काटजू ने न्यायपालिका को घेरा, हुआ हंगामा

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भारतीय प्रेस परिषद के अध्यक्ष और सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जस्टिस मार्कंडेय काटजू के न्यायपालिका में कथित भ्रष्टाचार के दावे पर सोमवार को राज्यसभा में जमकर हंगामा हुआ.

ऑल इंडिया द्रविड़ मुनेत्र कषगम यानी एआईएडीएमके के सदस्यों ने राज्यसभा की कार्यवाही शुरू होते ही यह मुद्दा ज़ोर-शोर से उठाया. कुछ सदस्यों ने अख़बारों की प्रतियां भी दिखाईं. हंगामे के चलते सभापति को प्रश्नकाल की कार्यवाही दो बार स्थगित करनी पड़ी.

मद्रास हाईकोर्ट के जज रहे काटजू ने न्यायपालिका में कथित भ्रष्टाचार का आरोप लगाया था. उन्होंने दावा किया कि तमिलनाडु में ज़िला अदालत के एक जज पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप होने के बावजूद उन्हें मद्रास हाईकोर्ट का एडिशनल जज बनाया गया.

काटजू का दावा

अंग्रेज़ी अख़बार टाइम्स ऑफ इंडिया में लिखते हुए जस्टिस काटजू ने दावा किया है कि नवंबर 2004 में उनके मद्रास हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश बनकर जाने तक वह जज इसी पद पर रहे. उन्होंने आरोप लगाया कि इस जज को तत्कालीन यूपीए गठबंधन सरकार की एक सहयोगी पार्टी के एक बड़े नेता का समर्थन भी हासिल था.

जस्टिस काटजू का कहना है कि इस जज के ख़िलाफ़ भ्रष्टाचार की कई रिपोर्ट मिलने के बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के चीफ़ जस्टिस से इस जज के ख़िलाफ़ गोपनीय जांच की सिफ़ारिश की थी. बाद में मुख्य न्यायाधीश ने उन्हें बताया था कि आईबी को उस जज के ख़िलाफ़ पर्याप्त सबूत मिले थे.

Image caption मार्कंडेय काटजू सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश और भारतीय प्रेस परिषद के अध्यक्ष हैं

उन्होंने कहा कि इसके बावजूद वह जज पद पर बने रहे और उनके ख़िलाफ़ कोई कार्रवाई नहीं हुई.

एआईएडीएमके सदस्यों के हंगामे के चलते राज्यसभा की कार्यवाही पहले 10 मिनट के लिए और फिर दोपहर 12 बजे तक के लिए स्थगित करनी पड़ी.

एआईएडीएमके के सदस्य प्रश्नकाल निलंबित कर इस मुद्दे पर चर्चा की मांग कर रहे थे.

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