यूपीएससी परीक्षा: सड़क और संसद में हंगामा

यूपीएससी की परीक्षा में सीसैट का विरोध कर रहे छात्रों को पकड़ कर ले जाती पुलिस

संघ लोक सेवा आयोग यानी यूपीएससी की परीक्षा से सी-सैट को वापस लिए जाने का मुद्दा सड़क पर गूंजा और संसद में भी इस पर जमकर हंगामा हुआ.

हंगामे की वजह से राज्य सभा को दो बार स्थगित करना पड़ा. सुबह से ही बड़ी संख्या में छात्रों ने संसद भवन की तरफ मार्च करना शुरू कर दिया.

उत्तेजित छात्रों ने मुखर्जी नगर में एक बस में आग लगा दी और कई वाहनों में तोड़ फोड़ भी की.

पुलिस-छात्र संघर्ष

दिल्ली विश्वविद्यालय से लेकर अन्य कॉलेजों से भी यूपीएससी की परीक्षा देने वाले छात्रों ने संसद की तरफ मार्च करना शुरू कर दिया. पुलिस ने प्रदर्शन कर रहे सौ से ज़्यादा छात्रों को हिरासत में ले लिया.

कई स्थानों पर पुलिस और छात्रों के बीच संघर्ष भी हुआ. पुलिस ने संसद की ओर जाने वाले सभी मार्गों पर नाकेबंदी कर रखी थी. संसद भवन की ओर से जा रहे प्रदर्शनकारी छात्रों को बसों में भर कर इंडिया गेट ले जाया गया. हलांकि इस दौरान पुलिस ने कई अन्य छात्रों को भी हिरासत में लिया. जिन्हें बाद में छोड़ दिया गया.

हालांकि संसद में कार्मिक एवं जन शिकायत विभाग के राज्य मंत्री जीतेंद्र सिंह ने आश्वासन दिया कि भाषा को लेकर यूपीएससी की परीक्षा के उम्मीदवारों को नुक़सान नहीं होने दिया जाएगा.

छात्रों से सहानुभूति

उन्होंने संसद के बाहर पत्रकारों से कहा, "सरकार को छात्रों के साथ पूरी सहानुभूति है. उनके साथ भाषा को लेकर अन्याय नहीं होगा. हम इसका जल्द ही हल निकाल लेंगे.''

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सरकार ने मामले का हल निकालने के लिए एक तीन सदस्य समिति का गठन भी किया है.

छात्रों के आंदोलन को संचालित करने वाले चितरंजन ने बीबीसी से कहा कि सी-सैट से पहले मुख्य परीक्षा में बैठने वाले छात्रों में हिंदी और अन्य भाषाओं के छात्रों का फ़ीसदी 40 से ज़्यादा होता था, जबकि सी-सैट लागू होने के बाद इसमें भारी गिरावट आई. साल 2011 में मुख्य परीक्षा में बैठने वाले छात्रों में से 82.9% अंग्रेज़ी के थे. 2012 में यह संख्या 81.8% थी.

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