यूपी सीपीएमटी का पर्चा लीक, दोबारा होगी परीक्षा

  • 22 जून 2014
गाज़ियाबाद पेपर लीक की जाँच करते पुलिस अधिकारी इमेज कॉपीरइट PTI
Image caption गाज़ियाबाद पुलिस सीपीएमटी पेपर लीक की जांच कर रही है.

गाज़ियाबाद में पेपर लीक होने की वजह से रविवार 22 जून को होने वाली यूपी कंबाइंड प्री-मेडिकल टेस्ट (यूपी सीपीएमटी) परीक्षा रद्द कर दी गई है. अब यह प्रवेश परीक्षा 20 जुलाई को दोबारा होगी.

लखनऊ किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू) के प्रोफेसर एके सिंह के अनुसार पेपर ग़ाज़ियाबाद में इलाहाबाद बैंक और स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया की शाखाओं के स्ट्रॉन्ग रूम में रखे थे.

केजीएमयू के एक अन्य अधिकारी आरके दीक्षित पहले स्टेट बैंक पहुंचे. वहां उन्हें लगा कि जिस बक्से में पेपर थे, उसे तोड़ने की कोशिश की गई थी.

डॉक्टर सिंह ने बीबीसी को बताया, "जब इसकी सूचना मिली, तो हमसे इलाहाबाद बैंक की शाखा में जाने को कहा गया. जहां पेपर्स का एक दूसरा सेट प्लान-बी के तहत रखवाया गया था. वहां भी मुझे लगा जैसे बक्से से छेड़छाड़ की गई है. ऐसे में शक हो जाने पर परीक्षा को मुल्तवी कर देना ही उचित समझा गया."

इस बार इस परीक्षा का आयोजन केजीएमयू के ज़िम्मे था.

जांच कमेटी

मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के आदेश से इस मामले में जांच के लिए एक उच्चस्तरीय कमेटी गठित कर दी गई है. भारतीय जनता पार्टी ने इस मामले में सीबीआई द्वारा जांच कराने की मांग की है.

213 सेंटरों पर होने वाली इस परीक्षा में 109291 छात्र डॉक्टर बनने के लिए अपना भाग्य आज़माने के लिए तैयार होकर आए थे. सिर्फ़ लखनऊ के 43 सेंटरों पर ही 25000 छात्र यह परीक्षा देने वाले थे.

ग़ाज़ियाबाद के ज़िलाधिकारी से सूचना मिलने के बाद पेपर लीक में जांच के लिए केजीएमयू प्रशासन ने एक कमेटी तो बनाई ही, साथ ही सभी एग्जाम सेंटर से पेपर वापस मंगवा लिए.

केजीएमयू के नोडल अधिकारी सुशील कुमार ने इस मामले में गाज़ियाबाद की सिटी कोतवाली में परीक्षा नक़ल अधिनियम के तहत रिपोर्ट दर्ज कराई है. जांच के लिए यूपी स्पेशल टास्क फ़ोर्स का एक दल भी गाज़ियाबाद पहुंच चुका है.

सीपीएमटी का पर्चा लीक होना कोई नई बात नहीं है. इससे पहले मई 2005 में भी यह परीक्षा रद्द कर दी गई थी.

उस साल यूपी टास्क फ़ोर्स ने लखनऊ स्थित एक कोचिंग सेंटर के मालिक, पीडब्ल्यूडी के जूनियर इंजीनियर और दो अन्य लोगों को परीक्षा से एक दिन पहले पेपर के साथ गिरफ़्तार किया गया था.

ये लोग पर्चे बेचने के लिए कुछ लोगों का इंतज़ार कर रहे थे. 2005 की परीक्षा आगरा का डॉ भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय करवा रहा था.

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