झारखंड: पत्नियों की हत्या के कई मामले

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झारखंड के आदिवासी इलाक़ों में पति के हाथों महिलाओं को मारे जाने की कई घटनाएं सामने आई हैं. सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भी परिवारों के बिखरने और समाज की स्थिति पर चिंता जताई है.

पुलिस के मुताबिक़ डेढ़ महीने के भीतर कुछ ख़ास आदिवासी इलाक़ों में कम से कम एक दर्जन महिलाओं की उनके पतियों ने कथित तौर पर हत्या कर दी है.

पश्चिम सिंहभूम, गुमला, रांची, खूंटी, दुमका, लोहरदगा और सिमडेगा जैसे ज़िलों के गांवों में इस तरह की घटनाओं का सिलसिला जारी है.

बढ़ती घटनाएं

हाल में दो ऐसी घटनाएं देखने को मिलीं. गुमला ज़िले के रायडीह थाना क्षेत्र के हेसाग चेरोटोली गांव के बिरसा उरांव दिहाड़ी मज़दूरी करते हैं.

छह जुलाई की रात उन्होंने अपनी पत्नी और एक बच्ची की कुल्हाड़ी से हमला कर कथित तौर पर हत्या कर दी. पुलिस के अनुसार दूसरी दुधमुंही बच्ची की रोने की आवाज़ सुनकर वे फ़रार हो गए. बाद में पुलिस ने उन्हें गिरफ़्तार कर लिया.

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दूसरी घटना रांची ज़िले के बगदरहा पतरा गांव की है. कैलाश लकड़ा नामक एक व्यक्ति ने कथित तौर पर अपनी पत्नी सुशीला केरकेट्टा को मार डाला और लाश को दो दिन तक घर में छिपाए रखा.

बताया जाता है कि उसी कमरे में पांच साल के बेटे को भी बंद करके रखा गया था. बाद में पुलिस ने कैलाश को पकड़ लिया, लेकिन पुलिस की हिरासत से वो फ़रार हो गए. पुलिस को पता चला है कि उनकी बीमार पत्नी उन्हें शराब पीने से मना करतीं थीं.

तफ्तीश

पश्चिम सिंहभूम के एसपी नरेंद्र सिंह बताते हैं कि वाक़ई ये घटनाएं चिंतित करने वाली हैं. जांच में ये तथ्य सामने आते रहे हैं कि आदिवासी इलाक़ों में नशाख़ोरी और अशिक्षा की वजह से हिंसक घटनाएं होती रही हैं.

अधिकतर घटनाओं में हथियार के रूप में कुल्हाड़ी का इस्तेमाल किया जाता है. कई मामलों में देखा जाता है कि आवेश में पत्नी, बच्चे की हत्या करने के बाद व्यक्ति ख़ुद थाने में आकर पूरी कहानी बयां कर जाता है.

सिंहभूम इलाक़े में सामाजिक विषयों पर काम करने वाली महिला कार्यकर्ता शांति सवैया बताती हैं कि ग़रीबी, अशिक्षा, रूढ़िवादिता और नशाख़ोरी की वजह से रिश्तों के ख़ून ज़्यादा हो रहे हैं, जिससे आदिवासी समाज और परिवार संकट में हैं.

पत्नी के साथ मामूली विवाद और नोंक-झोंक का परिणाम भी भयावह होता जा रहा है.

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