यूपी सरकार ने बंद की मुफ़्त लैपटॉप योजना

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2012 के विधान सभा चुनाव में विद्यार्थियों के लिए मुफ्त लैपटॉप, लड़कियों की शिक्षा के लिए कन्या विद्याधन और बेरोज़गारों के लिए भत्ते के आश्वासन ने समाजवादी पार्टी को प्रदेश में पूर्ण बहुमत दिलाने में अहम भूमिका निभाई थी. युवा नेता अखिलेश यादव, नवजवानों और युवतियों का ख़ास ख़याल रखेंगे ऐसी उम्मीद लोगों के दिलों में बंधी थी.

इन योजनाओं पर करोड़ों रुपये खर्च करने के बाद भी जब लोकसभा चुनाव में पार्टी को प्रदेश में केवल अपने परिजनों की पांच सीट मिलीं तो मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने इन ड्रीम प्रोजेक्ट्स को बंद करने का निर्णय ले लिया है. 20 जून को पेश किए गए प्रदेश के 2.75 लाख करोड़ रुपये के बजट में इन तीनों योजनाओं के लिए कोई प्रावधान नहीं है.

मुख्यमंत्री के अनुसार नौजवानों का भविष्य सुधारने के उद्देश्य से शुरू की गई इन योजनाओं का लाभ युवाओं को मिला भी है. लेकिन इस बार के बजट में विकास और मूलभूत सुविधाओं पर विशेष बल दिया गया है. सरकार का कहना है कि बेरोज़गारी को ख़त्म करने के उद्देश्य से प्रदेश में पूंजी निवेश के ज़रिए रोज़गार के अवसर बढ़ाने पर अधिक ज़ोर दिया गया है.

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Image caption अखिलेश सरकार ने जून 2012 में मुफ़्त लैपटॉप-टैबलेट योजना के लिए 2721. 24 करोड़ रुपये आबंटित किये

अखिलेश यादव ने कहा है कि ग्रामीण विकास और नई रोज़गार योजनाओं के लिए इस बार अधिक धन आवंटित किया जाएगा. मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि अब ई-बुक्स और ई-लर्निंग पर सरकार का ध्यान रहेगा.

बड़ी योजनाएँ

जुलाई 2012 में अखिलेश सरकार ने कन्या विद्या धन योजना को फिर से शुरू करने का निर्णय लिया था. इससे पूर्व मायावती ने इस योजना को बंद कर दिया था. इस योजना के लिए लगभग 440 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया था. लोकसभा चुनाव को नज़र में रखते हुए 2013 में प्रत्येक मुस्लिम लड़की को, जो दसवीं कक्षा से आगे पढ़ना चाहती थी, सरकार ने 30000 रुपये देना तय किया था. एक लाख मुस्लिम लड़कियों को लाभ पहुंचाने वाली इस योजना पर 300 करोड़ रुपये के व्यय का प्रावधान था.

मुफ्त लैपटॉप और टैबलेट बांटना अखिलेश यादव की सबसे महत्वाकांक्षी योजना थी. जून 2012 में सरकार ने अपनी इस योजना के लिए 2721. 24 करोड़ रुपये आबंटित किए. इसके अंतर्गत कक्षा दस और 12 के सभी मेधावी क्षेत्रों को टैबलेट और लैपटॉप देने का प्रावधान किया गया.

इसमें टैबलेट के लिए 400 करोड़ रुपये और शेष राशि लैपटॉप के लिए निर्धारित की गई.

जुलाई 2013 तक प्रदेश सरकार ने 998.41 करोड़ रुपये की लागत से 5,19,600 लैपटॉप खरीद लिए थे. इस योजना से जुड़े अधिकारी प्रभात मित्तल बताते हैं की कुल 14.81 लाख लैपटॉप खरीदे गए थे जिनकी कीमत 2800 करोड़ रुपये थी.

फ़जीहत

योजना के लिए अखिलेश सरकार की जितनी तारीफ़ हुई उतनी फ़जीहत भी. एक तरफ़ तो कंप्यूटर देने वाली कंपनी का पैसा बकाया होने की बात आई तो दूसरी तरफ़ छात्रों द्वारा लैपटॉप और टैबलेट को बेच देने की चर्चा शुरू हो गई. कई जगह अनुपयुक्त छात्रों को लैपटॉप दिए जाने की भी शिकायतें सामने आईं.

बेरोज़गारों का कहना था कि सरकार उन्हें बेरोज़गारी भत्ता देकर भिखारी बना रही है. इसीलिए इस बार रोज़गार के नए अवसर देने की बात मुख्यमंत्री ने कही है.

लोकसभा चुनाव प्रचार में नरेंद्र मोदी और राहुल गांधी दोनों ने ही प्रदेश में बढ़ती हुई बेरोज़गारी पर प्रदेश सरकार को आड़े हाथों लिया था.

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