प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव पर हंगामा

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Image caption नृपेंद्र मिश्रा की नियुक्ति एक अध्यादेश के ज़रिए हुई थी

पूर्व टेलिकॉम नियंत्रक नृपेंद्र मिश्रा की नियुक्ति को जारी रखने के लिए नया बिल लाने पर संसद में हंगामा हो गया.

सरकार ने एक अध्यादेश के जरिए नियमों में बदलाव कर मिश्रा को प्रधानमंत्री कार्यालय में प्रमुख सचिव बनाया था.

कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल इसका विरोध कर रहे हैं.

भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाली सरकार ने मई में एक अध्यादेश के जरिए मिश्रा की नियुक्ति की थी.

सरकार नए कानून के जरिए मिश्रा की नियुक्ति को मुकम्मल रूप देना चाहती है.

नियमानुसार टेलीकॉम नियामक प्राधिकरण यानी ट्राई का पूर्व चेयरमैन केंद्र सरकार में कोई पद नहीं ले सकता.

विरोध

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीआई) के नेता डी राजा ने कहा, ''सरकार को इसके पीछे तर्क स्पष्ट करना चाहिए. इसका असर ट्राई और फिर दूसरे सेक्टर्स पर पड़ेगा.''

मिश्रा की नियुक्ति संबंधी अध्यादेश की जगह अगर नया कानून नहीं आता है तो उनकी नियुक्ति खुद ब खुद निष्प्रभावी हो जाएगी.

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कांग्रेस नेता ऑस्कर फर्नांडीज ने कहा, ''हम व्यक्तिगत तौर पर मिश्रा के विरोध में नहीं हैं बल्कि सिद्धांत रूप में इसके खिलाफ हैं.''

उन्होंने कहा, ''कैसे एक व्यक्ति को नियुक्त करने के लिए एक कानून बदला जा सकता है.''

मिश्रा ने 26 मई को मोदी के शपथ ग्रहण से पहले ही प्रमुख सचिव के रूप में कामकाज संभाल लिया था.

1967 बैच के आईएएस अधिकारी मिश्रा सरकार में कई महत्वपूर्ण पदों पर काम कर चुके हैं.

69 वर्षीय मिश्रा 1990 के दशक की शुरुआत में उत्तर प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री कल्याण सिंह के भी प्रमुख सचिव थे.

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