जान प्यारी है या सस्ती कार

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भारत में कार निर्माता कंपनियों के लिए बहुत जल्द हर कार में सुरक्षा एयरबैग और एंटी-लॉक ब्रेकिंग प्रणाली जैसे उपकरण देना अनिवार्य हो सकता है.

ऑटो विशेषज्ञों के अनुसार सरकार इस तरह कई सुरक्षा मानकों पर गंभीरता से विचार कर रही है.

अगर ये फ़ैसला ले लिया गया तो कारों की लागत में भी इज़ाफ़ा हो सकता है और उपभोक्ताओं को नई कार ख़रीदने के लिए 20% तक ज़्यादा रक़म देनी पड़ सकती है.

दुनिया भर में सालाना होने वाली सड़क दुर्घटनाओं में से लगभग 20% भारत में ही होती हैं जिनमें हज़ारों की मौत होती है.

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ऑटो विशेषज्ञ मुराद अली बेग के अनुसार यात्रियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए सभी कार निर्माता कंपनियों के लिए 50 से लेकर 70 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ़्तार के क्रैश-टेस्ट अनिवार्य बनाने पर विचार हो रहा है.

भारत में कार निर्माता कंपनियां यूरोप या दक्षिण अमरीका निर्यात होने वाली कारों को गहन सुरक्षा टेस्ट के बाद ही भेजती हैं और उन्हें सुरक्षा मापदंड के अनुसार स्टार रेटिंग दी जाती है.

अगर भारत में भी कारों की सुरक्षा को लेकर सख़्त क़ानून बन जाता है तो इन्हीं कार निर्माता कंपनियों को भारतीय बाज़ारों के लिए बनने वाली कारों पर भी इसे लागू करना पड़ेगा जिससे क़ीमतों में इज़ाफ़ा होना लाज़मी है.

इसी वर्ष एक निजी ब्रितानी कार सुरक्षा एजेंसी ने क्रैश-टेस्ट के दौरान पांच भारतीय कारों को असुरक्षित पाया था.

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