बलात्कार पीड़िताः अपनों ने मुंह मोड़ा तो विदेशी आगे आए

  • 29 जून 2014
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राजस्थान के चित्तौड़गढ़ की जानकी का अपहरण कर बलात्कार करने के बाद रेलवे ट्रैक पर फ़ेंक दिया गया था. उनकी जान तो बच गई, लेकिन दोनों पैर पर चले गए. अभियुक्त गिरफ़्तार भी हुए लेकिन अपनों ने साथ छोड़ दिया. जर्मनी के लोगों ने उनकी दास्तां पढ़ी, तो उनकी मदद को आगे आए.

अब बीस साल की जानकी (बदला हुआ नाम) जयपुर फुट के सहारे जीवन की कठोर डगर पर फिर से चलने का यत्न कर रही हैं.

चित्तौड़गढ़ ज़िले में कपासन पुलिस के मुताबिक़, पिछले साल 16 सितंबर को एक स्थानीय ठेकेदार और उसके दो साथियों ने जानकी का अपहरण कर बलात्कार किया और उसके बाद चलती ट्रेन के आगे फेंक दिया.

पुलिस ने केस में नामज़द गांव के पूर्व सरपंच के बेटे समेत तीन लोगों को गिरफ़्तार किया, लेकिन सरपंच के बेटे को ज़मानत मिल गई जबकि दो जेल में हैं.

'संघर्ष जारी'

जानकी बताती हैं कि उनके पिता नहीं हैं और भाई अभी छोटा है. वह मनरेगा में मज़दूरी करती थीं, लेकिन काम नहीं मिला तो ठेकेदार के यहां काम करने लगीं.

जानकी कहती हैं, "ठेकेदार समेत तीन लोगों ने रेलवे क्रॉसिंग के पास ज़बरदस्ती की. जब मैंने पुलिस में शिकायत करने की बात कही तो उन्होंने चलती ट्रेन के आगे फेंक दिया. इससे मेरे दोनों पैर कट गए. ड्राइवर ने गाड़ी रोकी और फिर मुझे अस्पताल ले जाया गया."

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Image caption जानकी अब जयपुर फुट लगाकर नई सिरे से संघर्ष करने को तैयार हो रही हैं.

कभी वह गांव की ऊसर पगडंडियों पर कुलांचें भरती थीं, अब ज़िंदगी व्हीलचेयर में क़ैद होकर रह गई है. यह व्हील चेयर भी जर्मनी के एक पत्रकार हिलमर कोनिंग ने उपलब्ध करवाई.

वह इस घटना को कवर करने राजस्थान आए और अस्पताल में भर्ती जानकी से मिले. जानकी की दास्तां जब जर्मन अख़बारों में छपी, तो कई लोगों ने मदद के लिए हाथ बढ़ा दिए.

'व्हीलचेयर वापस ले ली'

जानकी के कृत्रिम पैर लगवाने जयपुर आए हिलमर कोनिंग कहते हैं, "एक जर्मन दैनिक ने जानकी को अपने पाठकों से रूबरू कराने वाले कार्यक्रम में शिरकत का न्योता दिया, पर वह इसके लिए तैयार नहीं हुईं. अब जर्मनी में बेरोज़गारी भत्ते पर गुज़र-बसर करने वाले दो लोगों ने जानकी को प्रतिमाह आर्थिक मदद देने का वायदा किया है. यह मदद पांच हज़ार रुपए के आसपास होगी."

जानकी के हक़ में खड़ी मानवधिकार कार्यकर्ता कविता श्रीवास्तव कहती हैं, "काफ़ी जद्दोजहद के बाद सरकार ने दो लाख रुपए देकर जानकी से मुंह मोड़ लिया. ऐसे मामले में कम से कम 10 लाख की तुरंत सहायता देनी चाहिए."

जर्मन पत्रकार कोनिंग कहते हैं, "मैं इस घटना से हिल गया था. मैंने देखा अस्पताल ने जानकी से व्हीलचेयर वापस ले ली. मैं दिल्ली लौटा और एक व्हीलचेयर खरीदी. साथ ही नित्यकर्म के लिए एक चेयर भी, क्योंकि मैंने जानकी की व्यथा को देखा था और विचलित था."

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