शिवराज सिंह चौहान पर गिरेगी गाज?

शिवराज सिंह चौहान इमेज कॉपीरइट Vipul Gupta BBC

मध्यप्रदेश के व्यावसायिक परीक्षा मंडल का कथित घोटाला अब मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के लिए मुश्किल बन गया है. इसे लेकर शिवराज सिंह चौहान और उनके परिवार पर आरोप लग रहे हैं.

आरोप है कि व्यावसायिक परीक्षा मंडल द्वारा आयोजित परीक्षाओं और नौकरियों में पैसे लेकर मनमाने तरीक़े से उम्मीदवारों को प्रवेश दिया गया.

क्यों 'दाग़दार' हैं भारतीय नेताओं के दामन

हालांकि इन आरोपों को लेकर मंत्री और सरकार के प्रवक्ता नरोत्तम मिश्रा ने मुख्यमंत्री का बचाव किया. उन्होंने कहा है कि आरोप पूरी तरह बेबुनियाद हैं और वे इसके ख़िलाफ़ मानहानि का मुक़दमा दर्ज कराएंगे.

इस मामले में कांग्रेस के प्रवक्ता केके मिश्रा ने आरोप लगाया, “मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और उनके परिवार के ख़िलाफ़ मेरे पास कई प्रमाण हैं जिससे साबित होता है कि मुख्यमंत्री और उनका परिवार इस पूरे मामले में शामिल है. ऐसे कई एसएमएस हैं जिससे साबित होता है कि भाजपा नेताओं और 'व्यापम' घोटाले के आरोपी पंकज त्रिवेदी और नितिन महिंद्रा के बीच इस सिलसिले में बातचीत हुई है.”

मध्यप्रदेश व्यावसायिक परीक्षा मंडल का घोटाला कितना बड़ा है इसका अंदाज़ा शायद किसी को भी नहीं है.

ख़बरें हैं कि इस घोटाले में अधिकारियों, नेताओं और बड़े लोगों का एक ऐसा नेटवर्क बना कि संविदा शिक्षक से लेकर पीएमटी तक में पैसे लेकर फ़र्ज़ी लोगों को प्रवेश दे दिया गया.

सीएम और परिवार

पूर्व मुख्यमंत्री से लेकर पूर्व मंत्री तक का नाम इस फ़र्ज़ीवाड़े में आ चुका है और अब कांग्रेस ने सीधे मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और उनके परिवार को निशाना बनाया है.

वेतन हज़ारों में, तो संपत्ति करोड़ों में कैसे?

इमेज कॉपीरइट PTI

इस बारे में सरकार के प्रवक्ता नरोत्तम मिश्रा का कहना था, “कांग्रेस विधानसभा और लोकसभा में अपनी हार से कोई सबक़ नहीं ले रही है और झूठे आरोप लगाने में लगी है.”

इस घोटाले के सामने आने के बाद पूर्व मंत्री, व्यापम अधिकारियों, नेताओं सहित सैकड़ों बच्चों और उनके अभिभावकों को गिरफ़्तार किया जा चुका है.

व्यावसायिक परीक्षा मंडल द्वारा आयोजित सभी प्रतियोगी परीक्षाओं में घोटाले के आरोपों की जांच मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की निग़रानी में स्पेशल टास्क फ़ोर्स द्वारा की जा रही है.

'भारत में 54 फीसदी रिश्वत देते हैं तो जापान में एक फीसदी'

इसी हफ़्ते एसटीएफ़ ने लगभग 100 लोगों को गिरफ़्तार किया जिसमें मेडिकल छात्र, उनके अभिभावक और दलाल शामिल थे. मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के पूर्व सहायक प्रेम प्रसाद भी इस मामले में फंसे हुए हैं.

उमा भारती का नाम भी

इस मामले का पता पिछले साल जुलाई में तब चला जब इंदौर पुलिस ने पीएमटी परीक्षा देने आए 20 ऐसे छात्रों को पकड़ा, जो असली छात्रों के नाम पर परीक्षा दे रहे थे. इन फ़र्ज़ी छात्रों में से ज़्यादातर उत्तर प्रदेश के थे.

आगे की जांच में पता चला कि आख़िर किस तरह व्यावसायिक परीक्षा मंडल की हर परीक्षा में फ़र्ज़ीवाड़ा किया जाता रहा है.

मध्यप्रदेश के व्यावसायिक परीक्षा मंडल घोटाले ने प्रदेश भाजपा के कई नेताओं की नींद उड़ा दी है. पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती का नाम भी इसमें आ चुका है. वहीं मध्यप्रदेश के पूर्व उच्च शिक्षा और तकनीकी शिक्षा मंत्री लक्ष्मीकांत शर्मा इस मामले में गिरफ़्तार हो चुके हैं.

भाजपा नेता और खनन कारोबारी सुधीर शर्मा की तलाश में एसटीएफ़ जुटी हुई है.

घोटाला

व्यावसायिक परीक्षा मंडल, मध्यप्रदेश सरकार की एक संस्था है जो सरकारी कॉलेजों में संचालित कोर्स के लिए प्रवेश परीक्षा आयोजित करती आई है. इसके अलावा ये कुछ विभागों में भर्ती के लिए भी परीक्षाओं का आयोजन करते हैं.

चीन में भ्रष्टाचार के खिलाफ अखबारों की मुहिम

एसटीएफ़ ने इस मामले में सबसे पहले 130 लोगों के ख़िलाफ़ पिछले साल 7 और 9 दिसंबर को दो एफ़आईआर दर्ज की थी. व्यापम के पूर्व परीक्षा नियंत्रक पंकज त्रिवेदी और प्रिसिंपल सिस्टम एनॉलिस्ट नितिन महिंद्रा के बयानों के आधार पर पूर्व मंत्री लक्ष्मीकांत शर्मा के ख़िलाफ़ एफ़आईआर दर्ज की गई.

इन दोनों ने अपने बयान में कहा था कि पूर्व मंत्री द्वारा दिए गए रोल नंबर के छात्रों को इन्होंने पास करवाया था. एफ़आईआर में लिखा है कि पूर्व मंत्री जिन नामों के रोल नंबर भेजते थे, उनका पैसा उन्हें नहीं मिलता था. बल्कि वो पैसा वो ख़ुद रख लेते थे और रोल नंबर व्यापम के अधिकारियों को भेजते थे.

लक्ष्मीकांत शर्मा, पहली बार पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती के कैबिनेट में मंत्री बने थे. उसके बाद पिछले दस सालों में उन्होंने खनिज संसाधन, संस्कृति और उच्च शिक्षा जैसे महत्वपूर्ण विभागों को संभाला. लक्ष्मीकांत शर्मा पिछले विधानसभा चुनाव में सिरोंज से चुनाव हार गए थे.

इस मामले में पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती का नाम भी सामने आया था. उमा भारती ने अपना नाम घसीटे जाने को एक साजिश बताते हुए मांग की थी कि पूरे मामले की जांच सीबीआई से कराई जाए.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए यहां क्लिक करें. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर भी फ़ॉलो कर सकते हैं.)

संबंधित समाचार