क्या रांची में जमा ली हैं चरमपंथ ने जड़ें?

  • 23 जून 2014
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11 जून को एनआईए की टीम जब रांची के सीठियो गांव में एक तालाब और कुएं को खंगाल रही थी, तो सहसा कुछ सवाल सामने आए: क्या पटना और बोधगया धमाकों से जुड़े संदिग्धों के तार रांची में जड़ जमाए हैं? क्या आगे और भी सुराग मिलने या किसी बड़े रहस्योद्घाटन के दावे किए जा सकते हैं?

पिछले साल 27 अक्तूबर को पटना में नरेंद्र मोदी की रैली से ठीक पहले हुए बम धमाके को लेकर सबसे ज़्यादा सुर्खियों में झारखंड की राजधानी रांची ही है.

संदिग्धों की गतिविधियों के बारे में एनआईए, राज्य की पुलिस के सहयोग से लगातार झारखंड में तफ़्तीश कर रही है. और इस तफ़्तीश के केंद्र में है रांची शहर और नज़दीक का एक गांव सीठियो.

एनआईए की टीम जांच के सिलसिले में फिर रांची पहुंची है. रविवार को एनआईए और पुलिस के अधिकारी सीठियो गांव भी गए थे.

रांची के वरीय आरक्षी अधीक्षक प्रभात कुमार ने इसकी पुष्टि भी की है. उन्होंने बताया है कि एनआईए अपनी तफ़्तीश को आगे बढ़ा रही है.

जुड़ते तार!

पटना और बोधगया धमाकों से जुड़े मामले में अब तक रांची से आठ संदिग्ध लोगों को गिरफ़्तार किया गया है. इनमें चार लोग सीठियो के रहने वाले हैं.

रांची से ही लगातार बमों, विस्फोटकों और अन्य आपत्तिजनक सामान बरामद होने का सिलसिला भी जारी है.

पुलिस का कहना है कि अब भी कई लोग शक के घेरे में हैं. उनसे पूछताछ होती रही है. इनमें एक डॉक्टर भी शामिल हैं, जिन्हें 22 मई को एनआईए ने हिरासत में लेकर लंबी पूछताछ की थी.

रांची में ही एनआईए और पुलिस लगातार यह पड़ताल करती रही है कि कहां बम बनाने के प्रशिक्षण दिए जाते थे और कहां परीक्षण किए जाते थे.

इसी महीने सात जून को एनआईए ने रांची पुलिस के सहयोग से सीठियो गांव से छह टाइमर बम बरामद किए थे.

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तब पुलिस ने दावा किया कि ये सभी बम पटना धमाके में इस्तेमाल किए बमों से मिलते-जुलते हैं.

फिर आठ जून को एनआईए ने रांची से ही दो और कथित संदिग्धों को भी गिरफ़्तार किया. इनमें इफ्तेखार अंसारी सीठियो गांव और परवेज़ असलम रांची के कर्बला चौक इलाक़े से पकड़े गए थे.

तब एनआईए ने बताया था कि परवेज़ के संबंध मध्य प्रदेश में सक्रिय रहे सिमी के एक हार्डकोर सदस्य से भी रहे हैं, जिन्हें हाल ही में पकड़ा गया है.

'शक के घेरे में गांव'

सीठियो से बम बरामद होने और एक और संदिग्ध की गिरफ़्तारी के बाद यह गांव फिर से चर्चा में आ गया है.

बड़ी संख्या में पुलिस बलों की मौजूदगी में गांव के तालाब और एक कुएं को खंगाला जा रहा था, तो सबकी निगाहें उधर ही लगी थीं.

उसी वक़्त उधर से गुज़रते एक युवा से जब बातें की थीं, तो उन्होंने पहले अपना नाम नहीं छापने का अनुरोध किया. वे कहने लगे कि इतने बड़े गांव को चंद लोगों ने शक के घेरे में ला खड़ा किया है.

उनका दावा है कि अहले-हदीस को मानने वाले कथित कुछ समर्थक इस तरह की गतिविधियों में शामिल हो सकते हैं, वरना अब भी गांव में अमन चैन चाहने वाले ज़्यादा हैं.

वे पूछते भी हैं सीठियो पुलिस की जांच के घेरे से कब तक बाहर निकल सकेगा.

'सकते में'

सीठियो के ग्राम प्रधान शंकर कच्छप बताते हैं कि 21 मई को जब पलामू से तौफीक और नुमान को गिरफ़्तार किए जाने की ख़बर आई, तो गांव के लोगों को लगा कि शायद अब वक़्त- बेवक़्त पुलिस की गाड़ियां सीठियो का चक्कर नहीं लगाएगी और सीठियो बदनामी से उबर जाएगा. लेकिन पखवाड़े भर बाद ही गांव से फिर टाइमर बम बरामद होने एक और युवक की गिरफ़्तारी ने बहुतों को सकते में डाल दिया है.

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पटना में हुए धमाकों बाद मौके से इम्तियाज़ अंसारी को पकड़ा गया था. वे भी सीठियो गांव के रहने वाले हैं. बम विस्फोट की घटना में इसी गांव के एक युवक तारिक मारे गए थे, जिनका शव लेने से उनके घर वालों ने मना कर दिया था.

हाल ही में एनआईए ने तारिक के भाई मौलाना तौफीक को हिरासत में लेकर पूछताछ की है.

सीठियो गांव के साजिद अंसारी जो पंचायत के कामकाज में सक्रिय भागीदारी निभाते हैं. उनका मानना है कि तौफीक अंसारी को बेवजह परेशान किया गया. वे निहायत सीधे इंसान हैं और गांव के सदर होने के नाते समाज में उनकी कद्र है.

इस साल 21 मई को ही रांची से दो कथित संदिग्ध हैदर अली उर्फ ब्लैक ब्यूटी और मुजीबुल्लाह अंसारी को गिरफ़्तार किया था.

हैदर अली बिहार के औरंगाबाद ज़िले और मुजीबुल्लाह अंसारी रांची ज़िले के चकला गांव के रहने वाले हैं.

हैदर की गिरफ़्तारी के लिए एनआईए ने उन पर दस लाख रुपए का इनाम भी रखा था. रांची पुलिस का दावा है कि संदिग्ध गतिविधियों के संचालन में हैदर मास्टर माइंड की भूमिका में थे.

पिछले तीस नवंबर को रांची के इरम लॉज से एनआईए और पुलिस ने नौ जिंदा बम बरामद किए थे. तब पुलिस ने दावा किया था कि ये बम मुजीबुल्लाह अंसारी के कमरे से बरामद किए गए थे.

'संदिग्धों का बेस'

मुजीबुल्लाह अंसारी के पिता जब्बार अंसारी कहते हैं कि उन्हें कतई यकीन नहीं होता कि उनके पुत्र इस तरह की गतिविधियों में शामिल रहे होंगे.

बकौल जब्बार- उनका बेटा किसी साजिश का शिकार हुआ है. इसलिए एक दिन वे बेदाग़ होकर निकलेंगे.

तो क्या रांची में संदिग्धों की गतिविधियां काफ़ी पहले से संचालित हो रही थी, इस सवाल पर रांची की वरीय आरक्षी अधीक्षक प्रभात कुमार कहते है, "अब तक जांच में जो तथ्य सामने आए हैं और जिस तरह से विस्फोटक सामान मिले हैं उससे एक बात स्पष्ट है कि संदिग्धों का बेस यहां तैयार हो रहा था."

यही से और भी धमाकों की तैयारी करने के संकेत भी मिले हैं.

उनका कहना है कि एनआईए के साथ रांची पुलिस की बैठकों में हमें कई मामलों पर नज़र रखने और छानबीन करने के निर्देश मिले हैं. उन्होंने इससे इनकार नहीं किया कि कुछ और भी रहस्योद्घाटन हो सकते हैं.

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