारी है कि हम राजद का विरोध करें.”

निर्दलीय प्रत्याशी साबिर अली को पिछले दिनों भाजपा ने अपना सदस्य बनाने लायक भी नहीं समझा था. ऐसे में भाजपा अब क्यों उनकी उम्मीदवारी का समर्थन कर रही है?

इसके जवाब में मंगल पांडेय ने कहा, “वर्तमान राजनीतिक हालात में सवाल उम्मीदवार का नहीं बल्कि बिहार की राजनीतिक दिशा का है.”

ग़ैर-भाजपावाद की पहल

राजद और भाजपा के फ़ैसलों पर टिप्पणी करते हुए वरिष्ठ पत्रकार विनोद बंधु का कहना है कि राजद और जदयू ने एक बार फिर साथ आकर ग़ैर-भाजपावाद की पहल की दिशा में एक और क़दम बढ़ाया है.

उनके अनुसार यह पहल पूरी भारतीय राजनीति को आने वाले दिनों में प्रभावित कर सकती है.

साथ ही बिनोद बंधु ने ये भी कहा, “यह पहल आगे क्या आकार लेगी, यह आने वाले दिनों में ही तय होगा.”

भाजपा के फ़ैसले के संबंध में बिनोद बंधु का मानना यह है कि राजद द्वारा अपनी रणनीति का खुलासा पहले कर दिए जाने के कारण भाजपा को अपने फ़ैसले को एक तार्किक आधार देने का मौका मिल गया है.

मुश्किल समय

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Image caption बिहार में राज्य सभा की तीन में से एक सीट पर जदयू अध्यक्ष शरद यादव निर्विरोध चुन लिए गए हैं.

हाल के लोकसभा चुनाव में 20 से दो सीटों पर सिमटने के बाद अब जदयू को बिहार में राज्यसभा उपचुनाव के रूप में एक और गंभीर राजनीतिक चुनौती का सामना कर पड़ रहा है.

लोकसभा चुनाव में बिहार के छह करोड़ से अधिक मतदाताओं से समर्थन मांगने के मुक़ाबले जदयू के लिए अपने ही सौ से अधिक विधायकों का समर्थन जुटाना ज़्यादा मुश्किल साबित हो रहा है.

राज्यसभा उपचुनाव में जदयू के लिए परेशानी की शुरुआत तब हुई थी, जब उसके 10 से अधिक बाग़ी विधायक दोनों निर्दलीय उम्मीदवारों के नामांकन में प्रस्तावक बने थे.

इस चुनौती के चक्रव्यूह को तोड़ने के लिए पहले नीतीश कुमार को लालू प्रसाद यादव से समर्थन मांगना पड़ा और फिर बुधवार को उन्होंने जदयू विधायकों को यह याद दिलाया कि पार्टी मां के समान होती है.

बीते दो हफ़्तों के दौरान कई सियासी रंग देखने को मिले हैं जिनमें चाय पार्टियों, भावनात्मक खतों के आदान-प्रदान, आरोप-प्रत्यारोप के दौर शामिल हैं.

इस सबके बीच राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि राज्यसभा उपचुनाव के नतीजे इन सियासी गतिविधियों पर फ़िलहाल के लिए पर्दा गिरा देंगे.

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मंगल पांडेय ने भी कहा है कि परिणाम जो भी हों, उनकी पार्टी सरकार को अस्थिर नहीं करेगी और न किसी दल को तोड़ने का काम करेगी.

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